मुनेश त्यागी की कविता- उन्हें सलाम कैसे करूं?

कविता

उन्हें सलाम कैसे करूं?

मुनेश त्यागी

 

जो छीन रहे हैं शिक्षा को,

जो मिटा रहे रोजगार को,

जो करते बात विकास की,

नीतियां जिनकी विनाश की।

उन्हें सलाम कैसे करूं ?

उन्हें सलाम कैसे करूं ?

 

जो बढ़ा रहे  अविवेक  को,

जो बो  रहे  हैं  अज्ञान  को,

जो बढा रहे अंधविश्वास को,

जो मार रहे  हैं  विज्ञान  को,

उन्हें सलाम कैसे करूं?

उन्हें सलाम कैसे करूं?

 

जो थे आजादी के आंदोलन से दूर,

और बन गए थे सिर्फ तमाशबीन,

वे सब ही  हो  गए  हैं  आज,

भारत की सत्ता पर आसीन।

उन्हें सलाम कैसे करूं?

उन्हें सलाम कैसे करूं?

 

जो मार रहे हैं भाईचारे को,

जो उगा रहे हैं अन्याय को,

जो बढ़ा रहे हैं नफरत  को,

जो सता रहे  हैं  न्याय  को,

उन्हें सलाम कैसे करूं?

उन्हें सलाम कैसे करूं?

 

जो कुर्सी के  ही  प्यारे  हैं,

जो अमनचैन के हत्यारे हैं,

जो पैसे वालों के प्यारे  हैं,

वो  नेता  कहां  हमारे  हैं,

उन्हें सलाम कैसे करूं?

उन्हें सलाम कैसे करूं?

 

जो उगा रहे हैं वर्णवाद को,

जो बो रहे हैं जातिवाद को,

जो उगा रहे भाग्यवाद  को,

जो रौंद रहे हैं संविधान को।

उन्हें सलाम कैसे करूं?

उन्हें सलाम कैसे करूं?

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