कोटद्वार, उत्तराखंड की घटना के संदर्भ में ‘हम देखेंगे’ : अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान की ओर से जारी साझा बयान
मोहम्मद दीपक का जज़्बा एक उम्मीद है — इसे बचाइए
उत्तराखंड पुलिस का रवैया अत्यंत शर्मनाक,मूक दर्शक बनी रही
उत्तराखंड राज्य से आ रही घटनाओं ने देशभर के लेखकों, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों को गहरी चिंता में डाल दिया है। समृद्ध लोकसंस्कृति और रचनात्मक जन-प्रतिरोध की परंपरा के लिए जाना जाने वाला यह राज्य पिछले कुछ वर्षों से साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति की प्रयोगशाला बनता जा रहा है। योजनाबद्ध ढंग से तनाव पैदा करने वाली घटनाएँ लगातार घटित की जा रही हैं। इसके बावजूद, उत्तराखंड की सुसंस्कृत जनता का सहज और मानवीय प्रतिरोध बार-बार सामने आ रहा है।
इसी क्रम में गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी 2026 को उत्तराखंड के कोटद्वार स्थित पटेल रोड पर 75 वर्षीय वकील अहमद की दुकान — ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ — पर बजरंग दल से जुड़े कुछ उत्पाती तत्वों ने हमला किया। उनकी मांग थी कि दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाया जाए। दुकानदार द्वारा इसके लिए कुछ समय की मोहलत मांगे जाने के बावजूद हमलावरों ने धमकाना जारी रखा। यह देखकर पास स्थित जिम के ट्रेनर दीपक कुमार कश्यप ने हस्तक्षेप किया।
पीड़ित समुदाय के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए दीपक ने हमलावरों को अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया। आज देश उनके इस साहस में उम्मीद की एक उजली किरण देख रहा है। दीपक ने यह साबित किया कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक स्वास्थ्य की रक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है।
घटना के दिन तो हमलावर लौट गए, लेकिन 31 जनवरी 2026 को वे पुनः संगठित होकर आए। इस बार उन्होंने दीपक के जिम का घेराव किया और उनके परिवार को खुली धमकियाँ दीं। यह अत्यंत चिंताजनक है कि दोनों ही अवसरों पर राज्य पुलिस की मौजूदगी के बावजूद वह मूकदर्शक बनी रही। 31 जनवरी को दो एफआईआर दर्ज की गईं — एक दीपक कुमार के विरुद्ध नामजद, और दूसरी चालीस-पचास अज्ञात लोगों के खिलाफ।
जबकि सच्चाई यह है कि इन घटनाओं से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद हैं, जिनमें वास्तविक हमलावरों की पहचान स्पष्ट रूप से की जा सकती है।
वर्तमान स्थिति यह है कि बजरंग दल से मिल रही धमकियों के कारण दीपक कुमार का जिम बंद है और उनका परिवार भय के साए में जीने को विवश है। इसी तरह वृद्ध दुकानदार वकील अहमद और उनका परिवार भी दहशत में है। पूरे शहर का वातावरण साम्प्रदायिक ज़हर से विषाक्त किया जा चुका है।
‘हम देखेंगे’ : अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान से जुड़े सभी संगठन इस स्थिति पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हैं और स्पष्ट रूप से मांग करते हैं कि
