किसानों ने जींद में ललकार रैली कर हरियाणा और केंद्र सरकार की नीतियों पर जताया गुस्सा
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एसकेएम के नेताओं ने कहा, फसल बेचने संबंधी हरियाणा सरकार की नई शर्तों को नहीं मानेंगे
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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आज काला दिवस मनाने के आह्वान का किया समर्थन
जींद। हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा ने मंगलवार को जींद में राज्य स्तरीय ललकार रैली कर राज्य और केंद्र सरकार पर किसान विरोधी और विनाशकारी नीतियों का आरोप लगाते हुए दोनों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। रैली में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि किसान फसल बेचने संबंधी हरियाणा सरकार की नई शर्तों को नहीं मानेंगे और इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग करते हैं। रैली ने 1 अप्रैल को श्रम संहिताओं के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा मनाए जाने वाले काले दिवस के आह्वान का समर्थन किया।
रैली की अध्यक्षता भारतीय किसान संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विकास सीसर, रणबीर मलिक,जियालाल, सुखदेव जन्मू, कुलदीप पुनिया के अध्यक्षमंडल ने की!
रैली में हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले किसानों ने हरियाणा की भाजपा सरकार द्वारा फसल बेचने पर लगाए जा रहे निर्देशों का कड़ा विरोध किया। एसकेएम नेताओं ने नायब सैनी सरकार पर धान खरीद में बड़े घोटाले को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय सरकार किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अनुचित और दमनकारी शर्तें थोप रही है।
विभिन्न संगठनों के वक्ताओं ने सभा को संबोधित करते हुए भारत सरकार से अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते से बाहर आने की मांग की। साथ ही बीज संशोधन विधेयक और बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग की गई। उनका कहना था कि ये कृषि क्षेत्र के लिए बेहद नुकसानदायक हैं।
वरिष्ठ एसकेएम नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार किसानों के हितों और देश की खाद्य सुरक्षा को अमेरिका को सौंप रही है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे अपनी आजीविका और स्वतंत्रता संग्राम से हासिल संप्रभुता पर मंडरा रहे साम्राज्यवादी खतरे के खिलाफ संघर्ष तेज करें।
अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने बिजली के निजीकरण और बीज क्षेत्र को कॉर्पोरेट के हवाले करने की नीति की आलोचना की। उन्होंने अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों में निर्दोष लोगों की हत्या की निंदा की तथा इस मुद्दे पर मोदी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।
जोगेंद्र सिंह नैन ने मानसून के दौरान आई अभूतपूर्व बाढ़ से किसानों की खड़ी फसलों को हुए भारी नुकसान के प्रति सरकार के असंवेदनशील रवैये की कड़ी आलोचना की।
एसकेएम ने मुख्यमंत्री को चेतावनी दी कि यदि किसानों के ज्वलंत मुद्दों पर बातचीत के लिए समय नहीं दिया गया तो पूरे प्रदेश में मंत्रियों के बहिष्कार का आह्वान किया जा सकता है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा दर्ज किए जा रहे पुलिस मामलों की धमकियों से एसकेएम डरने वाला नहीं है।
मनरेगा को बहाल करने, लेबर कोड्स वापस लेने की मांग
किसानों ने मनरेगा को बहाल करने और चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को वापस लेने की भी मांग की। रैली में मास्टर बलबीर सिंह, कंवरजीत सिंह, सुखदेव जम्मू, रतन मान, सूबेदार रणबीर, विकास सीसर, सुखविंदर सिंह, मास्टर सतीश, तेजेंद्र थिंद, हंस राज राणा, कैप्टन रणधीर चहल, सुरजीत सिंह और सुमित सहित कई नेता मौजूद रहे।
किसानों ने उपायुक्त को ज्ञापन लेने के लिए रैली में बुलाने की मांग की। उपायुक्त मंच पर पहुंचे और आश्वासन दिया कि किसानों की मांगों को राज्य सरकार तक विचारार्थ भेजा जाएगा।
