बात बेबात
तेल हो तो बगैर पासपोर्ट ले जाएगा अमेरिका
विजय शंकर पांडेय
ट्रम्प की सेना रूसी तेल टैंकरों पर हमला कर सकती है! पुतिन ने सुरक्षा के लिए अटलांटिक महासागर में पनडुब्बी भेजी है।
पासपोर्ट और वीज़ा हो तो इंसान खुद अमेरिका जा सकता है। लाइन में लगिए, फॉर्म भरिए, इंटरव्यू दीजिए, उंगलियों के निशान दीजिए और फिर इंतज़ार कीजिए—कभी हां, कभी “अगली तारीख”।
लेकिन अगर आपके पास तेल है, तो कहानी उलटी हो जाती है। तब अमेरिका को पासपोर्ट की ज़रूरत नहीं पड़ती, वीज़ा की तो बिल्कुल नहीं। वह खुद आकर कहता है—“पैकिंग मत करो, हम ही ट्रांसपोर्ट हैं।”
तेल ऐसा मेहमान है, जिसे लेने मेज़बान घर नहीं बुलाता, खुद दौड़कर पहुंचता है। लोकतंत्र, मानवाधिकार और सुरक्षा—सब उसके सूटकेस में रेडी रहते हैं
तेल वाले देश की ज़मीन पर अचानक फ्रीडम उगने लगती है, मिसाइलें फूल बन जाती हैं और ड्रोन शांति दूत कहलाते हैं।
आम आदमी अगर अमेरिका जाना चाहे तो साबित करे कि वह लौट आएगा।
लेकिन तेल अगर कहीं हो, तो अमेरिका साबित करता है कि वह वहीं रुक जाएगा।
इंसान को वीज़ा चाहिए, तेल को इरादा ही काफी।
काट कर ग़ैरों की टाँगें , ख़ुद लगा लेते हैं लोग।
इस शहर में इस तरह भी क़द बढ़ा लेते हैं लोग।
#अज्ञात
