सावित्रीबाई फुले: एक युग प्रवर्तक शिक्षिका और समाज सुधारक
हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति सिरसा ने मनाया साबित्री बाई फुले की जन्म जयंत
सिरसा। हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति सिरसा द्वारा पटवार भवन में माता सावित्रीबाई फुले जी की जन्म जयंती के पावन अवसर रविवार को एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माता सावित्रीबाई फुले चौक (निकट महिला थाना सिरसा) पर हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति के सदस्यों द्वारा माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। इसके उपरांत विचार गोष्ठी पर शुरुआत हुई। अध्यक्षीय मंडल में प्रोफेसर उमेद सिंह, डॉ निर्मल सिंह, श्रीमती दिव्या सांवरिया ने शिरकत की एवं सचिव ललित सोलंकी मौजूद सभी शहरवासियों, प्रबुद्ध नागरिकों एवं सामाजिक सरोकार रखने वाले साथियों का विधिवत स्वागत किया।
विचार गोष्ठी की शुरुआत कुलदीप शिकरा ने बेटियों को समर्पित स्वरचित पंजाबी गीत से करते हुए सावित्रीबाई फुले को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर साथी अध्यापक एवं विद्यालय अध्यापक संघ के पदाधिकारी वीर सिंह ने विस्तार से सावित्रीबाई के जीवनकाल में संघर्षों एवं के महिलाओं के लिए समर्पित कार्यों को बताया।

डॉ विनोद पिलनी ने बताया कि वे खुद भी माता सावित्रीबाई फुले से जीवन से प्रेरित हैं और उनका जीवन जी रहे हैं। उन्होंने अपने स्कूल में माता सावित्रीबाई फुले के नाम पर एक पुस्तकालय की स्थापना की। उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फुले का आंदोलन जातिवाद के खिलाफ, दलितों के उत्थान व महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए था। सावित्रीबाई फुले के साथ ज्योतिबा फुले, उस्मान शेख एवं फातिमा शेख के संघर्षों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
अध्यक्षीय मंडल में शामिल दिव्या सांवरिया ने सावित्रीबाई फुले को अपनी कविता के माध्यम से याद किया। यह भी बताया कि वे भी शिक्षा को बेहतर बनाने के अपने स्तर पर छोटे बच्चे बच्चियों को निशुल्क पढ़ाने का कार्य करती रहती हैं।
वरिष्ठ साथी गुरबख्श सिंह मोंगा ने इस अवसर पर माता सावित्रीबाई फुले के संघर्षों एवं योगदान पर बोलते हुए बताया कि उनका संघर्ष साम्राज्यवादी ताकतों के साथ था । दलित उत्थान, महिलाओं की माली हालात को बेहतर करने जैसे मुद्दे मुख्य थे।
डॉ निर्मल सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में इस कहा कि हमारे महापुरूषों ने चाहे ज्योतिबा फुले हो चाहे सावित्रीबाई फुले हो या फातिमा शेख हो सभी ने दोहरी लड़ाई लड़ी है एक लड़ाई अंग्रेजों के खिलाफ थी तो दूसरी समाज के उसे वर्ग से जो दलितों महिलाओं एवं अन्य वर्ग को शोषित करने में लगा हुआ था।
इस अवसर पर प्रोफेसर उमेद सिंह ने सभी का धन्यवाद करते हुए सभी को वर्तमान परिदृश्य में सूचना क्रांति के दौर में जागरूक रहने की बात की तभी वैज्ञानिक चेतना समाज मे पहुंच पाएगी और भ्रामक जानकारी से बचने की सलाह दी। महिला सशक्तिकरण को मजबूत करना ही माता सावित्रीबाई फुले के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
विचार गोष्ठी का मंच संचालन समितिके प्रेस सेक्रेटरी आर सी मौर्य ने किया। कार्यक्रम में राजेंद्र गोदारा, डॉ . काशिफ किदवई, भारत भूषण, दीपक सांवरिया, सुधीर कुमार, वरिष्ठ कर्मचारी नेता मदनलाल खोथ, संदीप कुमार, भूप सिंह सहित अनेकों प्रबुद्ध नागरिकों ने कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यक्रम में महिलाओ की भागीदारी भी रही।

इस मौके पर हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति की पिछली बैठक में प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद गौरी की अगुआई में सांगठनिक मजबूती के लिए कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की जानकारी भी दी गई।
ज्ञान विज्ञान समिति सिरसा की कमेटी को मंजूरी
इस मौके पर प्रोफेसर उमेद एवं कुलवंत सिंह को संरक्षक मंडल एवं डॉ विनोद पिलनी को हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति सिरसा के प्रधान पद की जिम्मवारी सर्वसम्मति से दी गई। साथ ही वरिष्ठ साथी भारत भूषण, कृपा शंकर त्रिपाठी, चंचल रानी एडवोकेट एवं राजेंद्र सिंह भरोखा को उपप्रधान, अनीश कुमार को संगठन सचिव. सहायक सचिव के किए दिव्या सांवरिया, सह सचिव के लिए डॉ हर रत्न गांधी के नामों पर सभा में अपनी सहमति दी।
यह विदित हो कि 7 दिसंबर की बैठक में तीन सदस्यों सचिव ललित सोलंकी, कोषाध्यक्ष सुशील पुरी एवं प्रेस सचिव के लिए आर सी मौर्य के नामों की सभा ने अपनी सहमति दे दी थी।
हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति राज्य इकाई के महासचिव सुरेश कुमार ने इस अवसर पर सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने माता सावित्रीबाई फुले के संघर्षों को याद किया । उन्होंने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने एवं किए जाने वाले कार्यों का वार्षिक कैलेंडर तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने यह बताया कि हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति एक जन जन का आंदोलन है और समाज मे वैज्ञानिक चेतना को लाना है। सभी पदाधिकारियों से आगामी मीटिंग एवं एवं अन्य मुद्दों पर बातचीत की।
