अपहरण नहीं, प्रोएक्टिव डेंटल डिप्लोमेसी

बात बेबात

अपहरण नहीं, प्रोएक्टिव डेंटल डिप्लोमेसी

विजय शंकर  पांडेय

 

वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो ने 23 दिन पहले “दांत तोड़ दूंगा” क्या कहा, अमेरिका ने उसे दंत-चिकित्सा की अंतरराष्ट्रीय समस्या समझ लिया। नतीजा—US आर्मी ने ऐसा इलाज किया कि मरीज सीधे ऑपरेशन थिएटर से गायब!

अमेरिका ने पहले ही मादुरो के सिर पर 450 करोड़ का इनाम रख रखा था। अब सिर भी चाहिए और दांत भी सुरक्षित। लोकतंत्र का ये नया पैकेज है—“बोलो कम, उड़ो ज्यादा।” मादुरो शायद समझ नहीं पाए कि दांतों की धमकी अब न्यूक्लियर हथियार से भी ज्यादा खतरनाक मानी जाती है।

व्हाइट हाउस ने बयान दिया—“यह अपहरण नहीं, प्रोएक्टिव डेंटल डिप्लोमेसी है।” पेंटागन बोला—“हम सिर्फ सिर ढूंढ रहे थे, शरीर फ्री में मिल गया।” उधर वेनेजुएला में जनता पूछ रही है—“राष्ट्रपति गए कहाँ?” जवाब आया—“क्लाउड में अपलोड हो गए हैं।”

अंतरराष्ट्रीय कानून भी असमंजस में है। संयुक्त राष्ट्र ने आपात बैठक बुलाई, लेकिन एजेंडा में सिर्फ एक पॉइंट था—“दांतों से जुड़ी धमकियों की वैश्विक गाइडलाइन।”

सबक साफ है: आज की दुनिया में अगर कुछ तोड़ना ही है, तो चुप्पी तोड़िए। वरना सुपरपावर आपको ऐसे उठाएगी, जैसे ओटीपी के बिना लॉग-इन।

लेखक- विजय शंकर पांडेय

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