इंडियन कल्चरल कांग्रेस कोच्चि का संदेश: एक रिपोर्ट

इंडियन कल्चरल कांग्रेस कोच्चि का संदेश: एक रिपोर्ट

वंदना सुखीजा, गुरबख्श सिंह मोंगा

केरल की कोच्चि शहर में राज्य सरकार द्वारा तीन दिनों की भारतीय सांस्कृतिक कांग्रेस (इंडियन कल्चरल कांग्रेस) का आयोजन शहर के सुभाष बोस पार्क के खुले प्रांगण में किया गया। 20 से 22 दिसंबर 2025 तक हुई इस कांग्रेस में पूरे भारत से लगभग 150 प्रतिनिधि सम्मलित हुए जिनमें पंजाब के दो प्रतिनिधि गुरबख्श मोँगा और डॉ. वंदना सुखीजा शामिल थे। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराइ विजयन ने कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए इस कांग्रेस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य सांझा किया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विभिन्नता भारत की एकता दर्शाती है कि यहां विभिन्न धर्मोँ, जातियों और विश्वासों को मानने वाले लोग रहते हैं। हमें इस विभिन्नता का स्वागत करना चाहिए और इसका आनंद मनाना चाहिए। इसको खत्म करना देश की आत्मा को खत्म करने जैसा है। उन्होंने कहा, “आज हमारी जिम्मेदारी स्पष्ट है। हमें धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा बौद्धिक ईमानदारी और नैतिक हौसले के साथ करनी होगी। यह केवल संस्कृति की लड़ाई नहीं है, अपितु भारत के संकल्प – विविधता, समानता और संवैधानिक नैतिकता – की लड़ाई है”।
इस विचार की लड़ी को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न समांतर सेशनों में देश के नामी वक्ताओं ने अपने विचार दर्शकों के सामने रखे। पहले दिन के पहले सेशन में “थिएटर, प्रतिरोध और सामाजिक बदलाव” (Theatre, Resistance and Transformation) विषय पर सुधन्वा देशपांडे ने मंच संचालक की भूमिका निभाते हुए प्रलयन, मालयश्री हाशमी, तनवीर अख्तर और राकेश के साथ पैनल चर्चा की। इसमें समाज में थिएटर की भूमिका पर गहन चर्चा करते हुए विद्वानों ने यह मत जाहिर किया कि नाटक, बेशक वह मंच पर हो या नुक्कड़ नाटक, लोगों को जगाने का काम करता है। इससे अगले सेशन में सरस्वती नागाराजन ने पत्रकार एन. राम तथा आर. राजगोपाल के साथ मीडिया की भूमिका के बारे में बातचीत की। जिसमें मीडिया की बदलती भूमिका को लेकर चर्चा की गई और पत्रकारों की निरपेक्षता पर भी प्रश्न उठाए गए। सोशल मीडिया के युग में प्रिंट मीडिया के महत्व को बरकरार रखने के लिए पत्रकारों की तरफ से सही खबर भेजने पर भी जोर दिया गया।
21 दिसंबर 2025, कांग्रेस के दूसरे दिन भी समांतर सेशनों में विभिन्न पहलुओं को छूने की कोशिश की गई जिसमें एक बार फिर मीडिया को लेकर चर्चा सुनने को मिली। “मीडिया, राज्य और समाज”(Media, State and Society);“मीडिया के सभ्याचारक सिद्धांत”(Cultural Ethos of Media) जैसे विषयों को लेकर मीडिया के हर पक्ष को टटोला गया। “आज के समय में लेखक की भूमिका”(The Role of the Writer Today) के विषय पर हुई चर्चा में वीनूथा मालिया द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए गीता हरिहरन तथा नलिन रंजन जैसे नामी लेखकों ने कहा कि आज के समय में लेखक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। लेखक ही समाज को जागृत कर सकता है बेशक वह पत्रकार हो या किसी अन्य तरह के लेखन का काम करने वाला हो। इसके साथ ही उन्होंने प्रकाशन उद्योग पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि आज के समय में पुस्तक प्रकाशित करना बहुत ही कठिन हो गया है। यदि आपके पास किसी ख़िताब या इनाम का टैग है, विशेष कर पश्चिमी जगत का, तो प्रकाशन बहुत ही सरल हो जाता है।
