हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या एक अभिशाप

डॉ रणबीर दहिया ने हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या को लेकर आंकड़ों के माध्यम से हालात का विश्लेषण किया है। इसे पढ़कर काफी कुछ समझ में आ जाता है। उसके क्या परिणाम होंगे उसके बारे में भी इंगित किया है। संपादक

 

हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या एक अभिशाप

डॉ रणबीर सिंह दहिया

कम लिंगानुपात होने के निम्न संभावित कारण पाए जाते हैं:-

1)

जागरूकता की कमी:

समाज में अभी भी बेटियों को समान महत्व देने की सोच पूरी तरह से विकसित नहीं हुई है।

2)

कानूनों का उल्लंघन:

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए बने कानूनों का उल्लंघन भी एक कारण है।

3)

तकनीकी प्रगति:

आधुनिक तकनीकों का विकास हुआ है।

अल्ट्रासाउंड और गर्भपात जैसी आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग से लिंग-चयनात्मक गर्भपात में वृद्धि हुई है।

 

4)

सामाजिक-आर्थिक कारक:

१) बेटों को प्राथमिकता:

पारंपरिक रूप से, हरियाणा में बेटों को परिवार और समाज में अधिक महत्व दिया जाता है।

२) दहेज प्रथा:

दहेज प्रथा के कारण, बेटियों को बोझ माना जाता है, जिससे कन्या भ्रूण हत्या और लिंग-चयनात्मक गर्भपात को बढ़ावा मिलता है।

कम लिंगानुपात के परिणाम:

1)

लैंगिक असंतुलन:

कन्या भ्रूण हत्या के कारण समाज में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में बहुत अधिक हो जाती है, जिससे विवाह योग्य महिलाओं की कमी हो जाती है, बिहार और दूसरे प्रदेशों से महिलाएं खरीद कर लाई जाती हैं जिससे और सामाजिक समस्याएं पैदा होती हैं।

2)

महिलाओं के खिलाफ अपराध:

जब महिलाओं की संख्या कम होती है, तो उनके खिलाफ हिंसा, दुर्व्यवहार और शोषण की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

सामाजिक संरचना में परिवर्तन:

कन्या भ्रूण हत्या के कारण सामाजिक संरचना में बदलाव आता है, जैसे कि विवाह के लिए महिलाओं की कमी और परिवारों में महिलाओं की भूमिका में कमी।

3)

मानव तस्करी:

महिला तस्करी और बाल विवाह जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं क्योंकि विवाह योग्य महिलाओं की कमी होती है।

4)

आर्थिक दुष्परिणाम:

१)श्रमिकों की कमी:

कन्या भ्रूण हत्या के कारण देश के विकास के लिए आवश्यक कार्यबल में कमी हो सकती है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

२)सामाजिक सुरक्षा पर बोझ:

कन्या भ्रूण हत्या के कारण, वृद्ध माता-पिता की देखभाल करने और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों पर बोझ बढ़ सकता है, क्योंकि महिलाओं की संख्या कम होने के कारण सामाजिक सुरक्षा में गिरावट आती है।

5)

मनोवैज्ञानिक दुष्परिणाम:

मां पर नकारात्मक प्रभाव:

कन्या भ्रूण हत्या के कारण मां को भावनात्मक आघात और अपराधबोध का सामना करना पड़ सकता है, खासकर यदि यह गर्भावस्था के बाद किया जाता है।

6)

समाज में भय और असुरक्षा:

कन्या भ्रूण हत्या के कारण समाज में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है, खासकर महिलाओं और लड़कियों में।

7)

नैतिक मूल्यों का पतन:

कन्या भ्रूण हत्या नैतिक मूल्यों के पतन का संकेत है और यह समाज को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

8)

इन दुष्परिणामों के अलावा, कन्या भ्रूण हत्या एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है और इसे रोकना आवश्यक है।

9)

सामाजिक असंतुलन:

विषम लिंगानुपात से महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और विवाह साथी ढूंढने में कठिनाई जैसी सामाजिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

10)

जनसांख्यिकीय असंतुलन:

यह भविष्य की जनसंख्या वृद्धि और आयु संरचनाओं को प्रभावित कर सकता है।

11

आर्थिक प्रभाव:

बेटों को प्राथमिकता देने से लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में कम निवेश हो सकता है, जिससे उनकी आर्थिक क्षमता बाधित हो सकती है।

हरियाणा के आंकड़े बहुत कुछ कहते हैं

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 5 (2019–2021) % में

1.महिलाओं की जनसंख्या 6 साल और इससे ऊपर जो कभी स्कूल गई हैं –अर्बन –82.30, रूरल– 69.6, कुल जोड़– 73.8

2. जनसंख्या 15 साल से कम उम्र की अर्बन 23.2 रॉयल 26.3 कुल — 25.3

3. जनसंख्या में लिंग अनुपात (महिला प्रति एक हजार पुरुष)–अर्बन–911, रूरल–933, कुल जोड़–926.

4. लिंगानुपात पिछले 5 साल में जन्म के वक्त-अर्बन–943, रूरल–873, कुल जोड़–893.

5. 20 से 24 साल के बीच की महिलाएं जिनकी 6 साल से कम उम्र में शादी हुई—अर्बन–9.9, रूरल–13.7, कुल जोड़–12.5.

6. नवजात शिशु मृत्यु दर–अर्बन–19.0, रूरल–22.7, कुल जोड़– 21.6.

7. शिशु मृत्यु दर–अर्बन–28.6, रूरल–35.3, कुल जोड़–33.3

8. 5 वर्ष से छोटे बच्चों की मृत्यु दर–अर्बन–36.0, रूरल–39.8, कुल जोड़–38.7.

9. अस्पताल में डिलीवरी–अर्बन–96.1,रूरल–94.4, कुल जोड़–94.9.

10. सरकारी अस्पताल में डिलीवरी–अर्बन–48.6,रूरल–61.1, कुल जोड़–57.5. 11.सिजेरियन सेक्शन से डिलीवरी–अर्बन–23.5,रूरल–17.8,कुल जोड–19.5.

इन आंकड़ों पर गौर किया जाए तो लैंगिक भेद की बहुत सी बातें स्पष्ट हो जाती हैं ।

 

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