जनकवि शील का गीत- देश हमारा धरती अपनी

आज क्रांतिकारी कवि और गीतकार शील की पुण्यतिथि है। उन्होंने अपनी लेखनी से मजलूम और गरीब तबके को स्वर दिया, आवाज उठाई। प्रतिबिम्ब मीडिया परिवार की तरफ से श्रद्धांजलि स्वरूप यह गीत प्रकाशित किया जा रहा है।

गीत

देश हमारा धरती अपनी

शील

देश हमारा धरती अपनी, हम धरती के लाल।
नया संसार बसाएँगे, नया इन्सान बनाएँगे।।

सौ-सौ स्वर्ग उतर आएँगे
सूरज सोना बरसाएँगे
दूध-पूत के लिए पहनकर
जीवन की जयमाल
रोज त्यौहार मनाएँगे
नया संसार बसाएँगे, नया इन्सान बनाएँगे ।।

देश हमारा धरती अपनी,,,,,,।।

सुख सपनों के सुर गूँजेंगे
मानव की मेहनत पूजेंगे
नई चेतना, नए विचारों की
हम लिए मशाल
समय को राह दिखाएँगे
नया संसार बसाएँगे, नया इन्सान बनाएँगे ।।

देश हमारा धरती अपनी,,,,।।

एक करेंगे मनुष्यता को
सींचेंगे ममता-समता को
नई पौध के लिए, बदल देंगे तारों की चाल
नया भूगोल बनाएँगे,
नया संसार बसाएँगे, नया इन्सान बनाएँगे।