# Pratibimb Media > समाज का दर्पण ## Posts - [चीन में पुस्तक पढ़ने के प्रति दीवानगी](https://pratibimbmedia.com/the-craze-for-reading-books-in-china/): चीन में पुस्तक पढ़ने के प्रति दीवानगी चीन का पुस्तक उद्योग परंपरा और आधुनिकता के चौराहे पर खड़ा है, जिसमें तेजी से तकनीकी प्रगति के साथ-साथ समृद्ध साहित्यिक इतिहास विकसित हो रहा है। अपने लगातार बढ़ते मध्यम वर्ग और शहरीकरण से प्रेरित होकर, देश में ज्ञान और कहानी कहने की भूख बढ़ रही है। औसतन, चीनी बच्चे और किशोर प्रति वर्ष लगभग 11.1 मुद्रित और डिजिटल पुस्तकें पढ़ते हैं, जबकि वयस्क प्रति वर्ष लगभग 8.2 पुस्तकें पढ़ते हैं, जबकि एक दशक पहले यह संख्या 6.7 थी। पाठकों की पसंद विविध हैं। चीन की साहित्यिक निर्यात-आयात असमानता विभिन्न वस्तुओं के एक […] - [कुमारी शिल्पा “राजपूत” की कविता - जीवन की सच्चाई ](https://pratibimbmedia.com/a-poem-by-kumari-shilpa-rajput-the-truth-of-life/): कविता जीवन की सच्चाई कुमारी शिल्पा “राजपूत”   रोने से अगर दुख मिट जाते, सारे जग में रोना होता, आँसुओं की नदियों में फिर हर इक ग़म को धोना होता।   जीवन की राहों में लेकिन काँटे ही काँटे आए हैं, कौन यहाँ इस धरती पर सपनों के सब फूल पाए हैं?   जब-जब घिरती है अँधियारी, नव प्रभात का गीत रचती, टूटे मन को बल दे जाती, आत्मा को नव शक्ति देती।   दुख की घड़ियों में जी भर रो, मन का बोझ उतार लेना, सूखे आँसू, उठते कदम, नई उमंग से चल देना।   बड़े पुण्य से मानव […] - [मंजुल भारद्वाज की कविता- वो कौन हैं?](https://pratibimbmedia.com/a-poem-by-manjul-bhardwaj-who-are-they/):         कविता वो कौन हैं? – मंजुल भारद्वाज   हम कहां रहते हैं? कैसे रहते हैं? क्यों रहते हैं? इसका निर्णय कौन लेता है?   यह गांव को रौंदकर शहर कौन बसाता है?   वो कौन है जो घर को चारदीवारों में बदल देता है?   वो कौन है जो घर का अर्थ 1बेडरूम ,2 बेडरूम 3बेडरूम किचन हॉल बना देता है?   वो कौन है जो घर का नामकरण अपार्टमेंट,बिल्डिंग बंगला ,झोपड़पट्टी रख देता है ?   वो कौन है जो घर का सपना संजोते हैं ईंट पत्थर की चारदीवारी को ईएमआई पर खरीद लेते हैं […] - [राजकुमार कुम्भज की कविता-जिद है कोई](https://pratibimbmedia.com/a-poem-by-rajkumar-kumbhaj/): कविता ज़िद है कोई ( लल्नटॉप वाले सौरभ द्विवेदी के लिए ) राजकुमार कुम्भज   ज़िद है कोई तो है ज़रुरी ये ज़िद भी कि बची रहे ज़िद.   ज़िद बचाए रखने के लिए ज़रूरी है कि बचा रहे आदमी और आदमी का सोच-विचार भी जिसकी सच में कमी है बेहद आजकल.   ज़िद और सोच-विचार ही बनाते हैं आदमी को आदमी एक अलग आदमी —————- - [सत्तर साल की आयु में युवाओं सी सक्रियता - रामफल देशवाल](https://pratibimbmedia.com/at-the-age-of-seventy-he-has-the-energy-of-a-young-man-ramphal-deshwal/): हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-68 सत्तर साल की आयु में युवाओं सी सक्रियता – रामफल देशवाल करनाल जिले (अब पानीपत) के अटावला गांव में 02 जनवरी 1956 को रामफल का जन्म हुआ। उनके पिता जी चतर सिंह आर्मी में थे और माँ सरतोदेवी घर संभालती थीं। यह एक किसान पृष्ठभूमि का साधारण परिवार था। रामफल चार भाई और दो बहनें हैं। रामफल ने 1971 में दसवीं कक्षा पास कर ली थी। उसके बाद 1975 में एस.डी.कॉलेज, पानीपत बी.ए. उत्तीर्ण किया। वे सन् 1981 में हरियाणा सिविल सेवाएं चयन बोर्ड के माध्यम से रोडवेज विभाग में कंडक्टर नियुक्त हो गए। वे 31 […] - [कोच्चि में भारतीय सांस्कृतिक कांग्रेस के कुछ पहलू](https://pratibimbmedia.com/some-aspects-of-the-indian-cultural-congress-in-kochi/): कोच्चि में भारतीय सांस्कृतिक कांग्रेस के कुछ पहलू  मालिनी भट्टाचार्य आज पूरे भारत में धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील सांस्कृतिक कार्यकर्ता अलगाव की भावना से जूझ रहे हैं। पहले प्रगतिशील लेखक एवं कलाकार संघ तथा आईपीटीए (इप्टा) जैसे अखिल भारतीय संगठन थे, जिन्होंने कुछ हद तक एक ऐसा मंच दिया था, जहाँ ऐसे सांस्कृतिक कार्यकर्ता एक साथ आ सकते थे और अपनी रचनात्मक गतिविधियों के बदलते संदर्भ पर अपने विचार साझा कर सकते थे। जब ये संगठन अखिल भारतीय स्तर पर खत्म हो गए, तो साहित्य अकादमी, संगीत नाटक अकादमी, नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा जैसे कुछ सरकारी सहायता प्राप्त, लेकिन स्वायत्त निकायों […] - [सांस्कृतिक संस्थाओं की स्वायत्तता को योजनाबद्ध ढंग से कमजोर किया जा रहा](https://pratibimbmedia.com/the-autonomy-of-cultural-institutions-is-being-systematically-undermined/): केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का सांस्कृतिक कांग्रेस का उद्घाटन भाषण सांस्कृतिक संस्थाओं की स्वायत्तता को योजनाबद्ध ढंग से कमजोर किया जा रहा केरल के मुख्यमंत्री कॉमरेड पिनराई विजयन ने दिनांक 20 से 22 दिसंबर 2025 को केरल में आयोजित सांस्कृतिक कांग्रेस का उद्घाटन किया उनके उद्घाटन भाषण का अविकल हिंदी अनुवाद (पूर्ण पाठ) प्रस्तुत है:- सम्मानित आयोजकगण, आदरणीय लेखक, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और प्रिय साथियो, जैसा कि आप जानते हैं, एक सांस्कृतिक कांग्रेस हमारे लिए कुछ नया है। हम विज्ञान कांग्रेस, इतिहास कांग्रेस और इसी तरह के अन्य मंचों से परिचित रहे हैं, लेकिन संस्कृति के क्षेत्र में इस प्रकार […] - [मनजीत सिंह की हरियाणवी रागनी- हाय रे सर्दी! हाय रे सर्दी!](https://pratibimbmedia.com/manjeet-singhs-haryanvi-folk-song-oh-the-cold-oh-the-cold/): मनजीत सिंह की हरियाणवी रागनी- हाय रे सर्दी! हाय रे सर्दी!   आओ रे लोगो, ध्यान लगाओ, सुन लो मेरी बात, सर्दी का टेम आवै सै, सब गर्म कपड़ा में हो दुभात।   सर्दी आवै, ठंड सतावै, बाहर मारै कोहरा, कपड़े लपेटे फिरैं सैं, गाम-गाम का छोरा। कुण सै कुण, ना पहचान, मुँह ढक्यां सैं सारे, देखण आला भी बोले—राम राम जी म्हारे।   हाय रे सर्दी! हाय रे सर्दी! सब नै घणी सुहाय रे सर्दी!   खरीफ कटगी, रबी बोई, हर्षायां सैं खेत, किसानां की मेहनत देखो, सोना उगलैं मेड़। बागां में फूल मुस्कावैं, जंगल बोलै तान, धरती मैया […] - [रंगमंच दर्शक को बदलाव का वाहक बनाएगा : मलय श्री हाशमी](https://pratibimbmedia.com/theatre-will-make-the-audience-agents-of-change-malay-shree-hashmi/): कोच्चि से भारतीय सांस्कृतिक कांग्रेस का संदेश: रंगमंच दर्शक को बदलाव का वाहक बनाएगा : मलय श्री हाशमी पिछले महीने 20 – 22 दिसम्बर  को कोच्चि में सम्पन्न हुई पहली भारतीय सांस्कृतिक कांग्रेस इंसानी आजादी और गरिमा, धर्मनिरपेक्षता एवं शांति-सदभाव का संदेश देते हुए सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। भारत के विभिन्न प्रांतो से पहुंचे 150 से ज्यादा डेलिगेटों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने इन तीन दिनों में कोच्चि के सुभाष बोस पार्क में तीस से ज्यादा बौद्धिक विमर्षों पर मंथन किया और इसके समानान्तर ललित कला भवन में अलग.अलग राज्यों के प्रतिनिधियों द्वारा स्थानीय भाषाओं में गीत, कहानी, आलेख आदि का वाचन […] - [अकाल तख्त ने पंजाब के सीएम मान को 15 जनवरी को किया तलब](https://pratibimbmedia.com/the-akal-takht-has-summoned-punjab-cm-mann-on-january-15/): अकाल तख्त ने पंजाब के सीएम मान को 15 जनवरी को किया तलब अमृतसर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने 15 जनवरी को ‘श्री अकाल तख्त साहिब’ के सामने निजी तौर से पेश होने के लिए कहा है। जत्थेदार गड़गज ने कहा कि सीएम भगवंत मान सिखी मान-मर्यादा व सिद्धांतों के विरूद्ध टिप्पणी और कृत्य कर रहे हैं, जिससे सिख श्रद्धा-भावनाओं को ठेस पहुंची है। जत्थेदार ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति का ऐसा व्यवहार “सत्ता का घमंड” दिखाता है और ऐसा कर सर्वोच्च अकाल तख्त साहिब को चुनौती […] - [सावित्रीबाई फुले: एक युगप्रवर्तक शिक्षिका और समाज सुधारक ](https://pratibimbmedia.com/savitribai-phule-a-pioneering-educator-and-social-reformer/): सावित्रीबाई फुले: एक युग प्रवर्तक शिक्षिका और समाज सुधारक हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति सिरसा ने मनाया साबित्री बाई फुले की जन्म जयंत सिरसा। हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति सिरसा द्वारा पटवार भवन में माता सावित्रीबाई फुले जी की जन्म जयंती के पावन अवसर रविवार को एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माता सावित्रीबाई फुले चौक (निकट महिला थाना सिरसा) पर हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति के सदस्यों द्वारा माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। इसके उपरांत विचार गोष्ठी पर शुरुआत हुई। अध्यक्षीय मंडल में प्रोफेसर उमेद सिंह, डॉ निर्मल सिंह, श्रीमती दिव्या सांवरिया ने शिरकत की एवं सचिव ललित […] - [मंजुल भारद्वाज की कविता - कुर्बानी की राह अकेली होती है](https://pratibimbmedia.com/manjul-bhardwajs-poem-the-path-of-sacrifice-is-a-lonely-one/): कविता कुर्बानी की राह अकेली होती है मंजुल भारद्वाज   कुर्बानी की राह अकेली होती है भोग – प्रसाद की राह में भारी भीड़ लंबी कतार में सदियों से दिन रात रेंगती है !   