गीत
सब उत्सव हुड़दंग
रमेश जोशी
उत्सव हुड़दंग रंग नंग
सब उत्सव हुड़दंग भगत जी
पड़ी कुएं में भंग भगत जी
शर्ट उतारो चिढ़ जाता है
खुद है नंग धड़ंग भगत जी
दिन में दस-दस रंग बदलता
कोई नहीं सुरंग भगत जी
उछल उछलकर ताली पीटें
सारे नकटे नंग भगत जी
जैसा मौका वैसा चोला
सारे गिरगिट दंग भगत जी
चोरी का मतला पढ़ता है
मगर काफिये तंग भगत जी
