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मनजीत मानवी की कविता – बारूद और बस्ता

कविता बारूद और बस्ता मनजीत मानवी     ईरान की जमीं पर – अट्ठाईस फरवरी की सुबह सैकड़ों लड़कियाँ कंधे…