हाकिम के आगे हाथ पसार भीख से पेट भरती है हाथों की मुठ्ठी बना लुटेरे से अपना हक नहीं मांगती !   सदियों तक इंतज़ार करती है कोई आएगा कुर्बानी के पथ पर अपनी कुर्बानी से इस भीड़ को गुलामी से आज़ाद करायेगा !   युगों युगों से दासता के चक्रव्यूह को भेदता कोई इंकलाबी सूर्य की मानिंद रौशन करता है अंधी गह्वर को सवेरे […] - [वैश्विक जगत पर सिनेमा और कला–संस्कृति : 2025 के निर्णायक रुझान ](https://pratibimbmedia.com/cinema-and-arts-and-culture-in-the-global-landscape-key-trends-for-2025/): वैश्विक जगत पर सिनेमा और कला–संस्कृति : 2025 के निर्णायक रुझान राम आह्लाद चौधरी   कला का विकास किसी निर्वात में नहीं होता। चाहे यह प्रक्रिया कितनी ही विरोधाभासी, असमान और जटिल क्यों न हो, कला की दिशा अंततः विश्व की सामाजिक–आर्थिक गति से निर्धारित होती है। 2025 में, जब वैश्विक स्तर पर साम्राज्यवादी आक्रामकता और हिंसा नए शिखरों तक पहुँची, और लगभग हर पूँजीवादी सरकार की नीतियों के विरुद्ध जन-विरोध उभरता दिखाई दिया, तब यह स्वाभाविक था कि इन तनावों की प्रतिध्वनि कला, फिल्म और टेलीविजन के क्षेत्र में भी स्पष्ट रूप से सुनाई दे। गाज़ा में चल रहे […] - [समझदार और समर्पित नेता ऋषिकान्त शर्मा](https://pratibimbmedia.com/a-wise-and-dedicated-leader-rishikant-sharma/): हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-67 समझदार और समर्पित नेता ऋषिकान्त शर्मा सत्यपाल सिवाच ऋषिकान्त शर्मा में संगठन के संस्कार और प्रभाव अपने पिता मदन गोपाल शास्त्री से ही प्राप्त हुए हैं। वट वृक्ष की छाया में पले-बढ़े परंतु  पिता जी की विरासत से अध्यापक नेता नहीं बने बल्कि स्वतंत्र एवं स्वनिर्मित व्यक्तित्व के चलते उपलब्धि हासिल की। उनका जन्म 9 सितम्बर 1956 को हिसार जिले के गांव पेटवाड़ में मदनगोपाल शास्त्री और श्रीमती शशि देवी के घर में हुआ। वे एक बहन और चार भाई हैं। ऋषिकांत भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनसे छोटे शिवकांत भिवानी में डॉक्टर हैं, उससे छोटे […] - [2025 में प्रकाशित पुस्तकों पर समीक्षात्मक गोष्ठियां आयोजित करेगा जलेस हरियाणा](https://pratibimbmedia.com/jls-haryana-will-organize-review-sessions-on-books-published-in-2025/): 2025 में प्रकाशित पुस्तकों पर समीक्षात्मक गोष्ठियां आयोजित करेगा जलेस हरियाणा जनवादी लेखक संघ, हरियाणा की एक ऑनलाइन बैठक गूगल मीट के माध्यम से सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता राज्य अध्यक्ष जयपाल ने की। जलेस केंद्र की ओर से राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव डॉ. संदीप मील विशेष रूप से शामिल हुए। बैठक का संचालन सरदानन्द राजली ने किया। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण जींद में प्रस्तावित बैठक को ऑनलाइन आयोजित किया गया। बैठक की शुरुआत में जनवादी कवि-लेखक रामधारी खटकड़ के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने कहा कि रामधारी खटकड़ जनपक्षधर साहित्य की एक प्रतिबद्ध […] - [अध्यापक आंदोलन के बहुत सुलझे, समर्पित और सहयोगी प्रकृति के लीडरः सुरजीत सिंह सैनी](https://pratibimbmedia.com/a-very-level-headed-dedicated-and-cooperative-leader-of-the-teachers-movement-surjit-singh-saini/): हरियाणाः जूझते जुझारू लोग – 66 अध्यापक आंदोलन के बहुत सुलझे, समर्पित और सहयोगी प्रकृति के लीडरः सुरजीत सिंह सैनी सत्यपाल सिवाच अचानक नायब सिंह बैंस, गादली से साथी सुरजीत के निधन का दुखदायी समाचार मिला तो बहुत पीड़ा हुई। उनका जन्म 10 दिसंबर 1955 को पंजाब के पटियाला जिले के रूड़की गांव में हुआ था। कुछ दिन बीमारी से संघर्ष करते हुए उन्होंने दिनांक 09 अगस्त 2024 को पंचकुला के अल्केमिस्ट अस्पताल में अंतिम सांस ली। लगभग तीन साल पहले (15.07.2021) बेटे अमनदीप सिंह की असामयिक मृत्यु के बाद वे अस्वस्थ रहने लगे थे। अब परिवार में धर्मपत्नी सन्तोष […] - [अपहरण नहीं, प्रोएक्टिव डेंटल डिप्लोमेसी](https://pratibimbmedia.com/not-kidnapping-but-proactive-dental-diplomacy/): बात बेबात अपहरण नहीं, प्रोएक्टिव डेंटल डिप्लोमेसी विजय शंकर  पांडेय   वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो ने 23 दिन पहले “दांत तोड़ दूंगा” क्या कहा, अमेरिका ने उसे दंत-चिकित्सा की अंतरराष्ट्रीय समस्या समझ लिया। नतीजा—US आर्मी ने ऐसा इलाज किया कि मरीज सीधे ऑपरेशन थिएटर से गायब! अमेरिका ने पहले ही मादुरो के सिर पर 450 करोड़ का इनाम रख रखा था। अब सिर भी चाहिए और दांत भी सुरक्षित। लोकतंत्र का ये नया पैकेज है—“बोलो कम, उड़ो ज्यादा।” मादुरो शायद समझ नहीं पाए कि दांतों की धमकी अब न्यूक्लियर हथियार से भी ज्यादा खतरनाक मानी जाती है। व्हाइट हाउस ने […] - [साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता प्रदीप कोकरे को काले कपड़े के कारण पुलिस ने मराठी साहित्य सम्मेलन में जाने से रोका](https://pratibimbmedia.com/pradeep-kokare-a-sahitya-akademi-award-winner-was-stopped-by-the-police-from-attending-the-marathi-literary-conference-because-he-was-wearing-black-clothes/): साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता प्रदीप कोकरे को काले कपड़े के कारण पुलिस ने मराठी साहित्य सम्मेलन में जाने से रोक नेताओं के लिए काले कपड़े पहनने वाला हर व्यक्ति उनका विरोधी होता है, खासतौर पर जो नेता किसी बड़े ओहदे पर होता है वह अपना विरोध बर्दाश्त नहीं कर पाता। नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद अफसरों में यह भय कुछ ज्यादा ही हावी हो गया है। जाता वाकया महाराष्ट्र का है। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक प्रदीप कोकरे ने शनिवार को पुणे में दावा किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति से जुड़े सुरक्षा […] - [प्राचीन अफ्रीकी चट्टानें हमारे नीले ग्रह पर जीवन की उग्र उत्पत्ति को दर्शाती हैं](https://pratibimbmedia.com/ancient-african-rocks-reveal-the-turbulent-origins-of-life-on-our-blue-planet/): प्राचीन अफ्रीकी चट्टानें हमारे नीले ग्रह पर जीवन की उग्र उत्पत्ति को दर्शाती हैं साइमन लैम्ब वेलिंगटन। आपने शायद नासा के रोवर द्वारा भेजी गई मंगल ग्रह की सतह की तस्वीरें देखी होंगी। अगर कोई ऐसी ‘टाइम मशीन’ होती जो पृथ्वी के प्राचीन भूवैज्ञानिक अतीत में घूम सकती, शायद उसके आरंभिक काल तक भी जा सकती और उसी तरह की गुणवत्ता वाली तस्वीरें वापस भेज पाती, तो क्या होता? यह कोई विज्ञान अवधारणा नहीं है। दुनिया के सुदूर हिस्सों में, भूवैज्ञानिकों ने पृथ्वी की अत्यंत प्राचीन सतह के छोटे-छोटे अवशेष खोजे हैं। मैं इस वैज्ञानिक प्रयास का हिस्सा रहा हूं, […] - [थरूर-दिग्विजय पर क्षण भर](https://pratibimbmedia.com/a-brief-moment-on-tharoor-and-digvijay/): थरूर-दिग्विजय पर क्षण भर अरुण माहेश्वरी कांग्रेस में शशि थरूर के बाद अब दिग्विजय सिंह । वैसे ही जैसे पहले सिंधिया और कई दूसरे रईसजादे ! राजनीति में कांग्रेस ऐतिहासिक रूप से जनतंत्र का सत्य रही है और बीजेपी सांप्रदायिक फासीवाद का असत्य । मानव प्रमाता का सत्य सभ्यता की ओर प्रगति से जुड़ा है और मनुष्य में असभ्यता की ओर पश्चगामिता असत्य का सूचक है । प्रमाता (subject) सत्य का धारक, परिवर्तन का वाहक होता है । इसके विपरीत जड़ मनुष्य यथास्थिति या पश्चगामिता की द्योतक । यही राजनीति के सत्य-असत्य का पैमाना है। भारत के प्राचीन दार्शनिक अभिनवगुप्त […] - [फ़ासीवाद का उभार और क़ानून तथा न्यायपालिका का सवाल पर कॉलिन गोंज़ाल्वेस का भाषण ](https://pratibimbmedia.com/colin-gonsalves-speech-on-the-rise-of-fascism-and-the-question-of-law-and-the-judiciary/): संगोष्ठी रिपोर्ट फ़ासीवाद का उभार और क़ानून तथा न्यायपालिका का सवाल पर कॉलिन गोंज़ाल्वेस का भाषण सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंज़ाल्वेस ने न्यायपालिका में फ़ासिस्ट घुसपैठ और लोकतंत्र पर हमले के बारे में बेहद विचारोत्तेजक और आंखें खोलने वाला वक्तव्य दिया है। फ़ासीवाद पर हैदराबाद में एक संगोष्ठी में अपने लगभग डेढ़ घंटे के वक्तव्य में कॉलिन ने अनेक तथ्यों और घटनाओं के ज़रिये पुरजोर ढंग से इस बात को रखा कि मोदी सरकार ने न्यायपालिका को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है और लोकतंत्र को अंदर से ख़त्म कर दिया है। तमाम लोकतांत्रिक संस्थाओं का बस […] - [मजदूर वर्ग के प्रतिबद्ध नायक - आर.सी. जग्गा](https://pratibimbmedia.com/a-committed-hero-of-the-working-class-r-c-jagga/): जूझते जुझारू लोग- 65 मजदूर वर्ग के प्रतिबद्ध नायक – आर.