हरियाणा : जूझते जुझारू लोग -84
बलजीत सिंह दुपेडी: अच्छे शिक्षक – प्रतिबद्ध कार्यकर्ता
सत्यपाल सिवाच
अनेकों बार अपनी संघर्षशील आवाज बुलंद करते हुए सरकारों का उत्पीड़न झेलने वाले अध्यापक साथी बलजीत सिंह का जन्म 22 अक्तूबर 1942 को असंध क्षेत्र के गांव दुपेडी में हुआ। इनके पिता श्री किशनसिह अच्छे किसान व माता श्रीमती जयकौर कुशल गृहणी थी।
बलजीत सिंह पांच भाई व एक बहन थे। ये राजनीतिक शास्त्र मे मास्टर डिग्री एवं शिक्षा में परास्नातक करने के बाद 1964 में अस्थाई तौर पर सामाजिक अध्ययन अध्यापक पद हेतु चुने गये तथा बाद में 16 दिसम्बर 1965 को नियमित होकर स्थाई तौर पर सेवारत हुए।
प्रारंभ से ही साथी जनशिक्षा तथा हकों की आवाज को बुलंद करने में रूचि रखने लगे व अध्यापक संघ से जुड़ गये। 1988 से 1990 तक जिला सचिव की जिम्मेदारी संभालने वाले बलजीत सिंह ने 1994-96 में जिला कोषाध्यक्ष का भार अपने कंधों पर लिया। पानीपत व करनाल के साक्षरता अभियान मे लम्बे समय तक काम किया
साथी ने 1972-73 के ऐतिहासिक अध्यापक संघर्ष, 1987 व 1993 के निर्णायक आंदोलनों में अपनी उपस्थिति प्रथम पंक्ति में दर्ज करवाई। साथी का 1983 में पुलिस द्वारा भी उत्पीड़न किया गया। 1972-73 में इन्हें निलम्बन भी झेलना पड़ा। 1972-73 व 1980 में 61 दिन जेल में भी रहना पड़ा।
अपनी नौकरी, संघर्ष के अलावा साथी की खेलों में भी विशेष रुचि थी। इन्होंने पंजाब ओलम्पिक में कुश्ती में रजत पदक भी जीता था। स्कूल के बच्चो की वालीबॉल की टीम तैयार करायी।
अक्तूबर 2000 को अपनी सफल सेवा उपरांत रिटायर हुए।
इसके बाद कुछ समय तक किसान सभा मे भी सक्रिय रहे
साथी बलजीत सिंह के परिवार में पत्नी चन्द्रा देवी के अलावा बेटा दिनेश है तथा पुत्रवधू अनुपम वर्तमान में पी.जी.टी. हिन्दी के पद पर कार्यरत हैं। पोता नवदीप आजकल आस्ट्रेलिया में है। (सौजन्य: ओमसिंह अशफ़ाक)

लेखक : सत्यपाल सिवाच

Master Baljeet Singh is best teacher and good chartered man or sanghars karne wala siksha ke parti samarpit rhe hai kabhi apne vasulo kabhi samjhota nhi kiya Mai aaj jo bhi hu Master ji ka bahut bda Sahyog hai Mai v mere bache sada abhari rahunga
Good man