कविता
संस्कारी
. जयपाल
जरूरी नहीं
वह हिटलर की तोप लेकर ही आए
वह आ सकता है
पकड़ कर बच्चों की उंगली
थाम कर मांओं का पल्लू
गाते हुए बेटियों के गीत
संभालते हुए पिताओं की पगड़ी
वह आ सकता है
जपते हुए महामृत्युंजय मंत्र हस्पतालों के लिए
पाठ करते हुए धर्म-ग्रंथों का स्कूलों के लिए
बनाते हुए भव्य मंदिर गंदी बस्तियों के लिए
निकालते हुए गौरव-यात्रा स्वर्ण-युग के लिए
वह आ सकता है
राम-राज का सपना लेकर गांवों के लिए
आर्यावर्त का नक्शा लेकर शहरों लिए
फूलों की बारिश लेकर खेतों के लिए
पूंजी की बहार लेकर रोजगार के लिए
भक्तों की फौज लेकर सुरक्षा के लिए
घर पर ही रहना दोस्त
हत्यारा बड़ा संस्कारी है