सी. जग्गा सत्यपाल सिवाच जब आर. सी. जग्गा सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा के अध्यक्ष बने तो मुझे उनके साथ महासचिव के रूप में काम करने का मौका मिला। उस दौर के अनेकों ऐसे अनुभव हैं जिन्हें मैं आज भी बहुमूल्य मानता हूँ। हमारी जोड़ी में बेहतरीन समतुल्य क्षमताएं थी। वे अच्छे वक्ता थे, मैं भी अपनी बात ठीक से कह सकता था। वे नपे-तुले शब्दों में लिख सकते थे, मुझे भी लिखने का अभ्यास था। वे राजनीतिक पेचीदगियों को जानते थे, मैं भी घटनाक्रम को मौके नजाकत के साथ पहचान सकता […] - [न्यूयार्क के मेयर ममदानी पर बीजेपी और वीएचपी क्यों हुए नाराज?](https://pratibimbmedia.com/why-are-the-bjp-and-vhp-angry-with-new-york-mayor-mamdani/): न्यूयार्क के मेयर ममदानी पर बीजेपी और वीएचपी क्यों हुए नाराज? न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी भारत का सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी और हिंदू वादी संगठन  विश्व हिंदू परिषद काफी नाराज हो गए हैं। ऐसा क्यो हुआ है यह हम आपको बताते हैं। दरअसल दिल्ली दंगे के मामले में जेल में बंद उमर खालिद को एक संदेश लिखकर न्यूयार्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा है कि हम सब आपके साथ हैं। उन्होंने संदेश में ‘‘कड़वाहट’’ को महत्व नहीं देने और स्वयं पर इसके हावी नहीं होने पर खालिद के विचारों को याद किया। इसी  के बाद भाजपा […] - [सावित्री बाई फुले:भारतीय सामाजिक और शैक्षिक रक्तहीन क्रांति की अग्रदूत](https://pratibimbmedia.com/savitribai-phule-a-pioneer-of-the-bloodless-social-and-educational-revolution-in-india/): जन्मदिवस (3 जनवरी) पर विशेष लेख: सावित्री बाई फुले:भारतीय सामाजिक और शैक्षिक रक्तहीन क्रांति की अग्रदूत डॉ. रामजीलाल पृष्ठभूमि: सावित्रीबाई फुले पहली महिला शिक्षिका, प्रधानाध्यापिका, मराठी भाषा की आदि कवयित्री, महिला समाज सुधारक, विदुषी, समतावादी विचारक, परोपकारी, व महिला सशक्तिकरण की महान पैरोकार थीं। वह महिलाओं, दलितों और उत्पीड़ित वर्गों के संघर्ष का प्रतीक हैं।  सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को पुणे से 50 किमी दूर नायगांव (वर्तमान में सतारा, जिला – महाराष्ट्र) में खंडोजी नैवेशे (पिता) और माता लक्ष्मीबाई (माता) माली जाति (अब सैनी) के परिवार में हुआ था। माली जाति को महाराष्ट्र का मूल निवासी माना जाता है। कुछ विद्वान इस बात की भी वकालत करते हैं कि सावित्रीबाई फुले महार जाति से थीं। यही कारण है कि आज […] - [चंडीगढ़ प्रेस क्लब ने पत्रकारों और यूट्यूबर्स पर एफआईआर की निंदा की](https://pratibimbmedia.com/the-chandigarh-press-club-has-condemned-the-filing-of-firs-against-journalists-and-youtubers/): चंडीगढ़ प्रेस क्लब ने पत्रकारों और यूट्यूबर्स पर एफआईआर की निंदा की कहा, पंजाब सरकार की कार्रवाई प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला, मामले वापस लेने की मांग चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रेस क्लब ने पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार द्वारा पत्रकारों और यूट्यूबर्स के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर की कड़ी निंदा करते हुए इसे प्रेस स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है। प्रेस क्लब का कहना है कि पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना उन्हें धमकाने, दबाव डालने का प्रयास लगता है। यहां जारी एक बयान में प्रेस क्लब ने कहा कि बठिंडा के कुछ पत्रकारों और लुधियाना […] - [श्रम मंत्रालय का प्रस्ताव- गिग वर्करों की सामाजिक सुरक्षा के लिए साल में 90 दिन का काम जरूरी](https://pratibimbmedia.com/ministry-of-labours-proposal-90-days-of-work-per-year-required-for-social-security-benefits-for-gig-workers/): श्रम मंत्रालय का प्रस्ताव– गिग वर्करों की सामाजिक सुरक्षा के लिए साल में 90 दिन का काम जरूरी   ऐप-आधारित डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर जैसे अस्थायी कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत बनाए नए मसौदा नियमों में यह प्रस्ताव रखा हाड़तोड़ मेहनत के बावजूद रोजगार छिन जाने के भय का सामना कर रहे गिग वर्करों के लिए केंद्र सरकार का मसौदा थोड़ी राहत की खबर है।  सरकार के नये प्रस्ताव से गिग वर्करों की सामाजिक सुरक्षा की आस बढ़ी है। श्रम मंत्रालय ने ऐप-आधारित डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर जैसे अस्थायी कामगारों (गिग वर्कर) […] - [शाकाहारी लोग चाहते हैं कि पौराणिक कथाएँ इतिहास बन जाएँ](https://pratibimbmedia.com/vegetarians-want-the-myths-to-become-history/): शाकाहारी लोग चाहते हैं कि पौराणिक कथाएँ इतिहास बन जाएं देवदत्त पटनायक   ये लाइनें आपस्तंभ धर्म-सूत्र से ली गई हैं। ये दिखाती हैं कि आधुनिक ब्राह्मण कैसे झूठ बोलते हैं जब वे कहते हैं कि ‘वर्ण’ कर्मों पर आधारित है, जन्म पर नहीं। सात्विक सनातनियों द्वारा बोले गए झूठ से सावधान रहें। “चार वर्ग हैं: ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। इनमें से, प्रत्येक पिछला वर्ग जन्म से अगले वर्ग से श्रेष्ठ है। जो शूद्र नहीं हैं और आपराधिक कर्मों के दोषी नहीं हैं, वे दीक्षा ले सकते हैं, वैदिक अध्ययन कर सकते हैं, और पवित्र अग्नि स्थापित कर सकते […] - [राजकुमार कुम्भज की दो कविताएं.](https://pratibimbmedia.com/two-poems-of-ramkumar-kumbhaj/): राजकुमार कुम्भज की दो कविताएं   ( एक ) सर्दियाँ पास हैं,तो वसंत भी दूर नहीं. ________ अभी ठिठुर रहे हैं शब्द अपने भीतर अपने ताप के लिए तंबू तने हैं घने-सूने जॅंगलों में पीने के पानी की कमी है चहुँओर सरकारें सेंक रही हैं मुर्गे और भेड़ें और तीतर वग़ैरह बकरियाँ मिमिया रही हैं समर्थन में चूहे लिख रहे हैं प्रशस्तियाँ और प्रार्थना-पत्र खेतों में लहलहा रहा है अकाल जैसा ही कुछ-कुछ नालियों में विचार और व्यवहारिकताऍं सभी दुबके हैं अभी ओढ़कर कंबल जाग रही हैं, झाँक रही हैं बहते जल में झिलमिल-झिलमिल गिलहरियाँ ,तितलियाँ और चींटियाँ शेरों को, […] - [साहसी, बहादुर और कर्तव्यनिष्ठ नेत्री बिमला यादव](https://pratibimbmedia.com/a-courageous-brave-and-dedicated-leader-bimla-yadav/): हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-64 साहसी, बहादुर और कर्तव्यनिष्ठ नेत्री बिमला यादव सत्यपाल सिवाच   बिमला यादव अध्यापक और कर्मचारी आन्दोलन की ऐसी प्रतिबद्ध नेत्री रही हैं जो एक इंसान, एक शिक्षक, संगठन की कार्यकर्ता और अपने साथियों को भी परिवार जैसी संवेदनशीलता से देखती हैं। मैं उन्हें 1985-86 में जानने लगा था और तब से अब तक उनके प्रति सम्मान भाव बढ़ता ही गया है। वे अपने अध्यापन काल में छात्रों से अपनी संतान की तरह ही स्नेह रखती और सहकर्मी शिक्षकों से बहन-भाई सा भरोसा और सहयोग करतीं। तीन साल पहले नारनौल में पुराने समय शिक्षक मिले जो कभी […] - [जयपाल की कविता- उनका नया साल](https://pratibimbmedia.com/jayapals-poem-her-new-year/):  कविता- उनका नया साल जयपाल 1   जिनकी छाती पर शताब्दियों के दर्द का कैलेंडर लटका है उनके माथे पर नया साल लिखने से क्या होगा !   2   उनके लिए साल नया हो या पुराना ईश्वर की तरह होता है जो कहीं दिखाई नहीं देता   3   साल के पहले ही दिन नंगे पैर भीख मांगता बच्चा नये साल में प्रवेश कर रहा है नंगे पैर ही उसे पार करना है नए साल का जश्न   4   बच्चा देखता है नये साल का कैलेंडर पेट दबाकर मां देखती है पिछले साल का कैलेंडर आंसू छिपाकर   […] - [भारत में बढ़ता कर्ज़ और किसानों की आत्महत्याएँ: एक गंभीर समस्या और प्रस्तावित समाधान](https://pratibimbmedia.com/rising-debt-and-farmer-suicides-in-india-a-serious-problem-and-proposed-solutions/): भारत में बढ़ता कर्ज़ और किसानों की आत्महत्याएँ: एक गंभीर समस्या और प्रस्तावित समाधान डॉ. रामजीलाल   पृष्ठभूमि: भारत गाँवों का देश है. महात्मा गांधी के अनुसार, भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है. कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. लगभग 1.44 अरब लोगों में से, लगभग 50% कृषि और संबंधित गतिविधियों में लगे हुए हैं. भारतीय किसान और खेतिहर मजदूर भारत की खाद्य सुरक्षा, जीडीपी और खाद्यान्न निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. यही कारण है कि किसानों और खेतिहर मजदूरों को भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव और देश के लिए ‘अन्नदाता’ माना जाता है. भारतीय कृषि, किसानों और खेतिहर मजदूरों से संबंधित कई समस्याएँ हैं. हालाँकि, इनमें सबसे गंभीर समस्या पीढ़ी दर […] - [ भारत विभाजन की त्रासदी को जिया ऋत्विक घटक ने अपनी फिल्मों में](https://pratibimbmedia.com/ritwik-ghatak-depicted-the-tragedy-of-the-partition-of-india-in-his-films/):  भारत विभाजन की त्रासदी को जिया ऋत्विक घटक ने अपनी फिल्मों में पलाश विश्वास एक 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली। देश के विभाजन की कीमत पर यह आजादी मिली। रातोंरात अखंड भारत