नेताजी के जन्मदिन पर विशेष हरियाणवी रागनी
किस्सा सुभाष चन्द्र बोसः वार्ता- 3
डॉ रणबीर सिंह दहिया
सुभाष बोस के पिता जानकी नाथ बोस अठाहरवीं सदी के अस्सी के दशक में उड़ीसा आये थे तथा वकालत के पेशे में खुद की स्थापित करके कटक में बस गए थे । वहीं 23 जनवरी , सन 1897, दिन शनिवार को बोस का जन्म हुआ। इनकी माता जी का नाम प्रभाबती थी। ये अपने माता पिता के छठवें पुत्र और नौवीं सन्तान थे।
सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन (23 जनवरी ) को याद करते हुए उनके पूरे जीवन और उनके संघर्ष एक रागनी :-
शत शत शत प्रणाम तनै आजाद हिंद फौज बनाई ।।
फिरंगी की ईसके दम पै तने ईंट तैं ईंट बजाई।।
1
छिहत्तर साल मौत नै होगे बेरा नहीं लग पाया
इतिहास की किताबों मैं यो विमान हादसा बताया
ठाराँ अगस्त नै मातम छाया खबर मौत की आई ।।
फिरंगी की ईसके दम पै तने ईंट तैं ईंट बजाई।।
2
कद हुई मौत ना बेरा फेर जिंदा तूँ म्हारे दिल मैं
जिस आजादी खातिर लड़े हटकै फिर मुश्किल मैं
या नाग पुकारै बिल मै धर्म पै नफरत फैलाई ।।
फिरंगी की ईसके दम पै तने ईंट तैं ईंट बजाई।।
3
तेईस जनवरी का दिन हमेशा हमनै याद रहैगा
दिल म्हारा इस दिन सुभाष बोस जिंदाबाद कहैगा
जुल्म खिलाफ वो फहैगा जो सच्चा वीर सिपाही ।।
फिरंगी की ईसके दम पै तने ईंट तैं ईंट बजाई।।
4
तेरे सपन्यां का भारत आज तलक ना बन पाया
मुट्ठी भर ऐस करैं बाकी मरे भूखा तिसाया
रणबीर नै अलख जगाया करकै तेरी कविताई ।।
फिरंगी की ईसके दम पै तने ईंट तैं ईंट बजाई।।

लेखक– डॉ रणबीर सिंह दहिया
