Blogकविता /कहानी/ नाटक/ संस्मरण / यात्रा वृतांत

मंजुल भारद्वाज की कविता- कौन सी लकीर खींची है

कौन सी लकीर खींची है मंजुल भारद्वाज   ना जाने हुक्मरानों ने धर्म अधर्म की कौन सी लकीर खींची है…

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ओमप्रकाश तिवारी की कविता- बच्चे को चांद नहीं चाहिए

बच्चे को चांद नहीं चाहिए ओमप्रकाश तिवारी   पैदा होते ही बच्चा नहीं कहता है कि उसे चांद चाहिए सांस…

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मुनेश त्यागी की कविता- कोई माने या ना माने मैं पूरा हिंदुस्तान हूं 

लेखकीय वक्तव्यः हजारों साल से हमारे देश में हिंदू बसे आ रहे हैं। हमारे देश पर आर्य, हूण, शक, कुशाण,…