दो हिस्सों में बंट गया। भारी खून खराबा, दंगा, लूटपाट, आगजनी, सामूहिक बलात्कार की घटनाओं के मध्य अखंड भारत के पूर्वी और पश्चिम हिस्से को पाकिस्तान बना दिया गया और वहां के लोग अपने ही देश में शरणार्थी बना दिए गए। एक निरंतर चलने वाले युद्ध और गृहयुद्ध शुरू हो गया। जिस देश में हजारों साल से विविधता और बहुलता का लोकतंत्र था, साझा चूल्हा […] - [प्रतिरोध, न्याय और दया का एक उभरता हुआ नए ज़माने का सिनेमा](https://pratibimbmedia.com/an-incipient-new-age-cinema-of-resistance-justice-and-kindness/): वर्ष 2025 कुछ ही घंटों में अतीत हो चुका होगा। यह साल कई मायनों में अलग रहा। मैं चाहता था कि बीत रहे साल की रचनात्मकता को अपने पाठकों तक परोसा जाए। फिर मुझे वायर में हर्ष मंदर की वर्ष 2025 के सिनेमा पर एक लेख मिला। यह लेख इतने बेहतर तरीके से वर्ष 2025 के बेहतरीन सिनेमा को प्रस्तुत करता है कि मैं प्रकाशित करने से अपने को रोक नहीं पा रहा हूं। वायर से क्षमा याचना और आभार सहित इसे प्रतिबिम्ब मीडिया में प्रकाशित कर रहा हूं। हर्ष मंदर का विशेष रूप से आभार जिन्होंने इतने बेहतर तरीके […] - [मंजुल भारद्वाज की कविता- आंसुओं में मुस्कुराते हुए !](https://pratibimbmedia.com/a-poem-by-manjul-bhardwaj-smiling-through-tears/): कविता आंसुओं में मुस्कुराते हुए ! -मंजुल भारद्वाज   एक कला संकल्प एक उन्मुक्त कला विचार एक नाटय दर्शन एक पथ… विविध रंग !   एक राही … कलात्मक कारवां सीमाओं को तोड़ता रंग क्षितिज !   खुद का स्वयं से साक्षात्कार अपने को जन्मतें कलाकार जड़ता को आलोकित करता कला चैतन्य !   समाज के विष को पीकर विकार मुक्त विश्व सृजन के मार्ग पर चलते कला साधक !   पड़ाव दर पड़ाव अपने होने की खुशबू से महकते अपने होने के सबब पर अपने ही आंसुओं में मुस्कुराते सृजनकार ! - [महत्वपूर्ण बदलाव](https://pratibimbmedia.com/profound-changes/): महत्वपूर्ण बदलाव रेनू कोहली यह साल फ्लैगशिप ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्यक्रम, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम के पुनर्गठन के साथ खत्म हो रहा है। इस महीने, एक नए कानून ने इसका नाम बदलकर विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) कर दिया है, जिसमें बड़े बदलाव किए गए हैं, जिससे काफी चिंताएं पैदा हुई हैं। कई लोग इसके पीछे के कारण – एक बदली हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था – से सहमत नहीं हैं, जिसके कारण ये बदलाव किए गए हैं। चिंताएं इसके नाम बदलने से लेकर इसे केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में फिर से परिभाषित करने तक हैं, जिसमें […] - [गेम चेंजर](https://pratibimbmedia.com/game-changer/): गेम चेंजर सेवंती निनन टेक्नोलॉजी ब्रॉडकास्टिंग जॉनर और उनके डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल को पूरी तरह से बदल रही है, जैसा कि हम उन्हें जानते थे। 2025 स्ट्रीमिंग दिग्गजों, नेटफ्लिक्स और यूट्यूब के लिए एक शानदार साल था, लेकिन पारंपरिक ब्रॉडकास्टर्स के लिए नहीं। यह कमर्शियल और पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर्स, खासकर BBC के लिए हिसाब-किताब का साल था। किसने सोचा होगा कि नेटफ्लिक्स – जिसने अपनी स्ट्रीमिंग सर्विस 2007 में ही शुरू की थी – हॉलीवुड स्टूडियो, वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने के लिए बोली लगाएगा, ताकि वह अपनी फिल्मों और टीवी सीरीज़ की इन्वेंट्री बढ़ा सके? और YouTube और दूसरे स्ट्रीमिंग […] - [तांगे की अविस्मरणीय यादें](https://pratibimbmedia.com/unforgettable-memories-of-tanga/): यह रेखाचित्र राजिंदर सिंह राजन ने लिखा है। घोड़े से जुती एक सवारी गाड़ी, जिसमें आठ से 10 सवारियां बैठ जाती थीं। नब्बे के दशक तक यही सवारी पूरे भारत में उपलब्ध होती थी। लेखक ने तो अपने फीचर में पंजाब का चित्रण किया है, लेकिन पंजाब की जगह किसी भी प्रदेश का नाम दे दीजिए, सब जगह तांगा (कई जगह इक्का नाम भी प्रचलित था) ही सर्वसुलभ यात्रा गाड़ी होती थी जो कच्चे- पक्के हर रास्ते पर सवारियों को लेकर जा सकती थी। पुरानी पीढ़ी इस रेखाचित्र को पढ़कर अपने समय की यात्राओं को याद करेगी तो नई पीढ़ी […] - [हिंदी के सबसे क्रांतिकारी, चमकदार गज़लकार दुष्यंत कुमार](https://pratibimbmedia.com/dushyant-kumar-the-most-revolutionary-and-brilliant-ghazal-writer-in-hindi/): पुण्यतिथि पर विशेष हिंदी के सबसे क्रांतिकारी, चमकदार गज़लकार दुष्यंत कुमार मुनेश त्यागी   हो गई है पीर  पर्वत  सी  पिघलनी  चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।   सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है यह सूरत  बदलनी चाहिए।   आज यह दीवार परदों की तरह हिलने लगी, शर्त मगर थी कि बुनियाद हिलनी चाहिए।   हर गली हर गांव से हर सड़क हर शहर से, हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।   मेरे सीने में ना सही तेरे सीने में ही सही, हो कहीं भी मगर आग जलनी चाहिए।   यह पिछले 50 […] - [राज कपूर की मानवीय करुणा का सिनेमाई प्रतिबिंब](https://pratibimbmedia.com/raj-kapoors-cinematic-reflection-of-human-compassion/): राज कपूर की मानवीय करुणा का सिनेमाई प्रतिबिंब     राम आह्लाद चौधरी हिंदी सिनेमा के इतिहास में राज कपूर का नाम एक ऐसे शख्सियत के रूप में उभरता है, जिन्होंने न केवल मनोरंजन की दुनिया को नई ऊंचाइयां दीं, बल्कि सामाजिक चेतना को भी एक नई दिशा प्रदान की। उनकी फिल्में सिर्फ कहानियां नहीं हैं; वे उस दौर के भारत की सामाजिक, आर्थिक और नैतिक उथल-पुथल का जीवंत दस्तावेज हैं। राज कपूर की मानवीय करुणा उनकी फिल्मों की आत्मा है—एक ऐसी करुणा जो दर्शक को सिर्फ भावुक नहीं करती, बल्कि विचार करने पर मजबूर करती है। राज कपूर की […] - [सूजन क्या है, यह शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाती है, और कौन से खाने की चीजें इसे रोकने में मदद कर सकती हैं?](https://pratibimbmedia.com/what-is-inflammation-and-how-does-it-harm-the-body-which-foods-can-protect-against-this-damage/): सूजन क्या है, यह शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाती है, और कौन से खाने की चीजें इसे रोकने में मदद कर सकती हैं? सिर्फ़ बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि हॉलीवुड स्टार्स ने भी खुलेआम माना है कि वे अपनी जवानी बनाए रखने के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स खाना शुरू कर रहे हैं। इससे उनका शरीर भी हेल्दी रहता है। लेकिन यह सूजन असल में क्या है? वजह थी सूजन। सामंथा रूथ प्रभु ने कहा कि एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स ने उनकी ऑटोइम्यून बीमारी को कम करने में मदद की। अर्जुन कपूर का एक समय में बहुत वज़न बढ़ गया था। एक्टर ने कहा कि […] - [मनजीत सिंह की कविता- भूखा बच्चा](https://pratibimbmedia.com/manjit-singhs-poem-the-hungry-child/): कविता भूखा बच्चा मनजीत सिंह बच्चा झोपड़ी के बाहर खड़ा आते जाते लोगों को वाहनों को भरी नजरों से ताक रहा था और बाट जोह रहा था कोई आएगा भोजन कपड़े कम्बल रजाई देगा और सर्दी जल्दी निकल जाएगी इसी आस में टक टकी लगाए खड़ा रहता है पूरा दिन। ———–   - [विहाग वैभव की कविता- कैसे बताएगी एक स्त्री](https://pratibimbmedia.com/vihag-vaibhavs-poem-how-will-a-woman-explain-it/): कविता कैसे बताएगी एक स्त्री विहाग वैभव   कैसे बताएगी एक स्त्री उसके साथ क्या हुआ कैसे कैसे, कहाँ-कहाँ, किस तरह?   मी लार्ड! हमें कुछ और शब्द चाहिए कोई और भाषा   एक और लिपि चाहिए जिसका व्याकरण मर्दों ने न गढ़ा हो जहां सिसकियां भी अपील हों चीखें हो मुकम्मल बयान   अभिव्यक्तियों के अपहृत अर्थातों से नहीं समझी जा सकेंगी मनुष्य – योनि के होने की त्रासदियां   मी लार्ड! हमें कोई और अदालत चाहिए कुछ और शब्द कोई और लिपि कोई और भाषा। वैभव विहाग के फेसबुक वॉल से साभार - [यूपी में धूप छुट्टी पर](https://pratibimbmedia.com/the-sun-is-on-vacation-in-up/): बात बेबात यूपी में धूप छुट्टी पर विजय शंकर पांडेय यूपी में ठंड नहीं पड़ रही, बल्कि अपना पूरा परिवार लेकर स्थायी डेरा डाल दी है। कोहरा ऐसा कि लगता है सरकार ने “दृश्य छिपाओ योजना” लागू कर दी हो। 