हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-83
बेबाक, संघर्षशील और निष्ठावान – जयवीर सिंह ढाण्डा
सत्यपाल सिवाच
हिसार के जिले के बड़े गांव मिर्चपुर निवासी जयवीर सिंह ढांडा उन गिने चुने कार्यकर्ताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने निजी आकांक्षाओं को छोड़कर संगठन के लिए काम किया है। उनका जन्म 20 अक्तूबर 1958 को श्रीमती भरथोदेवी-मास्टर रघुबीर सिंह के घर हुआ। वे पांच भाई तीन बहनें हैं। उन्होंने मैट्रिक के बाद इंजिनियरिंग में तीन वर्षीय डिप्लोमा किया। वे सैनिक स्कूल कुंजपुरा के छात्र रहे हैं।
वे शुरू में 16 जनवरी 1986 को वोकेशनल एजूकेशन में इंस्ट्रेक्टर नियुक्त हुए थे। बाद में वोकेशनल एजूकेशन को बंद किए जाने पर औद्योगिक प्रशिक्षण एवं व्यावसायिक शिक्षा में समायोजित किए गए तथा 31 अक्तूबर 2016 को ग्रुप इंस्ट्रेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए। सरकारी सेवा में आने से पहले 1979 में Mehta Electro Steel Bhiwani में वर्क सुपरवाइजर के रूप में काम किया। सन् 1980 में ब्यास कंस्ट्रक्शन बोर्ड 400 KV सब-स्टेशन पानीपत में इलैक्ट्रशियन लगे। दोबारा 1983 में ब्यास कंस्ट्रक्शन बोर्ड सब-डिवीजन भिवानी में AFM नौकरी की। तीनों अपनी इच्छा से छोड़ी।
पहले व्यावसायिक शिक्षा कर्मचारी संघ बनाया और उसके महासचिव के रूप में काम किया। बाद में औद्योगिक प्रशिक्षण एवं व्यवसायिक शिक्षा कर्मचारी संघ के महासचिव और बाद अध्यक्ष बने। सत्र 1991-93 तथा 1993-1995 में फिर महासचिव बने। जुलाई 2000-2002 सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा की केंद्रीय कमेटी में सहसचिव रहे। जनवरी 1993-1995 सचिव ब्लाक उचाना 1990-91 सचिव- जिला जींद 1997-99 प्रधान जिला जींद 2001-2003 पदों पर काम किया। यूनियन में सक्रिय रहने के कारण हैं आधिकारों के प्रति जागरूकता, न्याय के लिए संघर्षरत करने और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना को यूनियन में सक्रिय होने का कारण मानते हैं।
8-9 जनवरी1993 में पद समाप्त होने के कारण बिना किसी नोटिस सेवा से बर्खास्त, जो तत्काल High Court से Operation Stay होने पर एक सप्ताह बाद सेवा में वापसी तथा विभागीय यूनियन के प्रयास से विभाग में खाली पदों पर समायोजित हुए। दिसम्बर 1993 में हड़ताल के कारण सेवा से बर्खास्त जो सरकार के साथ वार्तालाप से बहाल हुए। 1995 तथा 1997 में आदेशों की अहवेलना के कारण सैक्शन 8 व सैक्शन 7 में चार्जशीट जो जवाब देने पर एक वर्ष व तीन वर्ष के लिए वेतन वृद्धि बंद होने पर कोई अपील नहीं की। इसके इलावा दो तीन बार दूर दराज में स्थानांतरण हुआ, जो एक साल बाद वापस हुए।
