संयुक्त किसान मोर्चा 16 जनवरी को अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’में करेगा व्यापक भागीदारी
संयुक्त किसान मोर्चा की गत 11 जनवरी को नई दिल्ली स्थित एच.के.एस. सुरजीत भवन में संपन्न राष्ट्रीय परिषद की बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर एनडीए सरकार को अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर कर कृषि और डेयरी क्षेत्रों को खोलने के खिलाफ चेतावनी दी गई।
मोर्चा द्वारा जारी एक प्रेस बयान में कहा गया है कि बैठक में लिए गए एक प्रस्ताव में किसानों और आम जनता से आह्वान किया गया कि वे अमेरिकी साम्राज्यवाद और कॉर्पोरेट ताकतों के दबाव में देश के हितों से समझौता करने के खिलाफ एकजुट हों। यह भी घोषित किया गया कि किसान 2020–21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन से भी बड़े, व्यापक और उग्र संघर्ष छेड़ेंगे।
बैठक में हन्नान मोल्ला ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। अध्यक्षमंडल में जोगिंदर सिंह उगराहां, राजन ख्शीरसागर, पी. कृष्णप्रसाद, प्रेम सिंह गहलावत, आशीष मित्तल, जोगिंदर सिंह नैने, सिराजुद्दीन खेड़ी, दलजीत सिंह और अशोक बैठा शामिल थे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 16 जनवरी, ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ के मौके पर किसानों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’
बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा ने आह्वान किया कि यदि एनडीए सरकार आगामी बजट सत्र में विद्युत विधेयक 2025 को पारित करती है तो किसान और मजदूर पूरे देश में तत्काल उग्र विरोध कार्रवाइयाँ संगठित करें।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 16 जनवरी, ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ पर किसानों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके तहत जिला स्तर पर प्रदर्शन, ब्लॉक/ग्राम स्तर पर जनसभाएँ तथा नए वर्ष की यह शपथ ली जाएगी—“विजय तक निरंतर, संयुक्त, अखिल भारतीय संघर्ष का निर्माण”—और इसके साथ विद्युत विधेयक 2025, वीबी ग्रामग अधिनियम 2025, बीज विधेयक 2025 तथा चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने की मांग उठाई जाएगी।
मांग-पत्र में दीर्घकालिक मांगें भी शामिल हैं—सभी फसलों के लिए एमएसपी @ C2+50% के कानून का निर्माण और सुनिश्चित खरीद; किसानों को कर्ज के जाल से मुक्त करने तथा किसान आत्महत्याओं को समाप्त करने के लिए समग्र ऋण माफी; भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (LARR Act 2013) का क्रियान्वयन; तथा जीएसटी अधिनियम में संशोधन कर कराधान शक्तियों को बहाल करते हुए राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा—वर्तमान 31% के स्थान पर सेस व सरचार्ज सहित विभाज्य पूल का 60% हिस्सा राज्यों को दिया जाए।
बैठक ने 26 जनवरी 2026, गणतंत्र दिवस को उपर्युक्त सभी मांगों के समर्थन में मनाने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध का अधिकार और यूएपीए सहित दमनकारी कानूनों को निरस्त करने के संवैधानिक अधिकारों की पुष्टि करने का निर्णय लिया। लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रस्ताव में एनडीए सरकार से मांग की गई कि वह तुरंत सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करे, जिनमें लद्दाख के सोनम वांगचुक तथा वे सभी शामिल हैं जो पाँच वर्षों से अधिक समय से बिना मुकदमे के जेलों में बंद हैं। राज्य नेतृत्व आधिकारिक गणतंत्र दिवस परेड को प्रभावित किए बिना, दोपहर में ‘जन मार्च’ के रूप में विरोध कार्यक्रम तय करेगा तथा मजदूरों, कृषि एवं ग्रामीण मजदूरों के साथ समन्वय कर ट्रैक्टर परेड, वाहन रैलियाँ, मोटरसाइकिल रैलियाँ और विशाल प्रदर्शन आयोजित करेगा।
12 फरवरी को आम हड़ताल
बैठक ने 12 फरवरी 2026 की आम हड़ताल के आह्वान का समर्थन किया, जिसमें चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने की मांग है। किसानों से उस दिन सड़कों पर उतरकर विशाल प्रदर्शन संगठित करने का आह्वान किया गया। विस्तृत कार्यक्रम राज्यों में तय किए जाएंगे। बैठक ने मजदूरों के प्रति बिना शर्त समर्थन की घोषणा की और मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
एसकेएम 19 जनवरी को लखीमपुर खीरी में एक जनसभा आयोजित करेगा।
बैठक में हन्नान मोल्ला ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। अध्यक्षमंडल में जोगिंदर सिंह उगराहां, राजन ख्शीरसागर, पी. कृष्णप्रसाद, प्रेम सिंह गहलावत, आशीष मित्तल, जोगिंदर सिंह नैने, सिराजुद्दीन खेड़ी, दलजीत सिंह और अशोक बैठा शामिल थे।
बैठक ने एसकेएम की सभी सदस्य संगठनों और राज्य समन्वय समितियों से आह्वान किया कि वे ब्लॉक और ग्राम स्तर पर व्यापक संघर्ष और अभियान चलाएँ, मेहनतकश जनता पर हो रहे कॉर्पोरेट हमलों की श्रृंखला को समझाएँ और दृढ़ संकल्प के साथ लंबे समय तक चलने वाले, विशाल अखिल भारतीय संघर्षों की तैयारी करें। अगली राष्ट्रीय परिषद की बैठक 24 फरवरी को हरियाणा में होगी और यदि एनडीए सरकार मजदूरों, किसानों तथा कृषि व ग्रामीण मजदूरों के नेतृत्व के साथ वास्तविक मांगों पर चर्चा शुरू करने को तैयार नहीं होती है, तो ठोस कार्ययोजना तय की जाएगी।
बैठक में अमेरिका के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर कर कृषि व डेयरी क्षेत्रों को खोलने के खिलाफ एसकेएम की चेतावनी*
*यदि एनडीए सरकार संसद के बजट सत्र में विद्युत विधेयक 2025 पारित करती है तो अगले ही दिन तत्काल विरोध कार्रवाइयों का आह्वान*
*विद्युत विधेयक 2025, वीबी ग्रामग अधिनियम 2025, बीज विधेयक 2025 तथा चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने की मांग*
*16 जनवरी को ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’—विजय तक निरंतर, संयुक्त, अखिल भारतीय संघर्ष खड़ा करने की शपथ*
*26 जनवरी को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा हेतु ‘जन मार्च’*
*12 फरवरी को आम हड़ताल के समर्थन में विशाल प्रदर्शन*
*19 जनवरी को लखीमपुर खीरी में जनसभा*
