कविता
प्यारी कॉमरेड! सोनी सोरी
नूर
प्यारी कॉमरेड! सोनी सोरी,
बस्तर की आवाज़, तुम्हें सिजदा,
गदर की गूंज में शामिल है, तुम्हारी आवाज़।
उन्होंने तुम्हें तोड़ा,
तन, मन और रूह पर ज़ख्म दिए,
तुम्हारी आवाज़ को ,दबाने के लिए,
पर तुमने सिर नहीं झुकाया, जुल्मी के आगे।
टूटी नहीं तो — टूटकर भी ।
यह तुम्हारे हौसले, तुम्हारे जज़्बे,
तुम्हारी उजली रूह के तेज़ के आगे,
ओ दैत्य कद जाबर का रचा घनघोर ,
उससे घबराता है।
तुम स्त्री की भीतरी ताकत की,
ज़ुल्म के खिलाफ डटकर लड़ने की,
स्वाभिमान की रक्षा के लिए, भिड़ जाने की,
जीवंत तस्वीर हो।
सदियों से चलते आ रहे संघर्षों की सजीवता में,
“सोनी” — एक नाम ,तुम्हारा भी शामिल रहेगा।
जब हौसले घटेंगे और अँधेरा घना होगा,
सोनी, तुम्हारा संघर्ष प्रकाश-स्तंभ बनकर
राह को सदा रोशन करता रहेगा।
तुम्हारे तप की अग्नि से संघर्ष में ताप जागता है —
सिर्फ आदिवासियों की ही नहीं,
हक़ और सच के लिए लड़ने और खड़े होने वाली
हर आवाज़ में,
सोनी,
तुम्हारे किए संघर्षों की गूंज शामिल है।
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