45 जिले घने कोहरे की चपेट में और 18 जिले तो इतने गंभीर कि वहां “कुछ दिखाई देना” अफवाह घोषित हो चुका है। विजिबिलिटी शून्य पर पहुंच गई, यानी आंखें_खुली_हैं_लेकिन_भरोसा_बंद। लखनऊ में धूप को लेकर अफवाह उड़ती रही कि वह कहीं बाहर निकली है, लेकिन बाद में पता चला कि धूप ने भी ठंड से छुट्टी ले ली है। मेरठ […] - [गहरे आक्रोश के साहित्य लेखन पर 'चिंता'](https://pratibimbmedia.com/concerns-about-literary-writing-fueled-by-deep-resentment/): गहरे आक्रोश के साहित्य लेखन पर ‘चिंता’ आलोक वर्मा 28 दिसंबर को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में  आयोजित एक पुस्तक विमोचन समारोह में केंद्रीय साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने शिकायती स्वर में कहा कि वर्तमान में देश में तीखे आक्रोश की कविताएं लिखी जा रही हैं। संदर्भ था जारी की जा रही पुस्तक में प्रेम कविताओं का। कौशिक जी ने कवि राजेंद्र धवन को बधाई देते हुए कहा कि पूरे देश में (हर भाषा में ) गहरे आक्रोश की कविताएं लिखी जा रही हैं। आप प्रेम की कविताएं लिख रहे हैं, यह एक अलग धारा है, लीक से हटकर […] - [1500 ईसा पूर्व से पहले भारत में कोई ब्राह्मण नहीं थे ](https://pratibimbmedia.com/there-were-no-brahmins-in-india-before-1500-bc/): 1500 ईसा पूर्व से पहले भारत में कोई ब्राह्मण नहीं थे देवदत्त पटनायक 1500 ईसा पूर्व से पहले भारत में कोई ब्राह्मण नहीं थे… 100 ईसा पूर्व से पहले दक्षिण भारत में कोई ब्राह्मण नहीं थे। हड़प्पा शहरों में कोई ब्राह्मण नहीं थे। भीमबेटका गुफाओं में कोई ब्राह्मण नहीं थे। कीलाडी शहरों में कोई ब्राह्मण नहीं थे। ब्राह्मण यह मानने से इनकार करते हैं कि ब्राह्मणवादी विचार बाहर से भारत में आए। वे इंडो-आर्यन प्रवासियों के साथ आए, जिनके शुरुआती घर काले सागर के उत्तर में, आज के यूक्रेन और दक्षिणी रूस के आसपास के स्टेपी क्षेत्रों में थे। ये […] - [ब्राह्मण और मुसलमान दोनों उत्तर-पश्चिम से भारत में आए, बता रहे देवदत्त पटनायक](https://pratibimbmedia.com/both-brahmins-and-muslims-came-to-india-from-the-northwest-says-devdutt-pattanaik/): आलेख ब्राह्मण और मुसलमान दोनों उत्तर-पश्चिम से भारत में आए देवदत्त पटनायक   मुझे यकीन है कि ब्राह्मण गुप्त मुसलमानों की तरह काम करते हैं, जो धर्मशास्त्र से नहीं बल्कि रणनीति से अलग हैं। मुस्लिम हलाल हराम विभाजन की तरह, ब्राह्मणों ने सात्विक तामसिक पदानुक्रम लागू किया, जिसमें नैतिक भोजन और व्यवहार संहिताएं पेश की गईं, जिन पर पहले की भारतीय संस्कृतियों ने इस तरह जोर नहीं दिया था। ब्राह्मण और मुसलमान दोनों उत्तर-पश्चिम से भारत में आए, उपमहाद्वीप में उन्हीं भौगोलिक गलियारों का अनुसरण करते हुए। ब्राह्मण अपनी सांस्कृतिक जड़ों को यूरेशियन स्टेपी से जोड़ते हैं, जो लगभग 4000 […] - [दुनिया भर के लिए बड़ी चुनौती बना पर्यावरण संकट](https://pratibimbmedia.com/the-environmental-crisis-has-become-a-major-challenge-for-the-entire-world/): दुनिया भर के लिए बड़ी चुनौती बना पर्यावरण संकट  कुलभूषण उपमन्यु पिछली डेढ़ शताब्दी, जब से औद्योगिक क्रांति ने विकास की गति तेज की और प्रकृति को जीतने की होड़ मच गई, मशीनों ने बंधक- निर्माण- शक्ति मानव के हाथ में दे दी तब से विकास की परिभाषा भी धीरे धीरे बदल गई। गुणात्मक जीवन के बजाय बाहुल्य को विकास माना जाने लगा। प्रकृति के साथ दुर्व्यवहार का एक अंतहीन सिलसिला आरंभ हो गया। प्रकृति के दोहन से ही बाहुल्य के लिए सामान बनाए जा सकते थे, इसलिए प्राकृतिक संसाधनों के असीमित दोहन की शुरुआत हो गई। उपनिवेशवाद के दौर […] - [भारत की राजनीति में ‘डनिंग–क्रूगर इफ़ेक्ट’](https://pratibimbmedia.com/the-dunning-kruger-effect-in-indian-politics/): भारत की राजनीति में ‘डनिंग–क्रूगर इफ़ेक्ट’ धर्मेन्द्र आज़ाद आज के भारत के समाज की मनःस्थिति और राजनैतिक दिशा को समझने के लिये केवल चुनावी नतीजों, नेताओं के भाषणों या टीवी डिबेट की शोरगुल तक सीमित रहना काफ़ी नहीं है। भारतीय समाज के मनोविज्ञान को भी समझना जरूरी है कि लोग कैसे सोच रहे हैं और उससे भी ज़्यादा अहम—वे वैसा सोच क्यों रहे हैं। मनोविज्ञान में एक प्रसिद्ध अवधारणा है—डनिंग–क्रूगर प्रभाव (Dunning–Kruger Effect)। इसका सार यह है कि जिन लोगों का किसी विषय पर ज्ञान सीमित होता है, वे अक्सर उसी अधकचरे ज्ञान पर असाधारण आत्मविश्वास के साथ भरोसा कर […] - [मंजुल भारद्वाज की कविता - कालचक्र के सफ़ों पर](https://pratibimbmedia.com/manjul-bhardwajs-poem-on-the-pages-of-the-wheel-of-time/): कालचक्र के सफ़ों पर मंजुल भारद्वाज   सूर्य की रौशनी वसुंधरा की गति से चन्द्रमा की भांति शरीर की घटती बढती आकृतियां चुनौतियों और हासिल का पैमाना हैं !   जीवन दृष्टि की सृष्टि के बढ़ते क़दम दर क़दम मंज़िल का पैमाना है !   कितना पा लिया कितना छूट गया कितना बह गया कितना समेट लिया कितना ‘जी’ लिया कितना रह गया कालचक्र के आईने से गुजरते मनुष्य का कालचक्र के सफ़ों पर दर्ज़ जीवन का सफ़रनामा है!   ……..   - [कैसे दौलत ने चुपचाप भारत की अर्थव्यवस्था पर कब्ज़ा कर लिया](https://pratibimbmedia.com/how-wealth-quietly-took-over-indias-economy/): कैसे दौलत ने चुपचाप भारत की अर्थव्यवस्था पर कब्ज़ा कर लिया हरीश जैन 150 से ज़्यादा सालों से, भारत की कहानी आमतौर पर एक ही नंबर से बताई जाती रही है: इनकम (आमदनी)। अर्थव्यवस्था कितनी तेज़ी से बढ़ी? ग्रोथ कब तेज़ हुई? किसे फ़ायदा हुआ और किसे नुकसान? लेकिन इनकम सिर्फ़ आधी कहानी है। दूसरा आधा हिस्सा है दौलत—जो लोगों के पास है, न कि सिर्फ़ जो वे कमाते हैं। जब हम लंबे समय तक दौलत को ध्यान से देखते हैं, तो भारत के अतीत और वर्तमान की एक बहुत अलग तस्वीर सामने आती है। भारत की अर्थव्यवस्था पर एक […] - [कवि राजकुमार कुम्भज की 2025 में पांच कविता-पुस्तकें प्रकाशित](https://pratibimbmedia.com/poet-rajkumar-kumbhaj-will-have-five-poetry-books-published-in-2025/): कवि राजकुमार कुम्भज की 2025 में पांच कविता-पुस्तकें प्रकाशित इन्दौर।समकालीन हिंदी कविता के चर्चित व सक्रिय वरिष्ठ कवि इन्दौर शहर निवासी राजकुमार कुम्भज की इस वर्ष  2025 में पाँच स्वतंत्र कविता-पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। राजकुमार कुम्भज द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि अब तक उनकी कुल 69 स्वतंत्र कविता-पुस्तकों का प्रकाशन देश के विभिन्न प्रकाशकों द्वारा किया गया है और प्रकाशक समयानुसार समुचित रायल्टी भी भेज रहे हैं। ये उनके जीवन का 79 वाँ वर्ष चल‌ रहा है। राजकुमार कुम्भज का आगामी 12 फ़रवरी  को जन्म दिन है। उन्हें उनकी प्रकाशित कविता-पुस्तकों सहित जन्मदिन की शुभकामनाऍं फ़ोन नंबर […] - [राजकुमार कुम्भज की कविता- जॅंगल में मॅंगल](https://pratibimbmedia.com/rajkumar-kumbhajs-poem-celebration-in-the-jungle/):   कविता जॅंगल में मॅंगल राजकुमार कुम्भज ____ जॅंगल में मॅंगल एक बंदर झोपड़ी के अंदर दमादम मस्त कलंदर सबका साथ सबका विकास अपनी बोतल अपना ग्लास जाग मछंदर गोरख आया जिसने खोया उसने पाया इसकी टोपी उसका सिर किसका जूता किसका सिर गली में आज चाँद निकला लालाजी का पाँव फिसला हारे को हरिनाम जीते को संसद मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की ढूँढो ढूँढो रे भीडू ढूँढो टूटी माला टूटी पायल कौन बचा कौन घायल हाजी खाये अंडा पकड़ा जाये पंडा खेल खत्म पैसा हजम बोलो चाय डिब्बे में गरम….. - [मुनेश त्यागी की कविता - पूरा का पूरा हिंदुस्तान खतरे में ](https://pratibimbmedia.com/poem-by-munesh-tyagi-the-whole-of-india-is-in-danger/): कविता पूरा का पूरा हिंदुस्तान खतरे में  मुनेश त्यागी   हिंदू खतरे में मुसलमान खतरे में बहन बेटियों और बहुएं खतरे में, हम सब देख और सुन रहे हैं पूरा का पूरा हिंदुस्तान खतरे में।   सुप्रीम कोर्ट के जज कहें जरा गौर से तो देखो, कानून का शासन खतरे में भारत का संविधान खतरे में।   कहीं रुक ही नहीं रही हैं भूख और गरीबी की आंधियां, केवल मान सम्मान ही नहीं पूरा स्वाभिमान खतरे में।   जिन्हें चाहिएं किसी भी तरह से सत्ता की कुर्सियां, उन्हें कहां दिख रही हैं लोक और लिहाज खतरे में।   भाषा जाति […] - [करतार सिंह ग्रेवाल : सात बार चार्जशीट, फिर भी भिड़ने का हौसला](https://pratibimbmedia.com/kartar-singh-grewal-charged-seven-times-yet-still-has-the-courage-to-fight-back/): हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-63  करतार सिंह ग्रेवाल : सात बार चार्जशीट, फिर भी भिड़ने का हौसला सत्यपाल सिवाच बीते सालों में भिवानी जिले का नाम हरियाणा कर्मचारी आन्दोलन में अग्रणी के तौर पर याद किया जाता रहा है। तब करतार सिंह ग्रेवाल और दर्जनों ऐसे लड़ाका साथियों की टीम का स्मरण अनायास ही हो जाता है जो किसी भी ताकत से भिड़ने का हौसला रखते थे। वन विभाग कर्मचारी संघ की स्थिति पर भी गौर करें तो पाएंगे कि इस यूनियन को संघर्षशील चरित्र देने वाले गिनती के कार्यकर्ताओं में भी करतार ग्रेवाल का नाम शुमार रहेगा।   3 मार्च 1959 […] - [ग़ालिब के रंग](https://pratibimbmedia.com/ghalibs-style/): आज ग़ालिब का जन्मदिन है ग़ालिब के रंग ग़ालिब सदा किराये के मकान में रहे, अपना मकान न बनवा सके। ऐसा मकान ज़्यादा पसंद करते थे, जिसमें बैठकख़ाना और अन्त:पुर अलग-अलग हों और उनके दरवाज़े भी अलग हों, जिससे यार-दोस्त बेझिझक आ-जा सकें। 