डॉ रणबीर सिंह दहिया की रागनी – बीन अर सांप

डॉ रणबीर सिंह दहिया की रागनी – बीन अर सांप

 

बीन अर सांप

*बीन बजावन आल्यां नैआज गाम मैं बीन बजाई।।*

*कई तो बहोत पुरानी घणी बढ़िया धुन सुनाई।।*

1

कई महिला टहल गई बीन के लहरे पै नाची

एक दूजी मैं नाचण की या होड़ कसूती माची

*बहोत दिनां पाछै आज महिलावां नै उधम मचाई।।*

कई तो बहोत पुरानी घणी बढ़िया धुन सुनाई।।

2

सांप कै कान कोन्या होन्ते फेर बी बीन सुनण आ ज्यावै

धरती आली पैरां की खटपट चमड़ी द्वारा सुनाई देज्यावै

*मदारी की बीन देख देख कै सापां नै अपनी नाड़ नचाई।।*

कई तो बहोत पुरानी घणी बढ़िया धुन सुनाई।।

3

और सांप कई करतब करते मोटा मेंढक भी खा ज्याते

मूंह छोटा मेंढक मोटा जबड़ा घणा खुला इसका बताते

*चमड़ी भी रबड़ की तरियां जब चाहवै जब बधती बताई।।*

कई तो बहोत पुरानी घणी बढ़िया धुन सुनाई।।

4

सांप केंचुली तारता देख्या ना इसपै दिमाग लगाया देखो

शरीर की सफाई करने खातर

सफाई सिस्टम बनाया देखो

आज बीन और सांप के बारे रणबीर नै कलम घिसाई।।

कई तो बहोत पुरानी घणी बढ़िया धुन सुनाई।।

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