GEN-G: बदलती शहरी जीवनशैली
डॉ रीटा अरोड़ा
पिछले कुछ दशकों तक समाज और अर्थव्यवस्था का केंद्र पारंपरिक न्यूक्लियर फैमिली हुआ करती थी—माता-पिता और दो या उससे अधिक बच्चे। लेकिन आज के शहरी समाज में जीवनशैली, करियर प्राथमिकताओं और व्यक्तिगत चुनावों के कारण परिवार की संरचना तेजी से बदल रही है। आधुनिक शहरों में अब ऐसे परिवारों की संख्या बढ़ रही है जो पारंपरिक ढांचे से अलग तरीके से जीवन जीना पसंद करते हैं।
इसी बदलाव को समझने के लिए एक नया विचार सामने आया है—GEN-G (Generation-G)। यह किसी उम्र या पीढ़ी से नहीं, बल्कि घर की संरचना और जीवनशैली के चुनावों से परिभाषित होता है। शहरी समाज में इस नई प्रवृत्ति के तीन प्रमुख रूप दिखाई देते हैं—
DINC (Double Income, No Kids), DINCWAD (Double Income, No Kids With A Dog) और
DISC (Double Income, Single Child)।
DINC परिवारों में पति-पत्नी दोनों काम करते हैं लेकिन उनके बच्चे नहीं होते। ऐसे परिवारों में प्रति व्यक्ति आय अपेक्षाकृत अधिक होती है, इसलिए उनकी खर्च करने की प्राथमिकताएँ भी अलग होती हैं। वे प्रीमियम लाइफस्टाइल, यात्रा, फिटनेस, तकनीक और अच्छे भोजन पर अधिक खर्च करते हैं। ऐसे परिवारों के लिए सप्ताहांत यात्राएँ, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और नए अनुभवों की तलाश सामान्य बात बनती जा रही है। आवास के मामले में भी ये लोग अक्सर शहर के उन इलाकों को चुनते हैं जहाँ काम और मनोरंजन की सुविधाएँ पास में हों।
दूसरा मॉडल है DINCWAD, जिसमें दंपति के बच्चे नहीं होते लेकिन उनके साथ एक पालतू कुत्ता होता है। इन परिवारों में पालतू जानवर को परिवार के सदस्य की तरह देखा जाता है। इसी कारण हाल के वर्षों में पेट इकॉनमी तेजी से बढ़ी है। प्रीमियम पेट फूड, पशु चिकित्सकीय सेवाएँ, पेट इंश्योरेंस, ग्रूमिंग सेवाएँ और पेट-फ्रेंडली होटल जैसे क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। यात्रा की योजना बनाते समय भी ऐसे परिवार अक्सर उन स्थानों को चुनते हैं जहाँ पालतू जानवरों के लिए सुविधाएँ उपलब्ध हों।
तीसरा मॉडल है DISC, यानी डबल इनकम और एक बच्चा। ऐसे परिवारों में अक्सर “क्वालिटी ओवर क्वांटिटी” का दृष्टिकोण दिखाई देता है। माता-पिता अपने बच्चे की शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर अधिक निवेश करते हैं। अच्छे स्कूल, सुरक्षित मोहल्ले और पार्क जैसी सुविधाएँ इनके लिए आवास चुनने का प्रमुख आधार होती हैं।
इन बदलती पारिवारिक संरचनाओं का प्रभाव केवल घरों तक सीमित नहीं है। लक्ज़री रिटेल, यात्रा, वेलनेस और फिनटेक जैसे क्षेत्रों को DINC परिवारों से बढ़ावा मिल रहा है। वहीं पेट केयर उद्योग DINCWAD परिवारों की वजह से तेजी से विस्तार कर रहा है। दूसरी ओर शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास क्षेत्र DISC परिवारों की मांग से मजबूत बने हुए हैं।
कुल मिलाकर शहरी समाज में छोटे परिवार, देर से विवाह और जीवनशैली आधारित निर्णय तेजी से सामान्य होते जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में GEN-G परिवार शहरी अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण उपभोक्ता वर्ग बन सकते हैं। अब सवाल केवल यह नहीं है कि घर में कितने लोग रहते हैं, बल्कि यह भी है कि वे किस तरह का जीवन जीना चाहते हैं। जो व्यवसाय और नीतिनिर्माता इस बदलाव को समझेंगे, वही भविष्य की शहरी अर्थव्यवस्था को दिशा दे पाएंगे।
