ओमसिंह अशफ़ाक की कविता: हाईटेक जंग 

युद्ध के विरुद्ध युद्ध – 3

यह कविता भी 2003 में लिखी गई थी। अमेरिका ने तमाम बहाने बनाकर इराक पर हमला किया था। दुनिया को बेवकूफ बनाने के लिए आज के जंगखोरों का एक तर्क यह होता है कि हमारे पास ऐसे अत्याधुनिक हथियार हैं जिनसे “कोलेटरल डैमेज”(अवांछित मानवीय क्षति) के खतरे नहीं रह गये हैं? युद्ध का औचित्य बताने का ये एक बेहुदा और आधारहीन तर्क है। इस कविता के जरिए कवि ने इसी “निराधार- तर्क” को ही नंगा किया है। 

हाईटेक जंग

ओमसिंह अशफ़ाक

 

फटते बम

हिलती धरती

धम्म-धम्म..

भभकी-आग..

मनहूस धुआं..

आबाद मकान..

भागम-भाग..

विदारक चित्कार…

 

दिन निकला…

हमला रुका…

धुआं छटा..

कुछ पर्दा हटा-

मृतक नौ…

ज़ख्मी एक

ये जंग है

‘हाईटेक’..?

 

एंबुलेंस..

अस्पताल..

“नो ऑप्शन..

इमीडिएट एंप्यूटेशन..

बर्न-सिक्सटी-परसैंट..”

 

मगर,

डॉक्टर?

बच्चा है…

बारह साल का

कटेगी कैसे (जिंदगी)

बिन बाजुओं के?..

 

डॉक्टर साहब

ला-जवाब..

बिजली गुल..

वार्ड फुल..

सायरनों की हुंकार..

हताहतों के अंबार…

 

नो मेडिसिन..

नो ‘ओटी’..(ऑपरेशन थिएटर) पगलाए डॉक्टर..

ओ माय गॉड..

ये भी होना था?

सब कुछ ‘एट-स्टेक’

कैसी ये जंग

काहे की हाईटेक..!

………….

कवि की बात : 

 

(संदर्भ: 12वर्षीय बच्चा अली इस्माइल जिसके माता-पिता और भाई-बहन सहित परिवार के 12लोग इराक पर हुए अमरीकी हमले(2003) में मारे गए थे, और खुद अली इस्माइल को अपने दोनों हाथ खोने पड़े थे।..

अली इस्माइल अगर आज जिन्दा हुआ तो 35 साल की उम्र का होगा।पता नहीं गत-जीवन के उसके 23साल कैसे बीते होंगे? पाठक खुद ही कल्पना कर सकते हैं। ओमसिंह अशफ़ाक

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