हरियाणाः जूझते जुझारू लोग – 123
अविनाश काम्बोजः लम्बी पारी के योद्धा
सत्यपाल सिवाच
सिरसा के शान्ति नगर निवासी अविनाश काम्बोज कर्मचारी आन्दोलन में विशेष पहचान अर्जित कर चुके हैं। उनका टिकाऊपन और भरोसेमंद व्यवहार अन्य साथियों को भी जुड़ने के लिए आकर्षित करता है। वे व्यक्तियों से नहीं, संगठन के सिद्धांत और विचारों के साथ जुड़े हैं। इसलिए विकट परिस्थितियों में विचलित न होकर संगठन व आन्दोलन के साथ मजबूती से डटे रहे हैं।
अविनाश का जन्म 10 जुलाई 1964 को श्रीमती सुहानीबाई और श्री महंगा राम के घर सिरसा जिले के बप्पा गांव में हुआ। उन्होंने दसवीं कक्षा के बाद आईटीआई से दो वर्षीय डिप्लोमा किया। वे 11 नवंबर 1986 को हरियाणा राज्य बिजली बोर्ड में एएलएम भर्ती हुए और 31 जुलाई 2022 को जूनियर इंजीनियर पद से सेवानिवृत्त हुए। वे अपने सेवाकाल के शुरुआती दिनों में ही यूनियन से जुड़ गए थे। वे अपने संगठन के सब-यूनिट प्रधान, यूनिट प्रधान और राज्य में उपप्रधान रहे। इसके साथ ही उन्होंने सर्वकर्मचारी संघ में भी जिला स्तर पर नेतृत्व किया। वे सिरसा में जनवादी, सामाजिक, साहित्यिक आन्दोलनों के साथ बहुत करीब से जुड़े हुए हैं।
यूनियन से जुड़ने के अनुभवों के बारे में चर्चा करते हुए अविनाश बताते हैं कि उनके परिवार में शहीद-ए-आजम भगतसिंह के विचारों का प्रभाव रहा है। इसके अलावा वे स्वभाव से अधिकारियों द्वारा शोषण के विरोधी और न्याय के समर्थक रहे हैं। साथ ही बिजली कर्मचारियों के बीच यूनियन के प्रति एक सकारात्मक वातावरण भी मौजूद था। वे नौकरी में आने के बाद हुए सभी आन्दोलनों और अभियानों का हिस्सा रहे। सन् 1993 उन पर एस्मा लगाया गया था। मुकदमा दर्ज होने के कारण इसका निपटारा होने में साल भर का समय लग गया। एक साधारण कार्यकर्ता से शुरू करके वे 1993 तक स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों में शामिल हो गए थे। उन्होंने 1995, 1996-97, 1998, 2003 और 2015 में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई। सन् 2018 की रोडवेज हड़ताल में भी वे अगुवा भूमिका में रहे।
बिजली की यूनियन हरियाणा कर्मचारी आन्दोलन का अहम् हिस्सा रही है। लगभग पिछले चालीस साल महासचिव या अध्यक्ष में से एक जिम्मेदारी बिजली कर्मचारियों को दी गई है। उसका प्रभाव सभी जगह पड़ा। इसीलिए अविनाश ने सिरसा जिले में बाद के वर्षों में मुख्य कार्यकर्ता की तरह काम किया। उन्हें बिजली यूनियन के सर्वकर्मचारी संघ का हिस्सा होने पर गर्व है।
परिवार की ओर से भी उन्हें संगठन का काम करते हुए सहज समर्थन मिलता रहा है। उनका कहना है कि पारदर्शी ढंग से काम करने और सार्वजनिक प्रतिष्ठा बढ़ने के चलते स्वजनों का साथ खुलकर मिला है। उन्होंने बताया कि उनके किसी राजनीतिक नेता अथवा बड़े अधिकारियों से सम्बन्ध नहीं रहे। कभी किसी कोई निजी काम नहीं लिया। वे अगली पीढ़ी के कार्यकर्ताओं से ईमानदारी और परिश्रम के साथ संगठन और ड्यूटी निभाने की उम्मीद करते हैं। उन्हें लगता है कि धीरे-धीरे कर्मचारियों का जोश कम होता जा रहा है। वे चाहते हैं कि संगठन को मजबूत किया जाए तथा भ्रष्टाचार, ठेका, निजीकरण के खिलाफ और विभागों को बचाने के लिए बड़ी लड़ाई शुरू की जाए।
अविनाश का विवाह श्रीमती छिन्दर कौर के सन् 1985 में हुआ। उनके दो बेटे हैं। एक यहीं पर प्राईवेट कंपनी में काम करता है और दूसरा कनाडा में कंपनी में काम करता है।
लेखक – सत्यपाल सिवाच

