रणबीर दहिया की रागनी – किस्सा सुभाष चन्द्र बोस 

 

किस्सा सुभाष चन्द्र बोस

डॉ रणबीर सिंह दहिया

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वार्ता:

सुभाष चंद्र बोस के पिता जानकीदास बॉस पिछली सदी 18वीं के 80 के दशक में उड़ीसा आए थे तथा वकालत के पेशे में खुद को स्थापित करके कटक में बस गए थे। वहीं 23 जनवरी सन 1897 दिन शनिवार को सुभाष बोस का जन्म हुआ। उनके पिता माही नगर के बॉस लोगों के वंशज थे जबकि सुभाष बोस की मां प्रभाबती बल्कि कहना चाहिए प्रभावती हटखोला के परिवार से आई थी। सुभाष बोस अपने माता पिता के छटवें पुत्र तथा कुल मिलाकर नौवीं संतान थे। सुभाष बोस का परिवार बहुत अमीर तो नहीं था पर एक खाता पीता मध्यवर्गीय परिवार अवश्य था। और इसलिए सुभाष बोस को कभी भी किसी भी किस्म के अभाव का सामना नहीं करना पड़ा । गरीबी क्या होती है यह सुभाष ने बचपन में नहीं जाना ।

सुभाष बोस से पहले का दौर:

अठाहरवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में भारत का शासन अंग्रेजों के हाथों में चले जाने के परिणामस्वरूप भारतीय समाज किस तरह की उथल-पुथल तथा परिवर्तनों से गुजरा होगा, इसका अनुमान लगा पाना इतना आसान नहीं था किसी के लिए भी।

मगर उसके बाद के दौर को समझने के लिए उस दौर को जानना भी जरूरी था ।

हिंदुस्तानी राजे रजवाड़ों की विदाई के साथ ही उनकी छत्र छाया पलने बढ़ने वाले जागीरदार तथा सामन्त भी जड़ों से उखड़ गए। इनका स्थान नई नौकरशाही ने ले लिया। व्यापार करने आये और शासक बन बैठे। परन्तु ये दोनों काम बिना भारत वासियों के एक हिस्से की मदद के यह सम्भव नहीं था। यह थी नौकरशाही।

किसानों पर तथा आम जनता पर अंग्रेजों के अत्याचार बढ़ते जाते हैं |

–जलियांवाला कांड हुआ फिर रोलेट एक्ट की बात चली और गाँधी जी का भारत छोडो आंदोलन चला। अंग्रेजों के अत्याचार बढ़ गए। लोगों को जेलों में डाल दिया जाने लगा। उधर आजाद हिन्द फ़ौज का हौसला बनाये रखने के लिए बहुत सारी बातें सुभाष चन्द्र बोस फौजियों से करते हैं | अंग्रेजों के अत्याचारों के बारे फौजियों को जगरूक करते हैं । क़्या बताया भला —

अंग्रेजों नै लूट मचाई यो चारों कूट रोला पड़ग्या।

एक दूजे के गल कटावैं राज पाट जमा सड़ग्या।।

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घर बनाये तबेले देश मैं रही माणस की खोड़ नहीं

जात पात पर भिड़वारे आज जुल्मों का औड़ नहीं

शोषण करैं देश का इमान का जुलूस लिकड़ग्या।।

एक दूजे के गल कटावैं राज पाट जमा सड़ग्या।।

2

मेहनत करी लोगां नै विज्ञान नै राह दिखाया

या दुनिया बदल दई घणा खून पसीना बाहया

गोरयां नै डाण्डी मारी भारत कति ए तै पिछड़ग्या ।।

एक दूजे के गल कटावैं राज पाट जमा सड़ग्या।।

3

न्याय की बात भूलगे नहीं ठीक करया बंटवारा

पांच सितारा होटल दूजे कान्ही यो फूटया ढारा

देश की कमाई का मुनाफा अंग्रेजों कै बड़ग्या।।

एक दूजे के गल कटावैं राज पाट जमा सड़ग्या।।

4

रेडिओ पै सपने हमनै आज खूब दिखाये जावैं

रणबीर लालच देकै नै पिठू आज बनाये जावैं

डर आजादी की लड़ाई तैं गोरा और अकड़ग्या ||

एक दूजे के गल कटावैं राज पाट जमा सड़ग्या।।

लेखक – रणबीर दहिया

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