अमेरिकी साम्राज्यवाद के मुनाफाखोर वैश्विक प्रभुत्व का युद्धोन्मादी चेहरा

अमेरिकी साम्राज्यवाद के मुनाफाखोर वैश्विक प्रभुत्व का युद्धोन्मादी चेहरा

मुनेश त्यागी

 

देखो देखो ईरान पर अमेरिका
का हमलावर आतंकवादी चेहरा,
देखो देखो नकली झूठे शांतिदूत
का असली युद्धोन्मादी चेहरा।

ईरान पर एकतरफा, मनमाने और मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित अमेरिकी हमले ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि अमेरिका का यूएनओ और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों में कोई यकीन नहीं है। पूरी दुनिया पर कब्जा करने की एकतरफा और मनमानी मुहिम के अंतर्गत, अमेरिका पूरी दुनिया के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने का विध्वंसकारी और युद्धोन्मादी अभियान चलाए हुए हैं। अमेरिका का यह हमला ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता पर खुल्लम-खुल्ला और सीधा हमला है।
अमेरिका की चाल देखिए कि इराक पर हमले से पहले अमेरिका ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान का युद्ध करा दिया। अमेरिका और इजराइल का यह युद्ध अपने विरोधियों को खत्म करने की मुहिम की अगली कड़ी है। इन एकतरफा हमलों में, अमेरिका ने स्कूल पर हमला करके 200 से ज्यादा छोटे छोटे बच्चे बच्चियों की हत्या कर दी है और अपने सबसे बड़े विरोधी ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खामनेई की हत्या कर दी है।
बल्कि इसे हत्या नहीं शहादत कहा जाएगा। जनाबे अली खामनेई, ईरान को आजाद रखने की सबसे बड़ी लडाई में, ईरान की सम्प्रभुता बनाए रखने के लिए शहीद होकर अमर हो गए हैं। आज अमेरिका विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा और दुनिया में सबसे बडा हत्यारा और आतंकवादी मुल्क बन गया है। अमेरिका के ये तमाम मनमाने, विध्वंसकारी और आतंकवादी हमले और गतिविधियां बिल्कुल अस्वीकार्य और बेहद निंदनीय हैं।
ईरान पर अमेरिका द्वारा किए गए हमले के बारे में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने कहा है कि “शांति दूत ने एक बार फिर अपना असली चेहरा दिखा दिया है.” फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रो ने इस युद्ध को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा और तनाव बताया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाकदार ने इराक के खिलाफ बेवजह हमलों की कड़ी निंदा की है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और इलाके की अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने कहा है कि ईरान पर किए गए हमलों को तुरंत रोका जाए। भारत के विदेश मंत्री ने कहा है कि ईरान पर हमलों को लेकर कहा है कि हरेक देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा की हिफाजत की जानी चाहिए।
अमेरिका मनमाने रूप से तेल संसाधनों पर कब्जा करने के लिए ईरान पर सातवीं बार हमला कर चुका है। आज पूरी दुनिया देख रही है कि दुनिया के पूंजीवादी साम्राज्यवादी लुटेरे और शोषणकारी मुल्कों की और मुख्य रूप से अमेरिका की, कभी न मिटने वाली लुटेरी भूख ने, दुनिया को विनाश के कगार पर पहुंचा दिया है। इससे पहले भी दुनिया में पूंजीपतियों ने अपने लुटेरे साम्राज्य को बढ़ावा देने के लिए अनेक युद्ध किए थे और दुनिया के अनेक देशों को गुलाम बनाया था। बात यहीं तक नहीं रुकी। दुनिया को अपने कब्जे में लेने के लिए, दुनिया के लुटेरे पूंजीपतियों ने दो विश्व युद्ध किये जिनमें करोड़ों लोग मारे गए।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपने साम्राज्य को और बड़ा करने के लिए और ज्यादा विस्तार देने के लिए, अमेरिका ने दुनिया के 72 देशों पर एक तरफा और मनमाने हमले किए और मनमाने तरीके से हस्तक्षेप किये और करोड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया। पूरी दुनिया को अपना गुलाम बनाने और अपना एकध्रुवीय साम्राज्य कायम करने के लिए और दुनिया के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने के लिए पूंजीवादी साम्राज्यवादियों का यह युद्ध आज भी जारी है। अपनी दादागिरी को और विश्व प्रभुत्व की मानसिकता और मुनाफाखोरी को बनाए रखने के लिए, साम्राज्यवादी अमेरिका ने जिन 70 देशों पर हमले किए हैं उनका विवरण इस प्रकार है,,,,,1 ईरान (1946), 2 चीन, 3 ग्रीस, 4 इटली, 5 फिलीपींस, 6 कोरिया, 7 ईरान(1953,), 8 वियतनाम(1954), 9 ग्वाटेमाला, 10 लेबनान, 11 पनामा, 12 हाइटी(1959), 13 कांगो, 14 वियतनाम(1964), 15 क्यूबा(1961), 16 क्यूबा(1962), 17 लाओस, 18 इक्वाडोर, 19 पनामा, 20 ब्राज़ील, 21 वियतनाम(1975), 22 इंडोनेशिया, 23 कांगो, 24 डोमिनिकन रिपब्लिक, 25 लाओस, 26 घाना, 27 ग्वाटेमाला, 28 कंबोडिया, 29 ओमान, 30 लाओस, 31 चिल्ली, 32 कंबोडिया, 33 अंगोला, 34 ईरान(1980), 35 लीबिया, 36 एल साल्वाडोर, 37 निकारागुआ, 38 लेबनान, 39 ग्रेनाडा, 40 होंडुरास 41 ईरान(1984), 42 लीबिया, 43 बोलिविया, 44 ईरान1987-88), 45 लीबिया, 46 फिलीपींस, 47 पनामा, 48 लाइबेरिया, 49 इराक(1990-91), 50 इराक(1991-2003), 51 हाईटी(1991), 52 सोमालिया, 53 युगोस्लाविया, 54 बोस्निया, 55 हाइटी(1994-95), 56 क्रोएशिया, 57 कांगो, 58 लाइबेरिया, 59 सूडान, 60 अफगानिस्तान, 61 इराक(1998), 62 यूगोस्लाविया, 63 मेकेडोनिया, 64 अफगानिस्तान, 65 इराक(2003), 66 ईरान(2003), 67 हाइटी(2004), 68 सीरिया, 69 यूक्रेन, 70 वेनेजुएला, 71 क्यूबा(1925)और ईरान(20025-26)। यहीं पर देखिए अमेरिका ईरान पर सात बार, क्यूबा पर तीन बार, हाईटी पर चार बार और इराक पर चार बार हमले कर चुका है।
पूरी दुनिया को अपने कब्जे में बनाए रखने के लिए और पूरी दुनिया के प्राकृतिक संसाधनों की लूट और हड़प जारी रखने के लिए दुनिया के अधिकांश पूंजीवादी साम्राज्यवादियों का यह मनमाना युद्ध आज भी जारी है। आज के युद्धों की यह कड़ी इस रूप में देखी जा सकती है,,,,1. इजराइल फिलिपींस युद्ध, 2. रूस यूक्रेन युद्ध, 3. ईरान युद्ध, 4.वेनेजुएला युद्ध, 5.चीन ताइवान तनाव, 6. बांग्लादेश और नेपाल तनाव 7 वैनेजुएला पर अमेरिकी कब्जा, 8 क्यूबा पर फिर से हमले की धमकी। हालात बता रहे हैं कि यदि अमेरिका की मुनाफाखोर और साम्राज्यवादी नीतियों पर प्रभावी रोक लगा दी जाए तो पूरी दुनिया से युद्ध खत्म हो जाएंगे और दुनिया शांति की तरफ बढ़ेगी।
कुछ लोग आज भी पूंजीवादी जनतंत्र के हिमायती बने हुए हैं, मगर जनतंत्र के इस अमानवीय, मनमाने, लुटेरे, हडपी और हत्यारे स्वरूप का समर्थन नहीं किया जा सकता। यह पूंजीपतियों का लुटेरा जनतंत्र है। इन्होंने जनतंत्र की रूपरेखा, आकार और मायने ही बदल दिए हैं। आज जनता को इस लुटेरे पूंजीवादी साम्राजवादी युद्धोन्माद की जरूरत नहीं है। इससे जनता का भला नहीं हो सकता। यहीं पर पूरी दुनिया देख रही है कि आज युद्ध दुनिया के सबसे “बड़े धंधे” बन गए हैं।
पूरी मानवता के कल्याण के लिए, आज यह जरूरी हो गया है कि किसी भी देश या दुनिया के लोग मिलजुल कर एकजुट हों और लुटेरे पूंजीवादी साम्राज्यवादी युद्धोन्मादी, वैश्विक प्रभुत्वकारी और अमानवीय लोकतंत्र के खिलाफ एक मोर्चा खोलें और अपने देश और पूरी दुनिया में जनता का लोकतंत्र कायम करें। जनता का जनवादी लोकतंत्र ही जनता को उसकी बुनियादी समस्याओं,,,, शोषण, जुल्म, अन्याय, भ्रष्टाचार, बेईमानी, रिश्वतखोरी, मक्कारी, छल कपट, जातिवाद, वर्णवाद, अंधविश्वास, धर्मांता, साम्प्रदायिकता, पाखंडों और आपसी नफरत से छुटकारा दिला सकता है।
आज पूरी दुनिया में देखा जा रहा है कि दुनिया का लूटेरा पूंजीवादी साम्राज्यवाद, दुनिया के किसी भी देश को स्वतंत्र रूप से अपनी जनता के कल्याण के लिए काम करने नहीं देना चाहता। वह समाजवादी मुल्कों का सबसे बड़ा दुश्मन बनकर दुनिया के सामने है। दुनिया के इन साम्राज्यवादी मुल्कों ने यूएनओ जैसी जरूरी संस्था को लगभग खत्म कर दिया है। दुनिया के समस्त पूंजीवादी साम्राज्यवादी लुटेरों का एक ही मकसद है कि किसी भी तरह से दुनिया से समाजवादी व्यवस्था का खात्मा किया जाए और इसीलिए वे मिलजुल कर, दुनिया के समाजवादी सोच की तरफ़ बढ़ते हुए मुल्कों पर एक के बाद एक हमले कर रहे हैं और पूरी समाजवादी व्यवस्था और समाजवादी देशों को दुनिया से खत्म कर देना चाहते हैं। इसीलिए पूरी दुनिया में आज युद्धों की विभीषिका छाई हुई है।
मुनाफाखोर और शोषणकारी पूंजीवादी साम्राज्यवाद ने सिद्ध कर दिया है कि वह जनता की बुनियादी समस्याओं का हल नहीं कर सकता। उसका इरादा केवल और केवल अपना मुनाफा बढाए रखने के लिए, पूरी दुनिया को अपने कब्जे में लेना है, उसे अधिकारविहीन व्यवस्था कायम करनी है। उसने जनतंत्र को खोखला कर दिया है और जनतंत्र को केवल एक दिखावे के रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत कर दिया है।
दुनिया के महानतम क्रांतिकारी लेनिन जिन्होंने 1917 में रूस में किसानों मजदूरों की सरकार कायम की और वैज्ञानिक समाजवाद की मार्क्सवादी विचारधारा को धरती पर उतारा था, उन्होंने 1916 में ही कह दिया था कि साम्राज्यवाद, पूंजीवाद की चरम अवस्था है। यह देश और दुनिया के किसानों मजदूरों और पूरी मेहनतकश जनता की बुनियादी समस्याओं का हल नहीं कर सकता। इसका सिर्फ एक ही एक मकसद है,,, पूरी दुनिया पर अपने मुनाफाखोर, शोषणकारी और अन्यायी वैश्विक प्रभुत्वकारी सोच को थोपना और पूरी दुनिया को अपनी मुनाफाखोरी के लिए अपने कब्जे में करना।

