मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता

मंजुल भारद्वाज की एक लघु कविता

व्यवस्था से हारी भीड़
जब गांव छोड़
शहर की ओर भागती है
तब उसका लक्ष्य क्रांति नहीं
सिर्फ़ पेट भरना होता है
जिस दिन व्यवस्था से पलायन
व्यवस्था निर्माण का संकल्प लेगा
भारत में सिर्फ़ ग्राम स्वराज होगा!

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