राजपाल सिंह राजा की ग़ज़ल

राजपाल सिंह राजा की ग़ज़ल

 

मशवरा हमारा  कुछ  काम न आया।

उसने जो चाहा  वही करके दिखाया।।

 

सदियों  से   उसका  कहर  जारी  रहा,

हमारी हस्ती को उसने हरबार मिटाया।

 

उसका तो दीन  ईमान  कुछ  भी  नहीं ,

अपनी तारीफों  में  वो ख़ुद ही नहाया।

 

बदलेगा वो  सोचा  ज़ुल्म  रुक जायेंगे,

हम रहे आस में पर उसे ना रहम आया।

 

नेकी हमारी को  किया  बदनाम उसने,

झूठी शौहरत को ही उसने खूब उठाया।

 

करके घोटाले वो  हुक्मरान बनता रहा,

इस जम्हूरियत का क्या मज़ाक उङाया।

 

दरिन्दे उसके हैं और हाकिम भी उसके,

हर फैसला उसने अपने हक़ में कराया।

 

मुल्क-ए-वाशिन्दों से उसे कुछ लेना नहीं,

कंगाल हो देश भले  ज़र खूब कमाया।

 

वह सोचता है ये सत्ता उसकी जागीर है,

आवाम ने ऐसों का नामोनिशां मिटाया।

ग़ज़ल राजपाल सिंह राजा हुक्मरान फैसला

 

मशवरा हमारा  कुछ  काम न आया।

उसने जो चाहा  वही करके दिखाया।।

 

सदियों  से   उसका  कहर  जारी  रहा,

हमारी हस्ती को उसने हरबार मिटाया।

 

उसका तो दीन  ईमान  कुछ  भी  नहीं ,

अपनी तारीफों  में  वो ख़ुद ही नहाया।

 

बदलेगा वो  सोचा  ज़ुल्म  रुक जायेंगे,

हम रहे आस में पर उसे ना रहम आया।

 

नेकी हमारी को  किया  बदनाम उसने,

झूठी शौहरत को ही उसने खूब उठाया।

 

करके घोटाले वो  हुक्मरान बनता रहा,

इस जम्हूरियत का क्या मज़ाक उङाया।

 

दरिन्दे उसके हैं और हाकिम भी उसके,

हर फैसला उसने अपने हक़ में कराया।

 

मुल्क-ए-वाशिन्दों से उसे कुछ लेना नहीं,

कंगाल हो देश भले  ज़र खूब कमाया।

 

वह सोचता है ये सत्ता उसकी जागीर है,

आवाम ने ऐसों का नामोनिशां मिटाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *