ट्रंप के पागलपन का सामूहिक प्रतिरोध यूरोप से ही शुरू होगा
अरुण माहेश्वरी
ग्रीनलैंड को हड़प लेने की पर ट्रंप की धमकियों और उसका समर्थन करने वाले यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ़ की घोषणा पर डेनमार्क, नार्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड्स, फिनलैंड की सरकारों ने जो बयान दिए हैं, उनसे जो साझा वार्ता निकलती है, वह कुछ इस प्रकार है:
उन्होंने साफ शब्दों में कहा हैं कि ग्रीनलैंड डेनमार्क के राज्य का अभिन्न हिस्सा है। ग्रीनलैंड का भविष्य और उसकी दिशा तय करने का अधिकार ग्रीनलैंड के लोगों और डेनमार्क का है—किसी बाहरी दबाव, धमकी या शक्ति-प्रदर्शन से नहीं।
डेनमार्क को इस विषय पर अपने सहयोगी देशों का व्यापक और दृढ़ समर्थन प्राप्त है। हम सभी एक स्वर में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ पूर्ण एकजुटता में खड़े हैं।
हम अपने सहयोगियों के बीच किसी भी प्रकार की धमकी या ब्लैकमेल को स्वीकार नहीं करते। मित्र देशों के संबंधों में ऐसी भाषा और नीति का कोई स्थान नहीं हो सकता है।
राजनीतिक दबाव बनाने या सामूहिक सुरक्षा जैसे प्रश्नों पर दंडात्मक हथियार की तरह करने के लिए टैरिफ़ का उपयोग नहीं किया जा सकता। सहयोगियों के बीच मतभेद हों तो उन्हें संवाद, परामर्श और सम्मानजनक कूटनीति के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए, दबाव और दंड से नहीं।
हम आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को साझा हित मानते हैं और उसे मजबूत करने के लिए परस्पर सहयोग जारी रखेंगे। साथ ही, हम यह भी दोहराते हैं कि किसी भी प्रकार की धमकी या अनुचित दबाव एक खतरनाक परिस्थिति तैयार कर सकता है ।
हम अपने मूल्यों और अपने साझा हितों के आधार पर एकजुट रहेंगे, और उचित समय पर, अपने साझेदारों के साथ समन्वय रखते हुए जरूरी और उपयुक्त प्रतिक्रिया देंगे ।
हमारा मानना है कि यदि ये आठों देश अपने शब्दों के प्रति ईमानदार रहते हैं तो ग्रीनलैंड पर ट्रंप की योजना का औंधे मुंह गिरना तय है । अरुण माहेश्वरी के फेसबुक वॉल से साभार

लेखक – अरुण माहेश्वरी
