कविता
हड़ताल
नीना शर्मा
अर्थव्यवस्था की कमजोरी नहीं
लोकतंत्र की मजबूती है
हड़ताल
मेहनतकश आवाम की ताकत
लुटेरों की शिकस्त है
हड़ताल
अंधेरों के खिलाफ उजाले की
पुकार है
हड़ताल
बेईमानी के खिलाफ
पसीने के ईमान की आवाज है
हड़ताल
आस है
हड़ताल
रोष है
प्रतिरोध है
प्रतिशोध है
ललकार है
हड़ताल
आओ मिल कर सफल करें
हडताल।

रचयिता- नीना शर्मा
