एप्सटीन फाइल्स : यही है शक्तिशाली पुरुष ‘भेड़ियों’ की हक़ीक़त

एप्सटीन फाइल्स : यही है शक्तिशाली पुरुष ‘भेड़ियों’ की हक़ीक़त

निर्मल रानी

इन दिनों एप्सटीन फ़ाइल्स का भूत अमेरिका से लेकर भारत तक सड़कों पर नाच रहा है। अमेरिकी कांग्रेस के क़ानून के अन्तर्गत और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर हस्ताक्षर के बाद ही अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा यह फ़ाइल्स जारी की गई हैं। इस आदेश के तहत अमेरिकी न्याय विभाग को एपस्टीन से जुड़े सभी अनक्लासिफ़ाइड रिकॉर्ड्स, दस्तावेज़, कम्युनिकेशन्स और जांच सामग्री सार्वजनिक करने का निर्देश प्राप्त है।
हालाँकि यह क़ानून 2025 में कांग्रेस के दोनों सदनों (हाउस और सीनेट) से लगभग सर्वसम्मति से पास हुआ था, और राष्ट्रपति ट्रंप ने 19 नवंबर 2025 को इस पर हस्ताक्षर किए थे। इसी क़ानून के तहत अमेरिकी न्याय विभाग ने समय-समय पर फ़ाइल्स जारी की। परन्तु इन फ़ाइल्स का बड़ा हिस्सा गत 30 जनवरी 2026 को जारी किया गया, जिसमें 3.5 मिलियन से ज़्यादा पृष्ठ , 2,000 से अधिक वीडियो और लगभग 1,80,000 फ़ोटो शामिल थे। एप्सटीन फ़ाइल्स के इसी ख़ुलासे के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया। दुनिया के जाने माने लोगों के चेहरे से नक़ाब हटने लगी। इन फ़ाइल्स के सार्वजनिक होने के बाद एप्सटीन के यौन अपराधों, ट्रैफ़िकिंग नेटवर्क और शक्तिशाली व्यक्तियों के साथ उनके संबंधों की गहराई उजागर हुई।
ग़ौरतलब है कि जेफ़री एप्सटीन, एक अमीर फ़ाइनेंसर और दोषी यौन अपराधी है। इसने अनेक नाबालिग़ लड़कियों और युवा महिलाओं का शोषण किया, और इन फ़ाइल्स में राजनीतिक, व्यापारिक और सामाजिक हस्तियों के कई नाम सामने आए। इन ख़ुलासों के बाद कई प्रमुख व्यक्तियों का भविष्य व जीवन प्रभावित हुआ। कई लोगों को इस्तीफ़े देने पड़े तो कई के विरुद्ध जांच बिठाई गयी।

आपना नाम आने पर कई लोग शर्मिंदगी से जहाँ मुंह छुपाते घूम रहे हैं यहाँ तक कि इस नेटवर्क में नाम आने के बाद कई लोग भूमिगत हो चुके हैं और मीडिया से मुंह छुपाते फिर रहे हैं। वहीं भारत में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी जैसे ‘विशिष्ट ‘ भी हैं जो एप्सटीन फ़ाइल्स के ख़ुलासे के अनुसार तो जेफ़री एपस्टीन से 14 बार मिले परन्तु वे स्वयं एपस्टीन से 8 सालों में केवल 3-4 बार की मुलाक़ात को ही स्वीकार करते हैं।

इसके बावजूद वह इस सवाल से बच नहीं पा रहे कि 13 -14 बार या 3-4 बार नहीं बल्कि यदि एक सज़ायाफ़्ता बदनाम यौन अपराधी से हरदीप पुरी एक बार भी मिले तो उस मुलाक़ात की वजह क्या थी ? जो व्यक्ति ख़ुद स्वीकार कर चुका है कि वह कम उम्र की बच्चियों से सैक्स करने का आदी था ऐसे ‘भेड़िया मानसिकता ‘ वाले व्यक्ति से मुलाक़ात क्यों की गयी ? किसके कहने पर या किसके लिये की गयी ? बहरहाल उम्मीद की जा रही है कि अभी दुनिया के और भी अनेकानेक ‘सफ़ेदपोश भेड़ियों ‘ के नाम सामने आएंगे और इस्तीफ़ों की भी झड़ी लग सकती है।
दुनिया में आये दिन घटित होने वाली तमाम घटनाएं ऐसी हैं जो पितृ सत्ता या पुरुष प्रधान समाज का बार बार एहसास कराती हैं। परन्तु इस घटना में तो जेफ़री एप्सटीन पर 2019 में न्यूयॉर्क में संघीय अदालत ने उसपर सेक्स ट्रैफ़िकिंग ऑफ़ माइनर्स के आरोप लगाए, जिसमें दर्जनों नाबालिग़ लड़कियों यहाँ तक कि 14 साल से भी कम उम्र की कुछ बच्चियों का यौन शोषण शामिल था। यह उसकी स्वीकारोक्ति थी कि उसने नाबालिग़ लड़कियों से यौन संबंध बनाये व अवैध काम किए।

