राजकुमार धिकाड़ा – जातिभेद के कट्टर विरोधी और सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक

हरियाणा : जूझते जुझारू लोग – 78

राजकुमार धिकाड़ा – जातिभेद के कट्टर विरोधी और सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक

सत्यपाल सिवाच

राजकुमार का जन्म महेन्द्रगढ़ जिले (अब दादरी) के गांव धिकाड़ा में 15.04.1964 को हुआ। उनकी माँ का नाम सुखमा और पिता का नाम सूरजभान है। वे दो भाई और तीन बहनें हैं। उन्होंने सन् 1983 में मैट्रिक परीक्षा पास की और उसके बाद आईटीआई में इलैक्ट्रशियन का डिप्लोमा किया।

04.दिसंबर 1986 को उन्हें जनस्वास्थ्य विभाग में हेल्पर की नौकरी मिल गई। वे 30.अप्रैल 2022 को चार्जमैन इलेक्ट्रिक पद से रिटायर हुए। वे 1987 में ही आन्दोलन के साथ जुड़ गए थे। वे अपनी यूनियन में ब्रांच से राज्य स्तर तक के पदाधिकारी रहे। ब्रांच प्रधान व सचिव, जिला सचिव और राज्य में प्रैस सचिव पदों पर काम किया।

जब दादरी को भिवानी से अलग जिला बनाया गया तो उन्होंने यहाँ सर्वकर्मचारी संघ को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे जिला प्रधान के रूप में कर्मचारियों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

राजकुमार जातिभेद के कट्टर विरोधी और सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक हैं। इसीलिए वे अपने नाम पीछे गांव की पहचान के रूप में “धिकाड़ा” लिखते हैं। वे प्रगतिशील, जनतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष हैं। उनका विश्वास है कि जो इन्हें नहीं माने वह विभाजनकारी ताकतों के प्रचार का शिकार हो सकता है। जनता के हितों के पैरोकार के रूप में वे रिटायरमेंट के बाद भी जनवादी आन्दोलनों में अगली कतारों में रहते हैं।

वे आन्दोलन में आगे रहते हैं, इसलिए अनेक बार लाठीचार्ज में चोटें खाईं और पुलिस दमन का बहादुरी से मुकाबला किया। उन्हें तीन-चार बार यूनियन की वजह से स्थानांतरित किया गया। सन् 1993 की हड़ताल में उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था। समझौता होने पर बिना ब्रेक सेवा में आ गए। सन् 1997 में पालिका आन्दोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और 35 दिन तक जेल में बंद रखा।

राजकुमार धिकाड़ा का मानना है कि भाजपा कर्मचारियों और जनता को अलग अलग तरह से बांटने के हथकंडे अपना रही है। कहीं ओपीएस-एनपीएस, तो कहीं रेग्युलर-ठेका कर्मचारी, कहीं कौशल रोजगार तो सुरक्षा एक्ट वाले कर्मचारी – नये नये विभाजन पैदा हो गए हैं। ऐसी स्थिति में संयुक्त आन्दोलन ही सभी को एकजुट कर सकता है।

सन् 1987 में उनका विवाह सुश्री सरोज के साथ हुआ। उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। बेटा पुलिस में है। बेटियों में से दो की शादी की जा चुकी है। फिलहाल दादरी में रहते हैं। सौजन्य -ओमसिंह अशफ़ाक

लेखक – सत्यपाल सिवाच

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