मंजुल भारद्वाज की कविता – जिंदगी का होना

कविता

ज़िंदगी का होना

मंजुल भारद्वाज

 

तसव्वुर में तेरा उभरना

सांसों का महकना

मन का बहकना

पुलकित पलकों में

आँखों का चमकना

ज़िंदगी का होना है !

 

मायने,कायदे,अर्थ

सितारों से जगमगाते हैं

राहें फूलों सी महक उठती हैं

कड़ी धूप चांदनी बन जाती है

माथे से टपकता पसीना

सुकूं देता है !

 

विकराल चुनौतियाँ

बीहड़

पथरीले पथ

पावों के छाले

तेरा मखमली स्पर्श

सारे ख्वाबों को

मुक़म्मल कर जाता है !

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