इसलिये इस विश्वव्यापी नेटवर्क से पर्दा उठने के बाद अब यह सवाल भी उठने लगा है कि दुनिया के धनाढ्य और शक्तिशाली लोगों की नज़र में महिलाओं, ख़ासकर छोटी बच्चियों का क्या स्थान है ? महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने का ढोंग रचने वाला सफ़ेद पोश पुरुष प्रधान समाज जो कभी महिलाओं को आधी आबादी कहकर ख़ुश करता है तो कभी बच्चियों को ‘कंजक ‘ व देवी के रूप में पूजता भी है उन्हीं बच्चियों को अपने पैसे व सत्ता के बल पर अपनी हवस का निशाना बनाने वाले लोग नाबालिग़ लड़कियों और युवा महिलाओं का शारीरिक शोषण भी करते हैं ?
निश्चित रूप से एपस्टीन फ़ाइल्स पितृसत्ता की एक गहरी तस्वीर पेश करती हैं, जहां धनाढ्य पुरुष विश्वव्यापी नेटवर्क बनाते हैं और एक दूसरे से जानकारी साझा करते हैं और महिलाओं को परिधि पर रखते हैं। वास्तव में ‘आधी आबादी ‘ को प्रायः सहयोगी,या यौन सुख प्रदान करने वाली के रूप में ही देखा जाता है न कि समान भागीदार के रूप में। ख़ासकर ग़रीब परिवारों की छोटी बच्चियों को तो कमज़ोर और आसानी से नियंत्रित करने योग्य माना जाता था। एप्सटीन के नेटवर्क में शामिल कुछ पुरुषों ने कथित तौर पर इन लड़कियों को “उपहार” के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे व्यापारिक या राजनीतिक लाभ मिलते थे।

यह दर्शाता है कि शक्तिशाली लोगों की नज़र में, महिलाएं और लड़कियां अक्सर सत्ता और प्रभाव बनाए रखने का साधन बन जाती है न कि कोई सम्मानजनक मानव। महिलाओं को केवल “प्रजनन उपकरण” के रूप में देखना भी पितृसत्ता की ही एक गहरी साज़िश है।
इसलिये एप्सटीन फ़ाइल्स से प्राप्त हो रहे ब्यौरों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि एप्सटीन जैसे मामलों में जहाँ कुछ शक्तिशाली व्यक्तियों द्वारा छोटी मासूम बच्चियों को मात्र अपनी यौन संतुष्टि के लिये या अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सौदेबाज़ी के साधन के रूप में अथवा किसी ‘विशिष्ट ‘ व्यक्ति को ब्लैकमेल करने की ग़रज़ से इस्तेमाल किया गया।

यह एक ऐसी व्यवस्थित समस्या है जहां धन, सत्ता के बल पर और जवाबदेही की कमी से ऐसी संस्कृति पनपती है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह वैश्विक अपराध नेटवर्क का हिस्सा है, जहां महिलाओं और लड़कियों का वस्तुकरण नस्लवाद और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। हालांकि, FBI की जांच में ट्रैफ़िकिंग रिंग के लिए पर्याप्त सबूत भले ही नहीं मिले परन्तु पीड़ितों की गवाहियां बताती हैं कि यह शोषण अत्यंत व्यापक था। ये फ़ाइल्स यह भी दिखाती है कि सत्ता के शीर्ष पर मिसोगिनी (स्त्री-द्वेष) और यौन हिंसा कैसे सामान्यीकृत हो जाती है। यह एक ऐसी विकृत पुरुष प्रधान व्यवस्था का प्रतिबिंब भी है जहां पीड़ितों को न्याय मिलना मुश्किल रहता है। एप्सटीन फ़ाइल्स ऐसे ही शक्तिशाली पुरुष ‘भेड़ियों ‘ की हक़ीक़त को उजागर करती है।

 

लेखिका – निर्मल रानी

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