जयपाल की कविता जिंदगी का सूरज व अन्य तीन कविताएं
1
जिंदगी का सूरज
खिलखिलाते खेलते बच्चे
हवा, धूप, छांव , रिमझिम-फुहार , बारिश के साथ
दाना दाना होते पिता
गेहूं,धान ,मकई ज्वार, बाजरा, सरसों के साथ
पानी पानी होती मांएं
कुएं ,बावड़ी , तालाब , नदी-नहरों के साथ
सपने सजातीं लड़कियां
किताबों,कापियों,चिड़ियों,घोंसलों, पेड़ों और हवाओं के साथ
धरती पर उग रहा है ज़िंदगी का सूरज !
2
पाप का घड़ा
पाप का घड़ा भी बड़ा अजीब है
न कभी भरता है
न कभी फूटता है
सदियों से यूं ही रखा है
3
छप्पर
भगवान जब भी देता है
छप्पर फाड़कर देता है
जिनके छप्पर ही नहीं
उनकी चमड़ी भी उधेड़ लेता है
4
ईश्वर सब देखता है
भूकंप हो या तूफान
बीमारी या महामारी
युद्ध या दंगे
शोषण या गरीबी
ईश्वर का हृदय बड़ा विशाल है
वह कभी दिल छोटा नहीं करता
बस देखता ही रहता है टकटकी लगाए
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