हरियाणा : जूझते जुझारू लोग – 97
नारायणगढ़ क्षेत्र में नामचीन रहे चमनलाल वालिया
सत्यपाल सिवाच
चमनलाल वालिया लम्बे समय से आन्दोलनों में सक्रिय रहे। जब 1986-87 में सर्वकर्मचारी संघ बना तो नारायणगढ़ में की गई कार्यकर्ताओं की पहली बैठक में वे शामिल हुए थे। उन दिनों संदीप सिंह राणा की वहाँ पोस्टिंग थी। उसी बैठक में सतीश सेठी, चमनलाल, बलदेव सिंह, रामनाथ आदि अनेक संघर्ष के साथियों से मुलाकात हुई। उनका जन्म नारायणगढ़ में 20.06.1949 को श्रीमती चम्पादेवी व श्री बाबूराम के घर हुआ। वे पाँच भाई-बहन हैं। उन्होंने सन् 1967 में दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की। वे 7 जनवरी 1971 को पब्लिक हेल्थ विभाग में नियुक्त हो गए और 30.06.2007 को चार्जमैन पद से सेवानिवृत्त हो गए।
उन्होंने मैकेनिकल वर्करज यूनियन के मंच से काम शुरू किया। वैसे तो वे सन् 1973-74 से ही संगठन में रुचि लेने लगे थे। वाद में अपनी यूनियन में ब्रांच प्रधान व सचिव पदों पर रहे। वे संगठन के राज्य में प्रचार सचिव भी चुने गए। सर्वकर्मचारी संघ के गठन के बाद वे ब्लॉक नारायणगढ़ के प्रधान बने। उन्होंने अपनी यूनियन और सर्वकर्मचारी संघ के आह्वान पर सभी धरने, प्रदर्शन, रैली और हड़ताल आदि में शिरकत की। वे बहुत बार लाठीचार्ज और पुलिस दमन की कार्यवाहियों का शिकार हुए। सन् 1993 में उन्हें 27 सितम्बर को गिरफ्तार किया गया और 28 सितम्बर को छोड़ा।
चमनलाल वालिया नारायणगढ़ ब्लॉक और अम्बाला जिले के टिकाऊ और भरोसेमंद कर्मचारी नेता रहे हैं। अब रिटायर्ड कर्मचारियों और जनवादी संगठनों में सहयोग करते रहते हैं। उनका मानना है कि मौजूदा स्थिति में चुनौतियां ज्यादा हैं तो हमें अधिक मुस्तैदी और मजबूती से लड़ाई लेने की जरूरत है। उन्होंने महसूस किया कि संघर्ष से आदमी को हौसला मिलता है। उन्हें यूनियन का काम करते हुए परिवार से सहयोग मिला है। यद्यपि विभागीय स्तर पर एक्सईएन और एस ई आदि से संपर्क रहा, लेकिन किसी कोई निजी काम नहीं लिया। कर्मचारियों के सामूहिक हितों के लिए लड़ते हैं तो निजी काम लेने से प्रभाव घट जाता है। उन्हें लगता है कि खराब हालात में भी संघर्ष ही रास्ता है।
फिलहाल परिवार नारायणगढ़ में ही रहता है। उन्होंने दिनांक 22 फरवरी 1976 को सुश्री मधु वालिया से विवाह किया। उनके दो बच्चे हैं। निर्वाह के लिए परिवार अपना काम करता है। (सौजन्य: ओमसिंह अशफ़ाक)

लेखक: सत्यपाल सिवाच
