Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांत

कभी फुर्सत मिले तो सोचना !

कभी फुर्सत मिले तो सोचना ! -मंजुल भारद्वाज   तुम स्वयं एक सम्पति हो सम्पदा हो इस पितृसत्तात्मक व्यवस्था में…

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मंजुल भारद्वाज की कविता – हे पुरुष !

हे पुरुष !  मंजुल भारद्वाज हे मूंछों पर ताव देने से पहले सोचो तुम कौन हो? तुम्हारे पास क्या है?…

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सरला माहेश्वरी की कविता – मैं सरकार !

अगस्त क्रांति पर विशेष देश के जनतंत्र का अपहरण करने वाली सरकार को सत्ता में रहने का कोई हक़ नहीं…

Blogसाहित्य/पुस्तक समीक्षाहरियाणा

जयपाल की कविता ‘एक बच्ची जिसे खूंखार डाकू कहा गया’ का एक दार्शनिक, भाषिक और वैचारिक विवेचन

प्रतिबिम्ब मीडिया में 7 अगस्त 2025 को वरिष्ठ कवि चिंतक जयपाल की ‘एक बच्ची जिसे खूंखार डाकू कहा गया’ शीर्षक…

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रेमण्ड नैट टर्नर की कविता – इकबालिया बयान

कविता इकबालिया बयान रेमण्ड नैट टर्नर “जब खरीद और बिक्री कानून द्वारा नियंत्रित होने लगती है, तो सबसे पहले खरीदे…

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जयपाल की कविता – एक बच्ची जिसे खूंखार डाकू कहा गया

कविता एक बच्ची जिसे खूंखार डाकू कहा गया जयपाल एक थी फूलन लोकतंत्र का बियाबान-जंगल संविधान की बीहड़-घाटियां सामंतवाद के…

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हरभगवान चावला की कहानी- तीस हज़ार की पोशाक 

 कहानी तीस हज़ार की पोशाक – हरभगवान चावला शादी का निमंत्रण-पत्र तो आया ही था, शादी से दो दिन पहले…

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एक त्रिकोणीय प्रेमकथा

एक त्रिकोणीय प्रेमकथा विजय शंकर पांडेय   खबरें पहले आती थीं, अब बिकती हैं। जो ज़रूरी है, वो साइलेंट है।…