मुनेश त्यागी की कविता- क्रांति के अनेक काम 

कविता

क्रांति के अनेक काम

मुनेश त्यागी

क्रांति में किसी के हाथ में कलम होती है,

किसी के हाथ में किताब होती है,

किसी के हाथ में रंग और ब्रश होते हैं,

कोई कविता से लेख से अपनी बात कहता है,

किसी के हाथ में बंदूक होती है,

किसी की जबां पर कविता होती है,

किसी के हाथ में बेचने वाली किताबें होती हैं,

कोई ज्ञान और विवेक से क्रांति की रक्षा करता है।

कोई मजदूरों में काम करता है,

कोई किसानों में काम करता है,

कोई जन संगठन बनाने में क्रांतिकारी काम करता है,

कोई लोगों को शिक्षित और एकजुट करता है।

कोई क्रांति के लिए अखबार, पत्रिकायें, पुस्तकें छापता है,

कोई क्रांति की पुस्तकें, पत्रिका, अखबार बांटने का काम करता है,

कोई भाषण के जरिए अपना फर्ज निभाता है,

कोई क्रांतिकारी कविताएं गाकर क्रांति में अपना योगदान देता है।

कोई नाटक खेल कर अपनी बात कहता है,

कोई गरीबों को दवाई बांटकर क्रांति में अपनी जिम्मेदारी निभाता है,

कोई क्रांति के लिए अपनी पूरी जिंदगी देकर क्रांति की शमा जलाता है।

कोई होल टाइमर होता है,

कोई पार्ट टाइमर होता है,

कोई क्रांति के लिए मानसिक और बौद्धिक श्रम करता है,

कोई क्रांतिकारी बहस करके क्रांति को नए आयाम प्रदान करता है।

कोई क्रांतिकारी फिल्म बनाकर क्रांति के कारवां को आगे बढ़ाता है और कांति के दायरे को विस्तृत करता है,

कोई आर्थिक मदद करके क्रांति के कारवां को आगे बढ़ाता है,

कोई तन मन धन और मनसा वाचा कर्मणा क्रांति के अभियान को आगे बढ़ाता है।

कोई अंधविश्वास, धर्मांधता, श्रद्धांधता का विरोध करके वैज्ञानिक और धर्मनिरपेक्ष संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता है,

कोई ज्ञान विज्ञान तर्क और तथ्यों से क्रांति की तरफदारी करके क्रांति को ज्यादा से ज्यादा विस्तार देता है।

कोई जनविरोधी पूंजीवाद का विरोध करते हुए मानवतावादी समाजवादी संस्कृति के विचारों को रोपता है,

कोई अकेला आदमी क्रांति नहीं कर सकता,

एक सामूहिक और संगठित संग्राम ही आगे बढ़ाता है क्रांति के अभियान को,

केवल किसानों और मजदूरों की सरकार ही धरती पर उतारती है क्रांति के कार्यक्रम को।

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