ओमसिंह अशफ़ाक की कविता: लानत है!

युद्ध के विरुद्ध युद्ध-2

कवि का वक्तव्य

(अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा 2003 में इराक पर किए गए हमले के समय 23 अप्रैल को यह कविता लिखी गई थी। कविता में जॉर्ज डब्ल्यू बुश और टोनी ब्लेयर- इन दो तत्कालीन जंगखोरों के नाम की जगह अगर आज डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू का नाम लिख दिया जाए तो कविता के कथ्य में बिना परिवर्तन भी 2025-26में ईरान पर हुए संयुक्त-आक्रमण का ठीक वही ‘सिनेरियो’/दृश्य उभर कर आता है)

 

लानत है!

 

ओमसिंह अशफ़ाक

 

शिलालेख मैं लिख नहीं सकता

दबवा नहीं सकता धरती में ताम्र-पत्र

मैं चला नहीं सकता अब्राहम टैंक

उड़ा नहीं सकता विध्वंसक विमान

नहीं, मैं इनमें से कोई भी

काम नहीं करना चाहता-

होना मेरा सार्थक होता है कविता में-

कविता से करता हूं मैं जंगबाजों को परेशान

यही वो अस्त्र है

जो देता है उन्हें सबसे गहरे घाव..

 

सुनो, जॉर्ज डब्लू बुश!

सुनो, टोनी ब्लेयर!

तुम्हें चाहिए आखिर कुल कितनी जमीन

दफ़न होने के लिए?

बामुश्किल दो गज या थोड़ी-बहुत कम- ज्यादा

फिर भी तुले हो तुम कब्रिस्तान बनाने पर

सारी दुनिया को?

 

गिराते हो स्मार्ट-बम,

क्लस्टर-बम, यूरेनियम-बम

और खतरनाक जंगी मिसाइलें-

औरतों, बच्चों, अस्पतालों, मकानों,

होटलों, दफ्तरों, बाजारों यानी निहत्थे बाशिंदों पर?

ताकि सुन सके दुनिया

तुम्हारे हथियारों की धमक

और रहें सभी डरकर तुमसे..

यदि चाहें सुरक्षा अपनी

तो खरीदें हथियार तुम्हारे

ताकि चलती रहे भट्टी बारूद की

लीलती रहे मासूम जिंदगानियां

और खनकती रहे पैदावार डालरों की

दिन-रात तुम्हारे लिए?

 

खाने को चाहिए तुम्हें डॉलर तीनों वक्त

और पीने के लिए पेट्रोल..

मगर एक बात है मिस्टर बुश! मिस्टर ब्लेयर!

जो सिर्फ तुम्हें नहीं दिखती

बाकी सारी दुनिया जानती है

कि मासूम बच्चों, औरतों और अस्पतालों में

भर्ती ज़ख्मियों के जिस्मों से

पेट्रोल और डॉलर नहीं निकलते?-

वहां से निकलता है खून फिरंगियों!!

और खून जहां बहता है वहां

नफ़रत और आक्रोश का ज्वालामुखी धधकता है।

 

पाखंड तुम्हारा नंगा हो चुका है

कुतर्कों की बखिया उधड़ चुकी है

यकीन नहीं करता कोई भी आज तुम्हारे हल्फिया बयान पर।

नए हीरो मंच पर आ चुके हैं

और दुनिया ख़ैरमक़दम कर रही है

माइकल मूर, पीटर अर्नेट और नोम-चाम्स्की का।

 

बेशक ये तीनों अमेरिकन हैं

शायद ईसाई भी

और शिक्षित तो हैं ही।

माइकल मूर तुम्हारे निर्वाचन को फर्ज़ी बतलाते हैं

और तुम पर भेजते हैं लानत!

पत्रकार अर्नेट पीटर ने तो

तुम्हारा भंडा फोड़ दिया है

कहकर ये-

कि खुद अमेरिका ने किया था

सेरीन-गैस का हमला लॉओस पर?

और प्रोफेसर चाम्स्की सिद्ध करते हैं तुम्हें

सबसे बड़ा आतंकवादी?

 

खेल तुम्हारा बिगड़ चुका है

मिस्टर बुश!

लूट के साम्राज्य का अंत

अब शुरू हो चुका है..

जाहिर-सी बात है कि

इसका पटाक्षेप भी होगा ही।

हां, एक बात तय है कि

इतिहास भी लानत ही दर्ज करेगा तुम्हारे नाम

और इस शब्द के प्रस्तोता होंगे- माइकल मूर!

 

ये विडंबना ही है मिस्टर बुश!

कि एक निर्देशक को भी

जाना होगा इतिहास में

सृजक की बजाय तुम्हारे प्रताड़क के रूप में?

और हम सब अभिशप्त होंगे

चश्मदीद गवाही के, तुम्हारी करतूतों की।

 

लानत है तुम पर कि तुम

लाशों के ढेर पर खड़े होकर भी

मुस्कुरा सकते हो मिस्टर बुश!

जरा सोचो तो इस माहौल में

कोई कैसे रह सकता है खुश

सिवाय तुम्हारे मिस्टर बुश!

 

(23.4.2003)

 

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