वेनेज़ुएला : समृद्धि से पतन तक की दर्दनाक कहानी
नरेन्द्र सहारण
एक समय था जब वेनेजुएला दुनिया के सबसे अमीर देशों में शुमार था। 1950 के दशक में, जब दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने के बाद कई देश अपनी अर्थव्यवस्था को संभाल रहे थे, वेनेजुएला की प्रति व्यक्ति जीडीपी दुनिया में चौथे नंबर पर थी। राजधानी काराकास में चमचमाती सड़कें थीं, लग्जरी कारें दौड़ती थीं और गगनचुंबी इमारतें बन रही थीं। 1970 के दशक में तेल संकट के दौरान जब दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, वेनेजुएला के घरों में डॉलर की बारिश हो रही थी। लोग वीकेंड पर मियामी शॉपिंग करने उड़ान भरते थे। देश महंगी स्कॉच व्हिस्की और शैंपेन का सबसे बड़ा खरीदार था। प्रति व्यक्ति आय स्पेन, ग्रीस और इजराइल जैसे विकसित देशों से ज्यादा थी। जनता को लगता था कि अब मेहनत की जरूरत नहीं, तेल हमेशा अमीरी लाता रहेगा।
1976 में सरकार ने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया और सरकारी कंपनी PDVSA बनाई, जो दुनिया की सबसे मुनाफेदार तेल कंपनियों में से एक थी। लेकिन यही तेल वेनेजुएला की सबसे बड़ी कमजोरी बन गया। देश ने अपनी सारी ताकत सिर्फ तेल निकालने में लगा दी। खेती, फैक्ट्रियां और अन्य उद्योगों पर ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि सूई से लेकर खाने की चीजों तक सब कुछ आयात करने लगा। इसे अर्थशास्त्री “डच डिजीज” कहते हैं – जब कोई देश एक ही संसाधन पर इतना निर्भर हो जाता है कि बाकी अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ जाती है।
1999 में ह्यूगो शावेज के सत्ता में आने के बाद पॉपुलिस्ट नीतियां शुरू हुईं। तेल की ऊंची कीमतों से आने वाले पैसे को मुफ्त योजनाओं, सब्सिडी और सामाजिक कार्यक्रमों में उड़ा दिया गया। भविष्य के लिए निवेश नहीं हुआ। जब तक तेल महंगा था, सब ठीक चलता रहा, लेकिन 2014 में तेल की कीमतें गिरते ही सब कुछ बिखर गया। सरकार के पास सैलरी देने तक के पैसे नहीं बचे। भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया। PDVSA में योग्य इंजीनियरों को हटाकर राजनीतिक वफादारों को भर दिया गया, जिससे तेल उत्पादन गिरता चला गया। लाखों पढ़े-लिखे लोग डॉक्टर, इंजीनियर देश छोड़कर चले गए।
2018 तक महंगाई 1,30,000 प्रतिशत से ज्यादा हो गई। लोग एक ट्रे अंडे खरीदने के लिए नोटों से भरा झोला लेकर जाते थे। नोट गिने नहीं जाते थे, बल्कि तराजू पर तौले जाते थे एक पलड़े पर सामान, दूसरे पर नोटों की गड्डियां। सरकार ने घाटा पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर नोट छापे, जिससे मुद्रा की कीमत और गिरती गई। अर्थव्यवस्था सिकुड़ती गई, गरीबी बढ़ती गई। लाखों लोग भूख, बीमारी और असुरक्षा से त्रस्त होकर पड़ोसी देशों में पलायन कर गए।
वेनेजुएला दुनिया में सबसे ज्यादा मिस यूनिवर्स विजेताओं वाला देश है – सात क्राउन। ब्यूटी पेजेंट यहां राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक थे। लेकिन संकट ने इस इंडस्ट्री को भी कलंकित कर दिया। गरीबी और बेरोजगारी ने कई युवतियों को स्पॉन्सरशिप के नाम पर यौन शोषण का शिकार बनाया। कुछ कंटेस्टेंट्स को गाउन, सर्जरी के बदले अमीरों के साथ संबंध बनाने पड़ते थे। ट्रेन डे अरागुआ जैसे गैंग्स ने ब्यूटी क्वीन्स को सेक्स ट्रैफिकिंग में धकेला। लाखों महिलाएं पड़ोसी देशों में पलायन कर गईं, जहां कई मजबूरी में वेश्यावृत्ति में फंस गईं सेक्स या ट्रैफिकिंग का शिकार। एक समय की विश्व सुंदरियां देने वाला देश अब महिलाओं की तस्करी और शोषण की कहानियों से जुड़ गया।
यह सब सिर्फ कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और एक ही संसाधन पर अंधी निर्भरता का नतीजा था। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने स्थिति को और खराब किया, लेकिन जड़ें घरेलू नीतियों में थीं। हाल ही में, जनवरी 2026 में अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें नार्को-टेररिज्म के आरोपों में न्यूयॉर्क ले जाया गया। यह घटना वेनेजुएला के लंबे संकट का एक नया अध्याय है, जो दशकों की गलत नीतियों का परिणाम है।
आज, जनवरी 2026 में, वेनेजुएला एक ऐतिहासिक मोड़ पर है। 3 जनवरी को अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया। उन पर नार्को-टेररिज्म, कोकेन तस्करी और हथियारों के आरोप हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब देश चलाएगा, जब तक सुरक्षित ट्रांजिशन न हो। काराकास में धमाके हुए, सेना सक्रिय है। अंतरिम नेता डेल्सी रोड्रिग्ज ने सत्ता संभाली, लेकिन अनिश्चितता चरम पर है। दुनिया भर में प्रतिक्रियाएं विभाजित – कुछ जश्न मना रहे, कुछ इसे साम्राज्यवाद कह रहे। अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर थी – हाइपरइन्फ्लेशन का खतरा फिर मंडरा रहा, तेल उत्पादन गिरा हुआ। अब यह ऑपरेशन क्या नया अध्याय लाएगा – स्थिरता या और अराजकता?
वेनेजुएला की यह कहानी एक बड़ी सीख देती है: कोई भी देश कितना भी अमीर क्यों न हो, अगर वह विविधता नहीं लाता, भविष्य के लिए निवेश नहीं करता और संसाधनों का दुरुपयोग करता है, तो समृद्धि रेत की तरह हाथ से फिसल जाती है। तेल ने शुरू में अमीरी दी, लेकिन लालच, आलस्य और गलत प्रबंधन ने एक समृद्ध राष्ट्र को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया।
लेखक के अपने विचार हैं।