कांग्रेस का तीसरा दिन, 22 दिसंबर 2025 भी बहुत ही लाभदायक रहा। “शिक्षा के क्षेत्र में समकालीन संकट”(Contemporary Crisis in Education Sector); “हमारा भारत, उनका भारत”(Our India, Their India);“समकालीन समय में मिथ और विज्ञान”(Myth and Science in Contemporary Times) विषयों पर मीराबाई, प्रसन्ना, चंद्रादासन, गौहर राजा, डॉ के.पी. अरविंदम तथा सी.एस. मीनाक्षी ने अपने विचार सांझे किए।
इसके अतिरिक्त थर्ड जेंडर (Third gender) की भी बड़ी गिनती में भागीदारी देखने को मिली। उनका समाज को योगदान और समाज द्वारा उनको दिया जाने वाला मान सम्मान भी इस कांग्रेस में उजागर किया गया। थर्ड जेंडर पर एक विशेष सेशन का आयोजन किया गया जिसमें ट्रांसपरसंस(transpersons) द्वारा भरतनाट्यम तथा अन्य कलाओं की प्रस्तुति की गई जो की देखने योग्य थी। अभ्युदम कला अकादमी (तेलंगाना), जन नाट्य मंच (दिल्ली), जतन नाटक केंद्र (हरियाणा), रत्ना पाठक शाह (मुंबई) तथा केरल के कई कलाकारों ने अपनी कला से दर्शकों का मन मोह लिया। अभ्युदम कला अकादमी की प्रस्तुति “मैं अंबेडकर हूँ” ने दर्शकों को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि क्या हम अंबेडकर के उसूलों पर खरे उतर पाए हैं या नहीं। जन नाट्य मंच का खेला गया नाटक समाज की स्त्री प्रति घटिया सोच को उजागर करने में कामयाब हुआ लगता था। इसके साथ ही फिलिस्तीन पर प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसमें वहां के लोगों के दर्द को चित्रों के माध्यम से बयान किया गया।
कांग्रेस के समापन समारोह दौरान मलयालम फिल्मी अभिनेता मैमुती ने विशेष मेहमान की हैसियत से शिरकत की जो कि लगभग आधी सदी से सिनेमा की सेवा कर रहे हैं। इस समय इतिहासकार रोमिला थापर का भेजा संदेश भी पढ़ा गया जिसमें उन्होंने इस प्रकार के प्रोग्राम आयोजित करने के लिए बधाई दी। फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की कविता “हम देखेंगे” का कृष्णा ने पांच भाषाओं – उर्दू, मलयालम, तेलुगू, कन्नड़ तथा तमिल में पाठ किया। इस मौके पूरे भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों, शहरो, जिलों तथा गांवों में इस प्रकार की कांग्रेस का आयोजन करने की अपील की गई। तथा अगली कांग्रेस कर्नाटक के धरवाड़ जिले में आयोजित करने का निर्णय लिया गया जो कि गंगूबाई हंगल तथा मल्लिकार्जुन मंसूर, नाटककार गिरीश कर्नाड, कवि डी.आर बिंद्रे, तथा चित्रकार के.के. हैबर का शहर है। इस कांग्रेस के अंत में घोषणा पत्र पढ़ा गया और धर्मनिरपेक्षता, शांति, आजादी तथा सम्मान के सिद्धांत पर जोर देते हुए कांग्रेस को संपूर्ण माना गया।
प्रस्तुति

डॉ. वंदना सुखीजा
गुरबख्श मोंगा

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