5 अक्टूबर को (18 सितम्बर को दिल्ली पर अंग्रेज़ों का दुबारा से अधिकार हो गया था) कुछ गोरे, सिपाहियों के मना करने पर भी, दीवार फाँदकर मिर्ज़ा के मुहल्ले में आ गए और मिर्ज़ा के घर में घुसे। उन्होंने माल-असबाब को हाथ नहीं लगाया, पर मिर्ज़ा, आरिफ़ के दो बच्चों और चन्द लोगों को पकड़कर ले गए […] - [तकलीफ़ों का इलाज कम, आंकड़ों का हल्ला ज़्यादा](https://pratibimbmedia.com/theres-less-focus-on-treating-the-problems-and-more-on-making-a-fuss-about-the-statistics/): बात बेबात तकलीफ़ों का इलाज कम, आंकड़ों का हल्ला ज़्यादा विजय शंकर पांडेय असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान सुनकर लगा कि वे मुख्यमंत्री कम और जनगणना विभाग के भविष्यवक्ता ज़्यादा हैं। 40 प्रतिशत बांग्लादेशी मूल की आबादी, और अगर 10 प्रतिशत और बढ़ गई तो असम सीधे बांग्लादेश में विलय! यानी न विधानसभा की ज़रूरत, न संसद की, न संविधान संशोधन—सिर्फ प्रतिशत का जादू चलेगा और नक्शा बदल जाएगा। अब सवाल वही है—हिमंत बिस्वा सरमा हैं किस मर्ज़ की दवा? जनता की बीमारी बेरोज़गारी है, महंगाई है, बाढ़ है, स्वास्थ्य व्यवस्था है। मगर दवा दी जा रही […] - [क्या मैराथन से ह्दय को नुकसान पहुंचता है? क्या कहता है अध्ययन ](https://pratibimbmedia.com/does-running-a-marathon-damage-the-heart-what-does-the-study-say/): क्या मैराथन से ह्दय को नुकसान पहुंचता है? क्या कहता है अध्ययन डेविड सी. गेज लंदन। मैराथन दौड़ मानव शरीर को उसकी क्षमता की सीमा तक पहुंचा देती है। पैर थक जाते हैं, सांस फूलने लगती है और हृदय को घंटों तक कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। इसी वजह से वर्षों से यह सवाल उठता रहा है कि क्या 26 मील (लगभग 42 किलोमीटर) दौड़ना हृदय के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इस सवाल का सबसे ठोस जवाब ‘जामा कार्डियोलॉजी’ पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन से मिलता है। दस साल तक चले इस अध्ययन में 152 शौकिया मैराथन धावकों […] - [बिजली कर्मचारी आन्दोलन से उभरे प्रतिबद्ध नेता - प्रताप सिंह](https://pratibimbmedia.com/pratap-singh-a-committed-leader-emerged-from-the-electricity-workers-movement/): हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-62 बिजली कर्मचारी आन्दोलन से उभरे प्रतिबद्ध नेता – प्रताप सिंह सत्यपाल सिवाच रोहतक जिले के सांघी गांव के निवासी प्रताप सिंह करनाल में बिजली कर्मचारियों और सर्वकर्मचारी संघ की अग्रणी कतारों में पहुंच गए थे। सन् 1990 के लगभग उनसे मेरा परिचय बिजली परिसर में हुई कार्यकर्ता बैठक में हुआ था। तत्पश्चात् उनके और वाई.पी. यादव के प्रयासों और पहल से बिजली क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को शिक्षित करने का सिलसिला शुरू हो गया। बाद में प्रतापसिंह एच.एस.ई.बी. वर्करज यूनियन (हैड ऑफिस,हिसार) के राज्य प्रधान पद तक पहुंचे। उनका जन्म 15 जून 1955 को सांघी गांव में […] - [कला का मूल्यांकन और धोखाधड़ी](https://pratibimbmedia.com/art-valuation-and-fraud/): कला का मूल्यांकन और धोखाधड़ी श्रीमोई बागची जापान में टोकुशिमा मॉडर्न आर्ट म्यूज़ियम 25 साल से भी पहले एक बड़े आर्ट धोखाधड़ी का शिकार हुआ था। यह खुलासा इस महीने की शुरुआत में हुआ, जब म्यूज़ियम ने एक शुरुआती क्यूबिस्ट पेंटिंग की जांच रिपोर्ट प्रकाशित की, जो एक मशहूर जालसाज़ की नकली पेंटिंग निकली। जापान में हाल ही में मिली चार नकली पेंटिंग्स में से एक इस म्यूज़ियम के पास थी, और अब कहा जा रहा है कि ये सभी वोल्फगैंग बेल्ट्राची ने बनाई थीं, जिसे 2011 में जर्मनी में मास्टरपीस की नकल करने के लिए दोषी ठहराया गया था […] - [राजीव प्रताप रूडी का नया “डायनेस्टी सूत्र”](https://pratibimbmedia.com/rajiv-pratap-rudys-new-dynasty-formula/): बात बेबात राजीव प्रताप रूडी का नया “डायनेस्टी सूत्र विजय शंकर पांडेय बिहार की राजनीति में निशांत कुमार की संभावित एंट्री पर ज्ञान की ऐसी बाढ़ आई है कि गंगा भी गंगा नहाने की सोचने लगें। भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने नया “डायनेस्टी सूत्र” खोज निकाला—इंजीनियर का बेटा इंजीनियर, डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, आईएएस का बेटा आईएएस, तो नेता का बेटा नेता क्यों नहीं? तर्क इतना सरल है कि सवाल पूछना भी राष्ट्रविरोधी लगने लगे। लेकिन समस्या यह है कि यह फार्मूला क्या सिर्फ अपनों लोगों पर लागू होता है। बाकी पर नहीं। अलमारी खुलती है तो सिर्फ अपने […] - [राजकुमार कुम्भज की कविता- एक और रात दिसम्बर की](https://pratibimbmedia.com/rajkumar-kumbhajs-poem-another-december-night/): कविता एक और रात दिसम्बर की. राजकुमार कुम्भज   एक और रात दिसम्बर की है पिछले बरस जैसी ही है बिल्कुल पृथ्वी पर अन्न-जल की तलाश में भूख-प्यास की पुकार को पुकारते हुए भय है कि भयग्रस्तता के मारे हैं सभी जागते हुए,भागते हुए हाँफते-काँपते भागती रेलगाड़ी में सवार हैं सभी के सभी पुल नीचे सूखी नदी ऊपर सुलगता अलाव सुल्तान की नींद में ख़लल नहीं ज़रा भी गहन-गहरे सुनहरे सपनों में सोया है वह खोया है बचपन का जादू मेलों की भीड़ में पीठ हैं,भेड़ें हैं,ऊन है दूसरों के लिए बज रही है बाँसुरी भी कि जल रहा है […] - [जलेस ने विनोद कुमार शुक्ल को दी श्रद्धांजलि](https://pratibimbmedia.com/janavaddi-lekhak-sangh-paid-tribute-to-vinod-kumar-shukla/): जलेस ने विनोद कुमार शुक्ल को दी श्रद्धांजल जनवादी लेखक संघ के केंद्रीय कार्यालय ने प्रसिद्ध कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन पर शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। यहां जलेस के महासचिव नलिन रंजन सिंह, संयुक्त महासचिव बजरंग बिहारी तिवारी, संदीप मील और प्रेम तिवारी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि विनोद कुमार शुक्ल का निधन हिन्दी साहित्य की एक अपूरणीय क्षति है। अपने सहृद और विरल गद्य लेखन के लिए वे जाने जाते थे। पिछले कुछ समय से वे उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। छत्तीसगढ़ के रायपुर एम्स में […] - [साम्यवादी क्रांतिकारी चैयरमेन माओ त्से तुंग का जीवन ](https://pratibimbmedia.com/the-life-of-the-communist-revolutionary-chairman-mao-tse-tung/): जन्मदिन पर विशेष साम्यवादी क्रांतिकारी चैयरमेन माओ त्से तुंग का जीवन मुनेश त्यागी   आज चीन के महान क्रांतिकारी साम्यवादी नेता माओत्से तुंग का जन्मदिन है। माओत्से तुंग गरीब किसान के बेटे थे। वे चीनी किसानों के सबसे बड़े नेता थे। वे चीनी शोषक सत्ता के सबसे बड़े विरोधी थे। उन्हें कई बार सत्ता द्वारा मृत घोषित किया गया था। माओ चीन की अधिकांश क्रांतिकारी समितियों के सदस्य थे, इसलिए उन्हें “चैयरमेन” यानी अध्यक्ष के नाम से पुकारा जाता था। माओ बहुत पढ़ाकू थे। वे साधारण मकान में रहते थे, सैनिकों की तरह खाते पीते और पहनते थे। उन्होंने इतिहास, […] - [इलेक्ट्रिसिटी बिल 2025: पावर सेक्टर प्राइवेटाइजेशन की ओर बढ़ रहा है](https://pratibimbmedia.com/electricity-bill-2025-power-sector-moving-towards-privatization/): इलेक्ट्रिसिटी बिल 2025: पावर सेक्टर प्राइवेटाइजेशन की ओर बढ़ रहा है प्रो नवरीत कौर पावर सेक्टर में प्राइवेटाइजेशन का खतरा कुछ समय से महसूस किया जा रहा है। यह अब एक भयानक रूप में सामने आया है। प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल के क्लॉज और सब-क्लॉज साफ तौर पर कमर्शियलाइजेशन और सेंट्रलाइजेशन की ओर इशारा करते हैं। सरकारी बिजली कंपनियों (DISCOMs) को एक मार्केट सिस्टम के तहत लाया जा रहा है जिसे केंद्र कंट्रोल करेगा और आखिरकार भारत का सरकारी पावर सेक्टर पूरी तरह से प्राइवेटाइज हो जाएगा। पिछले दो दशकों में भारत में बिजली की खपत और बिजली उत्पादन दोनों […] - [बांग्लादेश ICU में और नेता लेक्चर दे रहे](https://pratibimbmedia.com/bangladesh-in-icu-with-more-leaders-giving-lectures/): बात बेबात बांग्लादेश ICU में और नेता लेक्चर दे रहे विजय शंकर पांडेय बांग्लादेश में तारिक रहमान की वापसी को लोग ऐसे देख रहे हैं, जैसे लंबे कट के बाद कोई फिल्म अचानक इंटरवल से शुरू हो जाए। मंच से उन्होंने कहा—“मेरे पास एक योजना है।” भीड़ ने ताली बजाई, क्योंकि योजना का होना आजकल अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, भले ही उसका कंटेंट बाद में आए… या आए ही नहीं। लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आज़ादी और धार्मिक टॉलरेंस पर भाषण इतना भावुक था कि लगा देश की सारी समस्याएं माइक के सामने लाइन लगाकर माफ़ी मांग लेंगी। बेरोज़गारी ने […] - [जानिये यूपी की आर्थिक तंदुरुस्ती का हाल, पूर्वांचल के जिले पूरी तरह बेहाल](https://pratibimbmedia.com/learn-about-the-state-of-uttar-pradeshs-economic-health-the-districts-of-purvanchal-are-in-a-completely-dire-situation/): उत्तर प्रदेश के नियोजन विभाग के अर्थ एवं संख्या प्रभाग ने राज्य की आर्थिक हालत पर एक अध्ययन रिपोर्ट तैयार कर  जारी की है। यह रिपोर्ट प्रदेश के असमान आर्थिक स्थिति का एक प्रमाण है। इस रिपोर्ट के आधार पर वरिष्ठ पत्रकार और लेखक ओमप्रकाश तिवारी ने एक समीक्षात्मक टिप्पणी लिखी है जिसमें हर जिले की आय का ब्योरा दिया गया है। उत्तर   प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के निर्वाचन क्षेत्र भी पड़ते हैं।  