लक्ष्मी सहगल से बातचीत- कैसा होगा आजादी के बाद हिन्दुस्तान का नक्शा

किस्सा सुभाष चन्द्र बोस: वार्ता -4 (हरियाणवी रागनी)

लक्ष्मी सहगल से बातचीत- कैसा होगा आजादी के बाद हिन्दुस्तान का नक्शा

डॉ रणबीर सिंह दहिया

एक बार सुभाष बोस और लक्ष्मी सहगल के बीच बातचीत होती है कि आजादी के बाद हिन्दुस्तान का क्या नक्शा होगा ? 

कैसा हिंदुस्तान हम बनाना चाहते हैं तो सुभाष बोस कुछ देर सोचते हैं और अपने सपनों के भारत के बारे में बताते हैं | 

क्या बताया भला – 

 

लालच लूट खसोट बचै नहीं ईसा हिन्दुस्तान बसावांगे।

धर्म का जहर खेल रचै नहीं हम इसा इन्सान बणावांगे।।

1

नई तरां का इन्सान उभरै नई तरां के म्हारे समाज मैं

नई बात और बोल नये क है जां नये सुर और साज मैं

बीमारी टोही नहीं पावै विज्ञान नै लोक हित मैं लगावांगे।।

धर्म का जहर खेल रचै नहीं हम इसा इन्सान बणावांगे।।

2

दोगली शिक्षा का खात्मा हो ज्ञान पिटारा यो इन्सान होज्या

नाड़ काट मुकाबला रहै ना एक दूजे का सम्मान होज्या

भ्रष्टाचार नहीं टोहया पावै इका नामो निशान मिटावांगे।।

धर्म का जहर खेल रचै नहीं हम इसा इन्सान बणावांगे।।

3

मुनाफा मंजिल नहीं रहै ना चारों तरफ घमासान मचै

लाठी की भैंस नहीं रहै ना हथियारां का फेर सम्मान बचै

प्रदूषण बढ़ता जा धरती शमशान होण तै बचावांगे।।

धर्म का जहर खेल रचै नहीं हम इसा इन्सान बणावांगे।।

4

महिला नै इन्सान समझां रीत खत्म हो दोयम दरजे की

नौजवानां नै मिलै सही रास्ता ना मार बचै इस करजे की

जातपात खत्म हो सारे कै इन्सान बणां बिगुल बजावांगे।।

धर्म का जहर खेल रचै नहीं हम इसा इन्सान बणावांगे।।

कवि – डॉ रणबीर सिंह दहिया

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