कविता
कोण सकारात्मकता तय करते हैं!
मंजुल भारद्वाज
व्यक्ति को तरंग प्रभावित करती हैं
यह तरंग सृजित होती हैं
व्यक्ति की भावना
विचार,दृष्टि और जीवन मूल्यों से !
सजीव और निर्जीव दोनों
तरंग सृजित करते हैं
दोनों पर इसका प्रभाव पड़ता है!
प्रतिकूल और अनुकूल प्रभाव
दोनों के स्पर्श
अंतर्संबंध,कोण और
दृष्टि से तय होता है!
उद्देश्य और नज़रिया
कोण का निर्माण करते हैं
इसलिए व्यक्ति हो
निवास या कार्यस्थल
अनुकूल या प्रतिकूल प्रभाव
वहां निर्मित होने वाले
कोण तय करते हैं!
आवास,निवास,या भवन निर्माण प्रकिया में
सजीव – निर्जीव की तरंगों को
सकारात्मक दिशा देने के लिए
कोण का समन्वय अनिवार्य है!
तत्व,धातु,पत्थर,लकड़ी
सबके अंदर अणु प्रकिया
सतत क्रियाशील होती है
उनकी क्रियाशीलता को
पंचतत्व की क्रियाशीलता से
पंचतत्व से निर्मित व्यक्ति की
क्रियाशीलता से समन्वय
सकारात्मक तरंगों का मूल है!