विभागीय यूनियन का सर्वकर्मचारी संघ के साथ आने पर बहुत अच्छा अनुभव रहा। सर्व कर्मचारी संघ के आहवान पर हुए आन्दोलन में विभाग के कर्मचारियों की अच्छी भागीदारी रही। सात मार्च 1991का विधानसभा पर प्रदर्शन, 1993 का जेल भरो आंदोलन व हड़ताल, नर्सों का आन्दोलन तथा नगरपालिका कर्मचारियों का आन्दोलन इसके इलावा जो भी विभागीय व सर्व कर्मचारी संघ के आहवान पर धरने प्रदर्शन रहे। आंदोलनों में कभी कोई दिक्कत महसूस नहीं की। परिवार का हमेशा पूरा सहयोग रहा।
नेता होने के कारण राजनीतिक पार्टियां जिनकी भी सरकार रही, उनके राजनेताओं से कभी कोई संबंध नहीं रहा। कभी भी किसी IAS व IPS अधिकारी से नजदीकी संबंध नहीं रहा। कभी भी किसी नेता व अधिकारी से निजी काम नहीं निकलवाया। कभी भी ऐसी कोई ग़लती नहीं की जो लगता हो कि नहीं की जानी चाहिए थी। वे बताते हैं कि 1981में जब मैं गांव में रहता था रोजगार के इंतजार में था तो पांच छह साथियों के सहयोग से योजना बनाकर एक पुस्तकालय का संचालन किया। वह सात आठ साल चला। गांव के विकास के लिए बहुत अच्छा प्रयास रहा जो गांव के लोगों ने खूब सराहा जीवन में संगठन तथा नौकरी में पूरी ईमानदारी से काम किया जिससे कभी भी किसी प्रकार का भय महसूस नहीं किया तथा समाज में भरपूर सहयोग मिला।
वे युवा पीढ़ी को सलाह देते हैं कि युवाओं को चाहिए कि वह सामाजिक कार्य करते हुए अपने अधिकारों को समझें व न्याय के लिए संघर्षरत रहना सीखें। उनके समय के आंदोलनों और आज के दौर के आंदोलनों में काफी अंतर दिखाई देता है। जैसे पहले आपस का संपर्क बहुत अच्छा था। सभी दफ्तरों व स्कूलों में प्रचार के लिए टीम जाती थी तथा खुलकर चर्चा होती थी। लोगों को मुद्दे समझ में आते थे। रात में दीवारों पर लिखते थे, पोस्टर चिपकाते थे। स्वयं कार्यकर्ता ये काम करते थे जिससे मनोबल ऊंचा रहता था तथा आंदोलनों में भागीदारी अच्छी होती थी, जिससे सरकार दबाव में आती थी। जयवीर ढाण्डा कहते हैं कि आजकल की कार्यप्रणाली की ज्यादा जानकारी तो नहीं है, पर लगता है सोशल मीडिया का ही अधिक सहारा लिया जाता है। आज की सरकार का रवैया भी आंदोलनों के प्रति नकारात्मक है। अतः उत्साह नजर नहीं आता।
जयवीर सिंह का विवाह हरसोला निवासी सरोज बाला के साथ 20 मार्च 1983 को हुआ। इनके तीन बच्चे हैं। जिनमें से बड़ी बेटी सुमन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में M.Phil तथा बाद में Ph.D. की है। वह नरवाना में विवाहित है और HIRD में Resource Person है तथा प्राइवेट कालेज में नौकरी करती है। वह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में छात्र नेता भी रही है। बेटा नवदीप पोस्ट ग्रेजुएट है तथा पंचकूला में अपना हार्डवेयर का कार्य करता है। छोटी बेटी वीनू M.Com. है। शादी के बाद दामाद के साथ ब्रिटेन में जॉब करती है। सन् 2017 से पुत्रवधू की नौकरी लगने के बाद परिवार के साथ पंचकूला में रहते हैं। वे कॉलेज में पढ़ाती हैं। सांगठनिक कार्य तो कम ही हो पाता है, परन्तु वामपंथी विचारधारा से जुड़े रहने से संतुष्ट हैं। अभी पिछले महीने किसान सभा के राज्य सम्मेलन में शामिल होने का अवसर मिला बड़ा अच्छा लगा। (सौजन्य: ओमसिंह अशफ़ाक)

लेखक: सत्यपाल सिवाच
