ओमप्रकाश कादयान – जनहित में संघर्ष अभी जारी है

हरियाणाः जूझते जुझारू लोग – 79

ओमप्रकाश कादयान – जनहित में संघर्ष अभी जारी है

सत्यपाल सिवाच

जब कोई सामूहिक लड़ाई में उतरता है तो फायदा सामूहिक होता है लेकिन नुकसान व्यक्तिगत स्तर पर उठाना पड़ता है। ओमप्रकाश कादयाना के साथ भी यही हुआ। वह जब सामूहिकया (यूनियन) की बात आती थी तो उसके लिए सब कुछ करने को तैयार हो जाते थे, अफसरों किसी को अपमानित करें यह बर्दाश्त नहीं कर पाते थे और आक्रामक हो जाते थे। इसी चक्कर में उन्हें कई बार तबादले के रूप में उत्पीड़न झेलना पड़ा। जनहित में अभी भी 72 साल की उम्र में संघर्ष जारी है।
ओमप्रकाश कादयान का जन्म 01 दिसंबर 1954 को तत्कालीन रोहतक जिले (अब झज्जर) के गांव दूबलधन में श्रीमती मनभरी और श्री लालचंद के घर हुआ। वे तीन भाई और तीन बहनें हैं। उन्होंने दसवीं परीक्षा 1972 गांव के सरकारी स्कूल से पास की। प्रेप में जाट कॉलेज रोहतक में प्रवेश ले लिया। अगले साल तक गांव में कॉलेज खुल गया था और वहीं से बी.ए. प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षा पास की तथा रोहतक बी.ए. फाइनल 1975 में नेकीराम शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज रोहतक से उत्तीर्ण की। वे सन् 1982 में नियमित आधार पर फॉरेस्टर नियुक्त हो गए। इसके बाद वे सन् 2009 में डिप्टी रेंजर पदोन्नत हो गए। इसी पद से 31 दिसंबर 2012 को रिटायर हो गए।
देरी से पदोन्नति का एक कारण वरिष्ठता को लेकर विवाद होना भी रहा। इसके लिए कई बार संघर्ष भी हुआ। उस समय वह रोहतक में आ गया थे। परमजीत सिंह सांगवान रेंज ऑफिसर थे। उन दिनों पुलिस पैटर्न पर वेतन के लिए संघर्ष चल रहा था। उस विरोध कार्यवाही में हिस्सा लेने वालों में कादयान का नाम भी आ गया और अम्बाला में बदली के आदेश आ गए, जहाँ उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। बात मंत्री तक पहुंच गई। उनके हस्तक्षेप से बाद कई साल बाद झज्जर में बदली हुई, जहाँ अलग-अलग जगहों पर लम्बे समय तक रहे।
इसी संघर्ष से यूनियन में शुरुआत हुई थी। बाद में दो बार राज्य के उपप्रधान और 2004 में प्रधान रहे। जिला स्तर सर्वकर्मचारी संघ में भी उपप्रधान रहे। जब वे यूनियन में उपाध्यक्ष थे तो किसी मामले में चीफ से महासचिव जीवन सिंह की झड़प हो गई। उन्होंने डेलिगेशन को बाहर निकल जाने के लिए कहा तो ओमप्रकाश कादयान ने आक्रामक रुख अपनाया जब जाकर चीफ बैकफुट पर आए।
उत्पीड़न के तहत ट्रांसफर तो बहुत बार हुए। जेल में केवल एक दिन रहे। सन् 1993 के आन्दोलन में बर्खास्त किया गया था। समझौते के बाद बिना किसी नुकसान के बहाली हो गई। सन् 1997 की पालिका हड़ताल में निलंबित किया गया था। पी पी सी एफ का बहिष्कार करने पर उसे रोहतक से अम्बाला ट्रांसफर किया गया। सेवानिवृत्ति के बाद वे रिटायर्ड कर्मचारी संघ में सक्रिय हैं और लगातार तीसरी बार रोहतक जिले के सचिव हैं।
ओमप्रकाश कादयान की शादी सन् 1984 श्रीमती कृष्णा से हुई। एक बेटा और दो बेटियां हैं। तीनों विवाहित हैं। बड़ी बेटी टीचर हैं। तीसरी पीढ़ी में दो पोते हैं। (सौजन्य: ओमसिंह अशफ़ाक)

लेखक: सत्यपाल सिवाच

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