किस्सा सुभाष चन्द्र बोस – वार्ता 6
आजाद देश में जन्म लिया कारण सै थारी कुर्बानी
डॉ रणबीर सिंह दहिया
इस्तीफा देने के बाद सुभाष चन्द्र बोस श्रीमान रॉबर्ट्स से मिलते हैं । वो इस्तीफा न देने प्यार से समझाते हैं मगर वे नहीं मानते। सुभाष बोस सन 1921 में वापस भारत लौट आते हैं देश की आजादी की लड़ाई में शामिल होने को। यहां से उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ। इंग्लैंड से बम्बई पहुंचते ही सुभाष गांधी जी से मिलने जाते हैं। उन्होंने ने गांधी जी से जानना चाहा कि वे किस प्रकार देश को आजादी दिलाना चाहते हैं। सुभाष को यह बात पूरी तरह समझ नहीं आयी कि भला सत्याग्रह, अहिंसा और खादी के जरिये देश को कैसे आजादी दिलाई जा सकती है। इसके बाद वे कलकत्ता चले गए जहां देशबन्धु चितरंजन दास उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। जैसे ही सुभाष कलकत्ता पहुंचे वैसे ही ‘देशबन्धु’ ने एक राष्ट्रीय महा विद्यालय की स्थापना का दायित्व सौंप दिया। इसमें सुभाष सफल रहे। वे खुद दर्शन शास्त्र की कक्षाएं लेते। वे कांग्रेस का प्रचार कार्य भी देखने लगे। उनकी कुर्बानी से जनता प्रभावित थी तो कैसे बताया उनके जीवन के बारे कवि ने:-
आजाद देश में जन्म लिया कारण सै थारी कुर्बानी ।।
दिमाग में घूमें जावै म्हारै थारी खास टोपी की निशानी ।।
1
विदेश गए पढ़ने खातिर आई सी एस पास करी
उड़े देख नजारे आजादी के आकै डिग्री पाड़ धरी
भारत की आजादी खातर लादी थामनै पूरी जिंदगानी ।।
दिमाग में घूमें जावै म्हारै थारी खास टोपी की निशानी ।।
2
आजाद देश में जन्म लिया कारण सै थारी कुर्बानी
कांग्रेस मैं रहकै नै चाही लड़नी थामनै लड़ाई दखे
थारे विचार क्रांतिकारी थे उड़े ना पार बरसाई दखे
बोले थाम खून दयो मैं दिलाऊं तुमने आजादी हिंदुस्तानी ।।
दिमाग में घूमें जावै म्हारै थारी खास टोपी की निशानी ।।
3
सिंगापुर में जाकै थमने आजाद हिंद फौज बनाई
हिटलर तैं पड़े हाथ मिलाने चाहे था वो घणा अन्यायी
लक्ष्मी सहगल साथ थारै अरसैं गेल्याँ महिला बेउनमानी ।।
दिमाग में घूमें जावै म्हारै थारी खास टोपी की निशानी ।।
4
हवाई जहाज में चले थे कहैं उड़े हादसा होग्या दखे
यकीन नहीं आया आज ताहिं शक के बीज बोग्या दखे
के लिख सकै थारे बारे मैं यो रणबीर सिंह अज्ञानी ।।
दिमाग में घूमें जावै म्हारै थारी खास टोपी की निशानी ।।

रागनी लेखक- डॉ रणबीर सिंह दहिया
