एलपीजी संकट : भारी थैले लिए प्रवासी श्रमिक भारी मन से घर लौट रहे

एलपीजी संकट : भारी थैले लिए प्रवासी श्रमिक भारी मन से घर लौट रहे

नयी दिल्ली। एलपीजी संकट के चलते प्रवासी मजदूरों का शहर से पलायन बढ़ गया है। कुछ लोग पारिवारिक कारणों का हवाला देकर जा रहे हैं, जबकि कई ने मजबूरी स्वीकार करते हुए भारी सामान और बोझिल मन के साथ अपने गांवों की राह पकड़ ली है।

दिल्ली-एनसीआर के रेलवे स्टेशन इन दिनों असामान्य रूप से व्यस्त नजर आ रहे हैं, जहां सैकड़ों प्रवासी मजदूर अपने सामान कंधों और सिर पर लादकर लौटते दिख रहे हैं।

एलपीजी सिलेंडरों की कमी, दोबारा भरने में देरी और कालाबाजारी के कारण बढ़ती कीमतों को इस पलायन की मुख्य वजह बताया जा रहा है।

राधे श्याम (38) के चेहरे पर निराशा साफ झलक रही थी जो दिन में दिहाड़ी मजदूरी और रात में सुरक्षा गार्ड का काम करते थे। एलपीजी सिलेंडर पाने के कई असफल प्रयासों के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के बिठूर स्थित अपने गांव लौटने का फैसला किया।

आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर टिकट खरीदने के लिए कतार में खड़े राधे श्याम अपने चार सदस्यीय परिवार को लेकर चिंतित थे।

उन्होंने कहा, “कई काम करने के बाद भी मेरी कमाई 20,000 रुपये से अधिक नहीं होती। मेरी पत्नी आस-पास के घरों में काम करती है और पांच हजार रुपये कमाती है। मेरे दो बड़े बच्चे हैं जिनकी देखभाल करनी है। खर्च चलाना पहले से ही मुश्किल है। मैं एलपीजी सिलेंडर के लिए 3,000 रुपये कैसे खर्च कर सकता हूँ?”

श्याम ने भरे गले से कहा, “मैंने सोचा कि बेहतर है कि मैं शहर छोड़ दूं और किराए के पैसे बचाऊं। गांव में हम चूल्हे पर खाना बना सकते हैं। उम्मीद है कि एक महीने में हालात सुधर जाएंगे, तब वापस आ जाऊंगा।”

सुमन वर्मा की कहानी भी कुछ अलग नहीं थी लेकिन झिझक या शर्म के मारे, 29 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर ने कहा कि वह एक शादी में जा रहा है।

कक्षा पांचवीं में पढ़ने वाले उसके बेटे अंशु वर्मा ने अपने पिता के नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर टिकट खरीदने के लिए जाते ही सच्चाई बता दी।

अंशु ने अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्वता से कहा, “हम सब असली वजह जानते हैं। लॉकडाउन होने वाला है। मेरे पिता ने कहा कि सारी दुकानें बंद हो जाएंगी और हम बाद में वापस नहीं जा पाएंगे। हमारे पास गैस खत्म हो चुकी थी और मेरी मां एक अस्थायी चूल्हे पर खाना बना रही थी।”

रियायती 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर, जिसकी कीमत दिल्ली में घरेलू कनेक्शन के लिए वर्तमान में 913 रुपये है, पहले प्रवासी मजदूरों को बिना उचित कागजात और घरेलू कनेक्शन के 100-200 रुपये अधिक कीमत पर मिल जाते थे। लेकिन अब, वही सिलेंडर कालाबाजारी में 3,000 रुपये या उससे अधिक में बिक रहे हैं।

पांच किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडरों की भी कमी हो गई है, जो आमतौर पर औपचारिक कनेक्शन की आवश्यकता के बिना वितरकों के माध्यम से उपलब्ध होते हैं।

इन रेलवे स्टेशनों पर कुली भी प्रवासी श्रमिकों के पलायन की पुष्टि करते हैं। पिछले कई वर्षों से कुली का काम करने वाले मध्य प्रदेश निवासी जगदीश ने कहा, ‘‘नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हमेशा भीड़भाड़ रहती है, लेकिन हाल में भीड़ में भारी वृद्धि हुई है। मैं अपने परिवारों के साथ बाहर जा रहे प्रवासी मजदूरों से बात करता हूं और वे कहते हैं कि लॉकडाउन होने वाला है।’’

जगदीश ने कहा, ‘‘उनमें से ज्यादातर एलपीजी संकट के कारण जा रहे हैं। उनकी कमाई कम है, लेकिन खर्चे ज्यादा हैं। सच कहूं तो, अगर हालात नहीं सुधरे, तो मैं भी जाने की सोच रहा हूं।”

विष्णु कुमार (25) भी अपने घर लौट रहे थे। नोएडा के एक रेस्तरां मालिक द्वारा उन्हें नयी नौकरी ढूंढने के लिए कहे जाने के बाद, उनके लिए यह स्वाभाविक विकल्प था।

कुमार दो साल पहले रसोइया के रूप में काम करने दिल्ली आए थे। कुमार ने कहा, “मेरे मालिक को खुद यकीन नहीं था कि वो कारोबार चला पाएंगे या नहीं। मुझे नौकरी पर कैसे रख सकते थे? हम चार लोग उनके यहां काम करते थे और अब सिर्फ मालिक और एक आदमी बचा है।’

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