पूंजीवादी साम्राज्यवादी शोषणकारी व्यवस्था को लेकर लेनिन की वह भविष्यवाणी आज पूरी तरह से सही साबित हो रही है। पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था के जनतंत्र का यह स्वरूप अमानवीय, अस्वीकारीय और पूरी तरह से जनविरोधी है। यह जनता का जरूरी कल्याण और समुचित विकास नहीं कर सकता। इसलिए आज हरेक देश और पूरी दुनिया के लोगों को मिलजुल कर, एकजुट होकर, शिक्षित और संगठित होकर और संघर्ष के मार्ग पर उतर कर, जनता का जनतंत्र कायम करना पड़ेगा। उन्हें लुटेरे, मनमाने, मुनाफाखोर, वैश्विक प्रभुत्वकारी, युद्धोन्मादी, पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था और सोच से छुटकारा पाना पड़ेगा। इसके अलावा जनतंत्र के कोई मायने नहीं है। पूंजीवादी साम्राज्यवादी शोषक और विश्व प्रभुत्व की सोच वाले इस मुनाफाखोर, वैश्विक प्रभुत्वकारी, अमानवीय और खुदगर्ज जनतंत्र को स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसका खात्मा जितनी जल्दी हो सके, उतना ही दुनिया के लिए अच्छा होगा। हम सब फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के साथ मिलजुल कर कहें,,,,

हम मेहनतकश जग वालों से
जब अपना हिस्सा मांगेंगे,
एक खेत नहीं एक देश नहीं
हम तो सारी दुनिया ही मांगेंगे।

 

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