नहीं रही झांसी की जांंबाज रानी, कत्ल हो गया
बुंदेलखंड की पहली ऑटो चालक अनीता चौधरी की लाश लहूलुहान मिली
डीआईजी ने बहादुर के लिए किया था सम्मान
कुमार सौवीर
झांसी की बहादुर अनीता चौधरी मजबूरी में ऑटो चलाकर परिवार पालने वाली ‘साहस की मिसाल थी। लेकिन कल शाम उसकी लहूलुहान मौत ने पूरे इलाके को दहला दिया।
करीब 40 बरस की अनीता चौधरी जो बुंदेलखंड की धरती पर ‘पहली महिला ऑटो ड्राइवर’ बनकर मिसाल कायम कर रही थीं, अब खबरों में हैं। मौत की दर्दनाक तस्वीर से। मजबूरी में सड़कों पर ऑटो दौड़ातीं, परिवार की रोटी कमातीं, और समाज की पाबंदियों को ठुकरातीं अनीता की लाश 6 जनवरी 2026 की सुबह स्टेशन रोड पर एक स्कूल के पास मिली। लहूलुहान। ऑटो उलटा पड़ा, और गहने-मोबाइल गायब। क्या ये महज हादसा था, या महिलाओं के संघर्ष पर समाज की क्रूर चोट? परिवार चीख रहा है कि ये हत्या है, लूटपाट के बाद की साजिश!
अनीता की कहानी वो है जो हर मेहनतकश महिला की जिंदगी छूती है। पति द्वारिका चौधरी बस स्टैंड पर छोटी-मोटी ठेला चलाते हैं, कोई ठोस कमाई नहीं। कोविड के दौर में अनीता ने नौकरी छोड़ी, परिवार की विरोध के बावजूद 18 फरवरी 2021 को फाइनेंस पर ऑटो खरीदा। पड़ोसी से ड्राइविंग सीखी, और झांसी की सड़कों पर उतर गईं। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, सब संभालतीं।
डीआईजी और पुलिस ने उनके साहस को सम्मानित किया, वो बुंदेलखंड में महिलाओं की प्रेरणा बनीं। तलपुरा (अंबेडकर नगर) में रहने वाली अनीता सुबह घर का काम निपटातीं, शाम-रात ऑटो चलातीं। लेकिन ये संघर्ष अब खून में डूब गया।क्या हुआ उस रात? 5 जनवरी (रविवार) शाम 9:30 बजे अनीता घर से निकलीं ऑटो चलाने। रात नहीं लौटीं, तो परिवार परेशान। सुबह 2:30-3:30 बजे नवाबाद पुलिस स्टेशन इलाके में स्टेशन-सिविल लाइंस रोड पर उनकी लाश मिली।
सिर पर गहरे घाव, गर्दन में गोली का निशान! ऑटो उलटा पड़ा, लेकिन परिवार कहता है। ये एक्सीडेंट नहीं लगता। बहन विनीता चौधरी और रिश्तेदारों का आरोप: चोटें सिर्फ सिर पर, कोई खरोंच नहीं। जैसे हादसे में होना चाहिए। मंगलसूत्र, कान की बालियां, पायल, नाक की कील, मोबाइल, सब गायब! ये लूट के बाद हत्या है, और ऑटो उलटाकर हादसा दिखाने की कोशिश।
पुलिस की शुरुआती कहानी: डायल-112 पर सूचना मिली कि ऑटो पलटा, ड्राइवर नीचे दबकर मर गया। लेकिन पोस्ट-मॉर्टम ने सनसनी फैला दी – गर्दन में गोली! एसएसपी झांसी मूर्ति ने कन्फर्म किया।
परिवार की शिकायत पर मर्डर केस दर्ज, मुख्य आरोपी मुकेश झा (6-7 साल से जान-पहचान, हाल में विवाद) फरार, उसके लिए 25,000 रुपये का इनाम। बेटा शिवम झा और साला मनोज झा हिरासत में। सीओ सिटी लक्ष्मीकांत गौतम और SP सिटी प्रीति सिंह मौके पर पहुंचे, फॉरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए, सीसीटीवी चेक हो रहे हैं। लेकिन परिवार पूछ रहा है अगर हादसा था, तो गोली कहां से? क्या पर्सनल दुश्मनी थी, या लूट का शिकार बनीं अनीता?
ये सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि समाज की सच्चाई है। जहां महिलाएं सशक्तिकरण की बात करतीं, वहां सड़कें सुरक्षित नहीं। अनीता जैसी मेहनतकश महिलाएं घर चलातीं, लेकिन रात की सड़कों पर खतरा मंडराता रहता। पुलिस की लेट रिएक्शन, सीसीटीवी की कमी, और जांच की सुस्ती। ये सब मिलकर ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देते हैं। परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन क्या मिलेगा? या ये भी अनसुलझी फाइलों में दफन हो जाएगा?
अनीता चौधरी की जाति या समुदाय के बारे में खबरों में कोई साफ जानकारी नहीं मिली। शायद ये मायने नहीं रखती, क्योंकि उनका संघर्ष हर महिला का था। लेकिन समाज को सोचना होगा कि कब तक ऐसी बहादुर महिलाएं खून में डूबेंगी? सरकारें महिला सुरक्षा की बात करतीं, लेकिन झांसी जैसी घटनाएं चीखती हैं बदलाव कब? अनीता की याद में, आइए उनके साहस को सलाम करें, और इंसाफ की मांग करें।
कुमार सौवीर के फेसबुक वॉल से साभार
