Blogआलेख विचार

साम्राज्यवाद दुनिया की सबसे विनाशकारी व्यवस्था

साम्राज्यवाद दुनिया की सबसे विनाशकारी व्यवस्था     मुनेश त्यागी पूरे संसार में सामंतवाद, पूंजीवाद और साम्राज्यवाद देश दुनिया की…

Blogआलेख विचारसमय/समाज

डिजिटल युग में अनुभव की बदलती परिभाषा: बढ़ता हुआ पीढ़ीगत अंतर

  सामाजिक सरोकार डिजिटल युग में अनुभव की बदलती परिभाषा: बढ़ता हुआ पीढ़ीगत अंतर बदलती दुनिया के साथ खुद को…

Blogआलेख विचारसमय /समाजसाहित्य/पुस्तक समीक्षा

विषमता के बोध की तुलना में वंचना का बोध पैदा करना ज्यादा आसान क्यों है?

विषमता के बोध की तुलना में वंचना का बोध पैदा करना ज्यादा आसान क्यों है?   शंभुनाथ   आखिर लोगों…

Blogआलेख विचारनाटक रंगमंच थियेटर

रंग चिंतन में समाहित होता है उसका अर्थ संयोजन

रंग चिंतन में समाहित होता है उसका अर्थ संयोजन मंजुल भारद्वाज (रंगचिन्तक) भाग -१ भारत देश में भारत सरकार सबसे…

Blogआलेख विचारविरासत

समाजवाद ही है दुनिया का कल्याणकारी और सुरक्षित भविष्य

समाजवाद ही है दुनिया का कल्याणकारी और सुरक्षित भविष्य मुनेश त्यागी अभी पिछले दिनों हमारे एक पाठक ने हम से…

आलेख विचारआलोचना/ लेखराष्ट्रीयसभा / संगठन/ सोसायटी

गुमनाम किसान नायिकाएँ: एक समीक्षा

गुमनाम किसान नायिकाएं डॉ. रामजीलाल विश्व में लगभग 900 मिलियन महिलाएं कृषि में काम करती हैं. लेकिन, 90 से ज़्यादा…

Blogआलेख विचारधर्म-संस्कृतिसमय/समाज

क्या होता है जब अमीर शाकाहारी लोग हिंदू धर्म को आकार देते हैं?

क्या होता है जब अमीर शाकाहारी लोग हिंदू धर्म को आकार देते हैं?   देवदत्त पटनायक   आज किसी हिंदू…