क्या इस राज्य के लोगों  की उपयोगिता केवल  केंद्र में सरकार बनाने तक ही रह गई है? […] - [शहीद-ए-आजम उधम सिंह: एक यथार्थवादी समाजवादी क्रांतिकारी](https://pratibimbmedia.com/shaheed-e-azam-udham-singh-a-realistic-socialist-revolutionary/): शहीद -ए -आजम उधम सिंह की जयंती पर विशेष लेख शहीद-ए-आजम उधम सिंह: एक यथार्थवादी समाजवादी क्रांतिकारी डॉ.रामजीलाल शहीद-ए-आज़म उधम सिंह (26 दिसंबर, 1899 – शहादत दिवस 31 जुलाई, 1940) एक असाधारण व्यक्ति थे, जो अपने देश की आज़ादी के लिए सब कुछ कुर्बान करने को तैयार थे. वह धैर्यवान, साहसी, राष्ट्रवादी, देशभक्त और एक समाजवादी क्रांतिकारी थे. जन्म और प्रारंभिक जीवन: उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर, 1899 को पटियाला रियासत (अब पंजाब) में, लाहौर से 130 मील दक्षिण में स्थित, कंबोज जाति के जम्मू गोत्र के सुनाम के पिलबाद मोहल्ले में हुआ था. उनकी माँ, श्रीमती नारायणी कौर, और पिता, स. टहल सिंह कंबोज ने मूल रूप से उनका नाम […] - [राजकुमार कुम्भज की कविता - लम्बे बालों वाला एक कवि](https://pratibimbmedia.com/rajkumar-kumbhajs-poem-a-poet-with-long-hair/): कविता लम्बे बालों वाला एक कवि राजकुमार कुम्भज   _______ लम्बे बालों वाला एक कवि किसी दूसरे गंजे कवि की ओर उसका गंजत्व देख-देख हॅंसता है और दिसम्बर में ही अप्रैल-मई हो जाता है गाता है भॅंग-राग अभॅंग की जगह रोटी को रौंदता है पैरों तले और चमकदार जूते रख लेता है सिर ऊपर लम्बे बालों वाला एक कवि कुछ इस तरह भी समकालीन हिंदी कविता का एक महत्वपूर्ण और पूर्णकालिक मौलिक हस्ताक्षर हो जाता है और फिर इधर-उधर से और पता नहीं किधर-किधर से टोकरी भर-भर पुरस्कार पाता है लम्बे बालों वाला एक कवि ही सुकोमल कवि कहलाता है […] - [जयपाल की कविता - प्रार्थना](https://pratibimbmedia.com/jayapals-poem-prayer/): क्रिसमस दिवस पर विशेष कविता प्रार्थना जयपाल   हे यीशु! जब तुम्हें क्रॉस पर लटकाया जा रहा था तुम्हारे शरीर में कीलें ठोंकी जा रही थीं तब भी तुम प्रार्थना कर रहे थे – हे प्रभु! इन्हें माफ करना ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं लेकिन वे अच्छी तरह जानते थे कि क्या कर रहे हैं इसलिए उन्होंने पूरी कीलें ठोंक कर ही दम लिया   फिर एक दिन उन्होंने उड़ीसा के क्योंझर जिले में ग्राह्म स्टेन्स और उसके दो मासूम बच्चों को सबके सामने ज़िंदा जला दिया उस समय ग्राह्म स्टेन्स की पत्नी ग्लैडी स्टेन्स ने फिर […] - [बनारस को चौपाटी बना दिया गया है : काशीनाथ सिंह](https://pratibimbmedia.com/banaras-has-been-turned-into-a-beach-resort-kashinath-singh/): बनारस को चौपाटी बना दिया गया है : काशीनाथ सिंह ‘लोगों ने बनारस को बर्बाद कर दिया है। ये मॉल और कॉलोनियों का मुहल्ला नहीं था। ये गलियों और मुहल्लों का मोहल्ला था। पहले लोग बनारस की परंपरा को देखने के लिए आते थे, अब लोग आरती के लिए आते हैं। बनारस के चरित्र को नष्ट किया जा रहा है।’’ साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित और ‘काशी का अस्सी’ जैसा बहुचर्चित और बहुविवादित उपन्यास लिखने वाले काशीनाथ सिंह ने एक मुलाकात में शहर के बदलते रूप रंग को लेकर कुछ इस तरह से अपना दर्द बयां किया। एक समाचार एजेंसी […] - [अरावली: जनता के दबाव में झुकी सरकार, लेकिन लड़ाई अभी बाकी है](https://pratibimbmedia.com/aravalli-the-government-bowed-to-public-pressure-but-the-fight-is-not-over-yet/): अरावली: जनता के दबाव में झुकी सरकार, लेकिन लड़ाई अभी बाकी है धर्मेन्द्र आज़ाद कई समाचार पत्रों और मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों में अरावली पर्वतमाला को लेकर सरकार द्वारा जारी किए गए नए निर्देशों को “यू-टर्न” के रूप में दिखाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि सरकार पीछे हट गई है। लेकिन सच्चाई यह है कि ख़तरा अभी पूरी तरह टला नहीं है, बस फिलहाल के लिए रोका गया है। इस पूरे मामले को समझने के लिए हमें कुछ हफ्ते पहले लिए गए फैसलों को देखना होगा। 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की […] - [एम.पी. सिंह - सच्चा इन्सान, समर्पित नेता](https://pratibimbmedia.com/m-p-singh-a-true-human-being-a-dedicated-leader/): हरियाणाः जूझते जुझारू लोग – 61 एम.पी. सिंह – सच्चा इन्सान, समर्पित नेता सत्यपाल सिवाच साथी महिन्द्रपाल सिंह जिन्हें लोग  एम.पी. सिंह नाम से पहचानते हैं, का जन्म 20 फरवरी 1963 को नौलथा जिला करनाल (अब पानीपत) में हुआ था। इनके दादा जी चैल हिमाचल प्रदेश के निवासी थे। इनके पिता का नाम सरदार हरजिन्द्र सिंह, माता का नाम संतोष कौर है। इनके बचपन का कुछ समय कुटेल (करनाल) में भी बीता, उसके बाद जगाधरी में रहने लगे। एम.पी. सिंह ने 1985 में गुरु नानक खालसा कॉलेज यमुनानगर से बी.एस.सी. परीक्षा पास की। सन् 1986 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बी.एड. […] - [हरिद्वार लिटरेचर फेस्टिवल 26 दिसंबर से, देशभर से जुटेंगे दिग्गज](https://pratibimbmedia.com/the-haridwar-literature-festival-will-begin-on-the-26th-bringing-together-prominent-figures-from-across-the-country/): हरिद्वार लिटरेचर फेस्टिवल 26 दिसंबर से, देशभर से जुटेंगे दिग्गज हरिद्वार । हरिद्वार में 26 से 28 दिसम्बर तक तीसरे लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। हरिद्वार लिटरेचर फेस्टिवल के निदेशक प्रो. श्रवण कुमार शर्मा ने कहा कि लिटरेचर फेस्टिवल साहित्य, रंगकर्म, शायरी और रचनात्मक संवादों का एक महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है। अंतः प्रवाह सोसाइटी हरिद्वार तथा जीआईईओ गीता संस्थान, कुरुक्षेत्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किए जा रहे फेस्टिवल में देश के विभिन्न हिस्सों से लेखक, कवि, शायर, रंगकर्मी और विचारक सहभागिता करेंगे। प्रो.श्रवण कुमार शर्मा ने बताया कि फेस्टिवल के पहले दिन उद्घाटन सत्र […] - [वर्तमान समय में हमारे सबसे जरूरी काम](https://pratibimbmedia.com/our-most-important-tasks-at-the-present-time/): वर्तमान समय में हमारे सबसे जरूरी काम मुनेश त्यागी भारत की आजादी के आंदोलन में लाखों करोड़ों लोगों ने भाग लिया था और लाखों लोगों ने कुर्बानियां दी थीं। अंग्रेजों के आने के वक्त से ही अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष शुरू हो गया था। आजादी की लड़ाई में भारत के अधिकांश किसानों, मजदूरों और आम जनता ने यह सोचा और विश्वास किया था कि अंग्रेजों की गुलामी का खात्मा हो जाने के बाद, भारत में आजादी आ जाएगी और सबको बुनियादी सुविधाएं जैसे रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं प्राप्त हो जाएंगी और सब का कल्याण होगा, […] - [ ओमप्रकाश तिवारी की कविता- रास्ता](https://pratibimbmedia.com/omprakash-tiwaris-poem-the-path/): कविता रास्ता ओमप्रकाश तिवारी   बहुत जरूरी होता है रास्ता आवागमन को सुगम बना देता है दूर बहुत दूर तक पहुंचा देता है किसी न किसी गंतव्य तक जाता ही है जो हमसफ़र बनता है उसे वहाँ तक ले जाता है जहां तक ख़ुद जाता है मंजिल पर पहुंचना और पहुंचाना उसे पसंद है, भाता है हर किसी की मंजिल तक उसकी पहुंच है बिना पथ कोई पथिक नहीं बिना रास्ता कोई मंजिल नहीं रास्ता बनाता कौन है? जवाब है कि आदमी फिर इतना घुमावदार क्यों होता है रास्ता तमाम मोड़ और चौराहे क्यों होते हैं अक्सर बहुत संकरा होता […] - [विनोद कुमार शुक्ल का उपन्यास ‘नौकर की कमीज़’ और मणि कौल की फ़िल्म](https://pratibimbmedia.com/vinod-kumar-shuklas-novel-the-servants-shirt-and-mani-kauls-film/): स्मृति शेष विनोद कुमार शुक्ल का उपन्यास ‘नौकर की कमीज़’ और मणि कौल की फ़िल्म जवरीमल्ल पारख 1999 में हिंदी के कवि और कथाकार विनोद कुमार शुक्ल (1937-2025) के पहले उपन्यास ‘नौकर की क़मीज़’ पर इसी नाम से मणि कौल (1944-2011) ने फिल्म बनायी थी। शायद ही किसी अन्य फिल्मकार का साहित्य से और ख़ासतौर पर हिंदी साहित्य से इतना गहरा संबंध रहा जितना मणि कौल का था। उनके द्वारा फिल्म के लिए ‘नौकर की कमीज़’ के चुने जाने का अपना महत्त्व है। दरअसल, मणि कौल ने फ़िल्म के लिए जिन-जिन साहित्यिक कृतियों का चुनाव किया, उनके कथानक न तो सीधे-सादे थे और न […] - [क्या समाज बनाया है हम "स्कूली शिक्षितों" ने शिक्षा के नाम पर..](https://pratibimbmedia.com/what-kind-of-society-have-we-school-educated-people-created-in-the-name-of-education/): क्या समाज बनाया है हम “स्कूली शिक्षितों” ने शिक्षा के नाम पर.. सिद्धार्थ ताबिश गोरखपुर में नर्सरी में पढ़ने वाली एक बच्ची जब स्कूल जा रही थी तो उसने पापा से ज़िद की कि उसे डीएम साहब से मिलना है और वो अपने पापा को लेकर डीएम ऑफिस पहुंच गई और वहां जाकर उसने डीएम से कहा कि मुझे आपकी तरह डीएम बनना है इस घटना से भावुक “स्कूली शिक्षित” लोग भाव विभोर होकर वाह वाह कर रहे हैं.. क्योंकि इन सबके घरों का यही माहौल होता है.. बच्चों को डीएम, डॉक्टर, इंजीनियर बनाने का इनका सपना होता है और […] - [राजनीति का सार समझा दिया](https://pratibimbmedia.com/he-explained-the-essence-of-politics/): चित्र – विजय शंकर पांडेय के फेसबुक वॉल से साभार बात बेबात राजनीति का सार समझा दिया विजय शंकर पांडेय बिहार की राजनीति में इन दिनों जीतन राम मांझी “ईमानदारी के व्यावहारिक कोच” बनकर उभरे हैं। उनका मानना है कि अगर लोकतंत्र में आदर्शवाद महंगा पड़ रहा हो, तो कमीशन में थोड़ी कटौती कर ली जाए। 