हरियाणाः जूझते जुझारू लोग- 85
सेवानिवृत्ति के बाद भी सक्रिय हैं राजेन्द्र सिंह अहलावत
सत्यपाल सिवाच
राजेन्द्र सिंह का जन्म अप्रैल 1950 में तत्कालीन रोहतक (अब झज्जर) के भम्भेवा गांव में श्रीमती धापांदेवी और श्री मांगेराम अहलावत के घर हुआ। उन्होंने जाट हायर सैकेंडरी स्कूल रोहतक से हायर सैकेंडरी कक्षा उत्तीर्ण की और सिंचाई विभाग में 1978 में क्लर्क नियुक्त हो गए। वे 30 अप्रैल 2008 को एस.डी.सी. पद से सेवानिवृत्त हुए।
वे सिरसा में तैनात थे। शुरुआती दौर में वहाँ जाकर बलजीत सिंह नरवाल, लालचन्द गोदारा, जे.पी.पांडे आदि अनेक कर्मचारी नेताओं के साथ संपर्क में आए और हरियाणा सुबोर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन के साथ जुड़ गए। सन् 1986 में सर्वकर्मचारी संघ का गठन हुआ तो वे इस मंच सक्रिय हो गए। उससे पहले सिरसा कर्मचारी संगठन के बैनर से राज्य सरकार, केन्द्र सरकार, बोर्ड, निगम, बैंक, बीमा आदि सभी कर्मचारी एकत्रित हो गए थे। सीटू नेता कामरेड अवतार सिंह का भी कर्मचारियों पर काफी प्रभाव पड़ा।
इसी प्रक्रिया के चलते सिंचाई विभाग के लिपिकों को संगठित करने में भी इन्होंने भूमिका निभाई। वे इस संगठन के भी पदाधिकारी रहे। इसके साथ साथ दूसरे विभागों के लिपिकों को संगठित करने में भी रतन जिंदल, सुखदेव सिंह, हरफूल सिंह भट्टी आदि के साथ काम किया। वर्षों तक सिरसा जिले में सर्वकर्मचारी संघ के भी पदाधिकारी बने। वे 1986 से 1993 तक जिला कोषाध्यक्ष रहे। जब सन् 2012 में रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा का गठन हुआ तो इन्हें उसका महासचिव बनाया गया। ये लगातार तीन बार उसके महासचिव और एक बार वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहे।
वे सन् 1986-87 से 2008 तक सभी आन्दोलनों, धरनों, प्रदर्शनों और हड़तालों में शामिल रहे हैं। वे तीन बार में एक महीना व तीन दिन तक जेल में रहे। सभी प्रकार के उत्पीड़न की कार्रवाइयों से समझौते होने पर मुक्ति मिली।
फिलहाल परिवार के साथ गुड़गांव में रहते हैं और वहाँ के स्तर पर रिटायर्ड कर्मचारियों के हितों के लिए सक्रिय हैं। (सौजन्य: ओमसिंह अशफाक)

लेखक: सत्यपाल सिवाच
