कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विद्वानों ने हिंदी भाषा के विकास पर दिया जोर

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विद्वानों ने हिंदी भाषा के विकास पर दिया जोर

  • साहित्यिक ही नहीं, आर्थिक तौर पर भी समृद्ध होती जा रही हिंदीः  प्रो. अवधेश कुमार
  • कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में ‘‘राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर हिंदी‘ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी-विभाग ने विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में ‘‘राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर हिंदी‘‘ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में अतिविशिष्ट वक्ता प्रो० अवधेश कुमार, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र), विशिष्ट वक्ता प्रो० जंग बहादुर पाण्डेय, राँची विष्वविद्यालय, राँची (झारखंड) और मुख्य वक्ता प्रो० विनय कुमार मगध विश्वविद्यालय, (बोधगया) ने विचार व्यक्त किए। प्रो० अवधेश कुमार ने कहा कि हिंदी की अपनी एक दीर्घकालिक यात्रा रही है, जो आज भी देश- विदेश की सीमाओं को लांघते हुए आगे बढ़ रही है। अब हिंदी केवल साहित्यिक तौर पर ही नहीं, अपितु आर्थिक तौर पर भी समृद्ध होती जा रही है

प्रो० जंग बहादुर ने कहा कि हिंदी मात्र भाषा नहीं, बल्कि हमारे देश की अस्मिता है। हिंदी के कारण ही हम सबकी पहचान है और अब विश्व पटल पर भी हिंदी दिनोदिन प्रचारित – प्रसारित हो रही है। विश्व हिंदी सम्मेलनों ने वैश्विक स्तर पर हिंदी को एक नई दिशा प्रदान की है।

प्रो० अवधेश कुमार ने ने कहा कि यदि हमें अपनी भाषा को ऊंचाई के शिखर बिंदु पर देखना है, तो सबसे पहले हिंदी को ज्ञान-विज्ञान, व्यवहार और आर्थिक तौर पर भी उसकी हर आयामों से उन्नति करनी होगी। उन्होंने कबीर, जायसी, तुलसीदास, सूर, निराला की कविताओं को वर्तमान संदर्भ से जोड़ते हुए उसकी प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए।

मुख्य वक्ता प्रो० विनय कुमार ने कहा कि धीरे-धीरे हिंदी को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिल रही है। अंग्रेजी, चीनी भाषा के बाद विश्व स्तर पर हिंदी बोली जा रही है। बस अब जरूरत है कि अब हम सभी संकल्पित होकर अपनी भाषा की उन्नति के लिए अपने स्तर पर कार्य करें।

पीएनबी की पूर्व प्रबंधक अर्चना कोचर ने हिंदी की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। हिंदी के लिए समर्पित सॉफ्टवेयर की जानकारी दी और साथ-साथ ही बैंकों में हिंदी भाषा की दिशा व दशा की भी जानकारी दी।

प्रो० पुष्पा रानी ने कहा कि हमें केवल कागजी तौर पर ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक तौर पर भी हिंदी का पठन-पाठन करना चाहिए। हिंदी भाषा का दिखावा मात्र नहीं, वरन् वास्तव में उसके प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

संगोष्ठी के अंत में पीएनबी की  पूर्व प्रबंधक अर्चना कोचर की पुस्तकों का विमोचन किया। इस मौके पर महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों के अध्यापकों एवं शोधार्थियों ने शोध-पत्र पढ़े।

इस कार्यक्रम में आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर, पंजाबी विभाग की लता खेरा, कैप्टन परमजीत सिंह, आई.आई.एच.एस. के प्रो. आर.के. सुदन, डॉ. अम्बेड़कर कॉलेज के प्राचार्य ऋशिपाल बेदी, आर.के.एस.डी कॉलेज कैथल से प्रो. आर.पी. मौन एवं ओ.पी. सैनी, जी.एम.एन अम्बाला कैंट से रितु गुप्ता, मणिपुर सेंट्रल यूनिवर्सिटी की प्रो. कंचन शर्मा, बठिंडा से डॉ. राकेश दुबे, हिंदी विभाग से डॉ. जसबीर सिंह आदि प्रमुख उपस्थित थे।

सबसे सर्वप्रथम हिंदी विभागध्यक्ष व संगोष्ठी संयोजिका प्रो पुष्पा रानी, पी०एन०बी० की पूर्व प्रबंधक अर्चना कोचर व सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मेनेजर सुभाष चंद्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। गोष्ठी की संयोजक प्रो० पुष्पा रानी ने स्वागत वक्तव्य और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

 

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