हरियाणाः जूझते जुझारू लोग – 89
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के मंच से मुख्य भूमिका तक का सफर – किशनलाल सागर
सत्यपाल सिवाच
हरियाणा कर्मचारी आन्दोलन के मंदिर में अनेक ऐसे योद्धा निकले हैं जिन्होंने एक साधारण मजदूर की जगह से उठकर कर्मचारी आन्दोलन में मुख्य किरदार के रूप में खुद को स्थापित किया। किशनलाल सागर ऐसे ही साथियों में से विकसित हुए महत्वपूर्ण नेता हैं। उत्तर प्रदेश राज्य के मेरठ शहर में श्रीमती दुलारी देवी और श्री प्रीतमराम सागर के यहां 1 अप्रैल 1960 को उनका जन्म हुआ। वे छह भाई – बहनें हैं। वे शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाए। बड़े होने पर हरियाणा पशुपालन विभाग में 03 मई 1979 को स्वीपर पद पर नियुक्त हुए। 41 साल की सेवा के बाद 31 मार्च 2020 को सेवानिवृत्त हुए। फिलहाल वे अम्बाला शहर की न्यू रत्तनगढ़ कालोनी, जलबेड़ा रोड पर रहते हैं।
किशनलाल नौकरी में आने के बाद पशुपालन विभाग की चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यूनियन (505) में सक्रिय हो गए। वे यूनियन के ब्लॉक प्रधान, जिला प्रधान और राज्य प्रधान चुने गए। वे सन् 2003 से 2010 और फिर 2013 से 2016 तक सर्वकर्मचारी संघ की केन्द्रीय कमेटी में चुने गए। वह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यूनियन-492 की जिला व केन्द्रीय कमेटी में भी रहे। 24 सितंबर 1999 से दिसम्बर 2009 तक राज्य अध्यक्ष रहे। उसके बाद सन् 2017 तक लगातार वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा सितंबर 2017 से दिसम्बर 2022 फिर राज्य प्रधान बने।
किशनलाल बताते हैं कि सीनियर साथी द्वारा आगे लाने के चलते वे सक्रिय हुए। सर्व कर्मचारी संघ के 1986-87 के आंदोलन के कारण कर्मचारियों के समस्या को लेकर भावनाओं को देखते हुए उनके भीतर कार्य करने की इच्छा जागी। उन्हें बदली के रूप में उत्पीड़न के अलावा सेक्शन 7 में दो बार चार्जसीट किया गया। संगठन के आंदोलन व कर्मचारियों के सहयोग से उत्पीड़न की कार्रवाइयां ठीक हुईं। विभागीय संगठन के आंदोलन को देखते हुए राज्य में काम करने का अनुभव अच्छा रहा। 2000 में संबद्धता लेने के बाद विभागीय कर्मचारी की भागीदारी रही। तन और धन से आंदोलन के रूप में और चंदे के रूप में पूरी भागीदारी रही।
परिवार की ओर से आन्दोलन में पूरा सहयोग रहा तभी इतनी लंबी भागीदारी रही।
कर्मचारियों को किशनलाल सागर का सुझाव है कि राजनेताओं से स्वार्थ के लिए संबंध न बनाएं। कर्मचारियों के शोषण के खिलाफ और मांगों को लेकर विरोध करें। उनका सुझाव है कि कर्मचारी संगठन में काम करने के साथ-साथ परिवार की तरफ ध्यान देना चाहिए। उन्हें लगता है कि घर की ओर कम ध्यान देने की वजह से बच्चे सफल नहीं हुए। परिवार पत्नी रेनू देवी और बच्चे निशा, महेंद्र सागर, मोहित सागर प्राइवेट फैक्ट्री में काम करते हैं
संगठन के योगदान गिनाते हुए वे कहते हैं कि विभागीय कर्मचारी की सर्विस रूल बनवाने, ट्रांसफर पॉलिसी बनवाने और जो पद समाप्त हो रहे थे उन्हें बचाने में सफलता मिली। जिसके फलस्वरूप 2019 में 2000 के लगभग एनिमल अटेंडेंट की नई भर्ती हुई।
ये हैं संगठन की कमियां
किशनलाल मौजूदा दौर के हालात से चिंतित हैं। आज के आंदोलन में संगठन हाईजैक है। सोशल मीडिया में ज्यादा रहना कर्मचारी से संपर्क में ना रहना और व्हाट्सएप ग्रुप में ज्यादा रहना कर्मचारी और पदाधिकारी की सुनवाई न होना आदि संगठन की सेहत के लिए खराब है।
वर्तमान संगठन नंबर 505 की स्थिति अच्छी नहीं है। जिले में भी और स्टेट में भी इसे संभालने की जरूरत है। सर्वकर्मचारी संघ ध्यान देने की जरूरत है। सफाई कर्मचारियों के 2500 से ऊपर पद खाली हैं। उसके लिए आंदोलन की जरूरत है। (सौजन्य- ओमसिंह अशफ़ाक)

लेखक- सत्यपाल सिवाच