10% न मिले तो 5% पर ही संतोष कर लो—आख़िर समझौता भी तो एक राजनीतिक मूल्य है! मांझी जी ने साफ कर दिया कि हर सांसद-विधायक कमीशन लेता है, फर्क बस इतना है कि कुछ लोग लेते हुए शर्माते हैं और कुछ गर्व से […] - [धर्मेन्द्र आज़ाद की कविता - अरावली की पुकार](https://pratibimbmedia.com/dharmendra-azads-poem-the-call-of-the-aravalli-mountains/): कविता अरावली की पुकार धर्मेन्द्र आज़ाद   हे मेरे प्यारे बच्चों, मैं अरावली बोल रही हूँ— हाँ, गुजरात से दिल्ली तक फैली सात सौ किलोमीटर लंबी तीन अरब वर्ष पुरानी तुम्हारी अपनी अरावली।   आज मैं तुमसे गुहार लगा रही हूँ— मुझे बचा लो, मुझे बचा लो। मुझे कटना नहीं है, मुझे सेठों में बँटना नहीं है।   मैं कोई बेकार, खामोश चट्टान नहीं हूँ। लाखों सदियों से मैं यहाँ अडिग खड़ी हूँ— धरती पर जीवन के पहले अंकुर को मैंने फूटते देखा है। लाखों पीढ़ियों को हवा, पानी और सुरक्षा देती रही हूँ।   रेगिस्तान के तूफ़ानों को अपने […] - [इस साल / सपना भट्ट](https://pratibimbmedia.com/this-year-sapna-bhatt/): (हिंदी के वरिष्ठ कवि और चिंतक असद ज़ैदी ने लिखा है- अपनी पसंद की कविताएँ दर्ज करना एक समानांतर पाठ तैयार करने और अपने से बाहर एक जीवन जीने की तरह है। दिसम्बर का उत्तरार्ध शुरू हुआ चाहता है। नया साल आने तक इस साल देखी, लिखी या याद आई कुछ कविताएँ यहाँ पेश हैं। यह कोई आधिकारिक या नुमाइन्दा चयन नहीं है, ज़्यादातर इत्तिफ़ाक़न है। बस कुछ ठिकानों से गुज़रने और इन कविताओं की सरासर ख़ूबी या उत्कृष्टता को रेखांकित करने की कोशिश है।।—असद ज़ैदी) उनकी पसंद को प्रतिबिम्ब मीडिया के पाठक भी पढ़ें। इसे हमने कवि, पत्रकार, चिंतक […] - [पर उपदेश कुशल बहुतेरे](https://pratibimbmedia.com/its-easier-to-preach-than-really-act/): बात बेबात पर उपदेश कुशल बहुतेरे विजय शंकर पांडेय देश में महंगाई बेलगाम है, पर यह बयान पूरी तरह काबू में। बीजेपी नेता नवनीत राणा ने जनसंख्या नीति को सीधे-सीधे “डिलीवरी रूम” में पहुंचा दिया है। उनका कहना है—“अगर वो 19 बच्चे करते हैं, तो हम हिंदुओं को 4 बच्चे तो पैदा करने ही चाहिए।” भाजपा नेत्री का बयान सोशल मीडिया पर वायरल तो हो ही रहा है, चैनल भी धड़ल्ले से उनका बयान प्रसारित कर रहे हैं। हैरानी बस इतनी है कि यह आदेश जारी करने वाली नवनीत जी खुद दो बच्चों पर ही लोकतांत्रिक विराम लगा चुकी हैं। […] - [अनुभव सिन्हा ने कहा, पसंदीदा शूटिंग मंतव्य बनाने के लिए अनुदान से आगे सोचें राज्य सरकारें](https://pratibimbmedia.com/anubhav-sinha-said-state-governments-should-think-beyond-subsidies-to-make-the-state-a-preferred-shooting-destination/): अनुभव सिन्हा ने कहा, पसंदीदा शूटिंग मंतव्य बनाने के लिए अनुदान से आगे सोचें राज्य सरकारें अनुभव सिन्हा एक जाने-माने निर्देशक हैं जिनकी फिल्में अपने कथ्य और शिल्प के नजरिये से अलग छाप छोड़ती हैं। सिन्हा की फिल्में दर्शकों में कला और विषय के प्रति रोमांच प्रस्तुत करती हैं। वह ऐसे निर्देशक हैं जो अपनी बात कहने में हिचकते नहीं और किसी की नाजायज प्रशंसा में विश्वास नहीं करते ठीक अपनी फिल्मों की तरह। अनुभव सिन्हा का कहना है कि यदि सरकारें फिल्मकारों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील नीतियां बनाएं और उन्हें केवल शूटिंग पर अनुदान देने तक सीमित नहीं […] - [विनोद कुमार शुक्ल जी नहीं रहे, विनम्र श्रद्धांजलि](https://pratibimbmedia.com/vinod-kumar-shukla-no-more/): फोटो सोशल मीडिया से साभार विनोद कुमार शुक्ल जी नहीं रहे, विनम्र श्रद्धांजलि ज्ञानपीठ से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का आज निधन हो गया। रायपुर एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। दीवार में एक खिड़की रहती थी, नौकर की कमीज जैसी बहुप्रशंसित पुस्तकों के लेखक थे विनोद कुमार शुक्ल। उन्होंने हमेशा चुपचाप सृजन किया। लेकिन उन्होंने खुले रूप में कभी अन्याय के खिलाफ आवाज भी नहीं उठाई। जिसे लेकर उनकी आलोचना भी हुई। उनकी कृतियां बेजोड़ हैं इनमें कोई दो राय नहीं। किसी ने उन्हें धीमी आंच का लेखक कहा है तो किसी ने शब्दों का सर्जक। उन्होंने शब्दों के […] - [एस. के. सिंगला - पाखंड के खिलाफ वैज्ञानिक समझ जीवन की मार्गदर्शक रही](https://pratibimbmedia.com/s-k-singla-scientific-understanding-against-hypocrisy-has-been-the-guiding-principle-of-his-life/): हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-60 एस. के. सिंगला – पाखंड के खिलाफ वैज्ञानिक समझ जीवन की मार्गदर्शक रही सत्यपाल सिवाच एस. के. सिंगला का जन्म 18 मार्च 1958 में हिसार जिले (अब भिवानी) के धनाना गांव में श्री दशरथमल और श्रीमती शान्ति देवी के यहाँ हुआ। वे चार भाई और पाँच बहनें हैं। वे आठवीं कक्षा तक गांव के स्कूल में पढ़े। नौवीं और दसवीं हिन्दू हाई स्कूल सोनीपत से की और 1975 में दसवीं कक्षा में मेरिट सूची में नाम आया। सन् 1975-78 में गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक झज्जर से डिप्लोमा किया। बाद में नौकरी के दौरान ए.एम.आई.ई. पास की। डिप्लोमा करते […] - [कविता और कथा के बीच बंकिम बाबू ](https://pratibimbmedia.com/bankim-babu-between-poetry-and-prose/): ‘वंदे मातरम्’ पर तीखी बहस बीस साल पहले भी चली थी। तब (सितम्बर 2006 में) जनसत्ता में मैंने एक लेख लिखा था। नौ साल बाद द वायर पर वह अँगरेज़ी में शाया हुआ। अब फिर नौ साल बाद कल रात अपूर्वानंद ने उसकी बात छेड़ी। लगा कि संक्षिप्त-संपादित रूप में सही, उसे फिर साझा किया जाय। प्रस्तुत है — )  कविता और कथा के बीच बंकिम बाबू  ओम थानवी ‘वंदे मातरम्’ कैसा गीत है? ‘आनंदमठ’ कैसा उपन्यास है? अच्छा होता इस मौके पर विद्वान लोग साहित्यकार के नाते बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के काम और राष्ट्रवाद की अवधारणा पर अलग से विचार […] - [राज्यसभा सीटें भी इमरजेंसी एग्जिट बन गई हैं](https://pratibimbmedia.com/rajya-sabha-seats-have-also-become-an-emergency-exit/): बात बेबात राज्यसभा सीटें भी इमरजेंसी एग्जिट बन गई है विजय शंकर पांडेय बिहार की राजनीति में इन दिनों मौसम ठीक नहीं, सीटों का दबाव बदल रहा है। विधानसभा चुनाव खत्म होते ही राज्यसभा की हवा चलने लगी है। इसी हवा में जीतन राम मांझी ने ऐसी सीटी बजाई कि एनडीए का पूरा इंजन चौंक गया। बोले—“सीट दो, नहीं तो हम उतर जाते हैं।” अब राजनीति में इसे धमकी नहीं, संवैधानिक अल्टीमेटम कहा जाता है। मांझी जी का बयान सुनकर एनडीए के रणनीतिकार माथा पकड़कर बैठ गए—“अब राज्यसभा सीटें भी इमरजेंसी एग्जिट बन गई हैं?” केंद्रीय कैबिनेट में रहते हुए […] - [माँ धनपती देवी सम्मान से  सम्मानित हुईं डॉ. लता ](https://pratibimbmedia.com/dr-lata-was-honored-with-the-maa-dhanpati-devi-award/): माँ धनपती देवी सम्मान से सम्मानित हुईं डॉ. लता सुलतानपुर, (उ. प्र.)। साक्षी सृजन संवाद समिति एवं कथा समवेत पत्रिका के संयोजन में जनपद के जिला पंचायत सभागार में ‘माँ धनपती देवी स्मृति कथा साहित्य सम्मान समारोह एवं साहित्यिक संगोष्ठी-2025’ का आयोजन किया गया। इस वर्ष कहानी प्रतियोगिता में सफल हुए कहानीकारों में भोपाल से डॉ लता अग्रवाल “तुलजा” को यह पुरस्कार उनकी कहानी “किरदार जिंदा है” के लिए प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकभूषण आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप ने की। कार्यक्रम के आयोजक डॉ शोभनाथ शुक्ल एवं श्रीमती संगीता शुक्ल जी ने कहा, कहानी सामाजिक समरसता को जनसरोकारों […] - [पहले भारतीय सांस्कृतिक कांग्रेस, 2025 की घोषणा](https://pratibimbmedia.com/declaration-of-the-first-indian-cultural-congress-2025/): पहले भारतीय सांस्कृतिक कांग्रेस, 2025 की घोषणा कोच्चि (केरल)। जैसे-जैसे दुनिया भर में, फिलीपींस से लेकर भारत, इज़राइल, संयुक्त राज्य अमेरिका और चिली तक, अंधेरे और नफरत की ताकतें मज़बूत हो रही हैं, यह कलाकारों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वे मानवीय मूल्यों, प्यार, दया और सहानुभूति, न्याय, समानता और मिलजुलकर रहने, लोगों और देशों के बीच शांति, और धरती और उस पर मौजूद हर चीज़ के प्रति सम्मान के लिए मिलकर आवाज़ उठाएँ। इसी मकसद से, लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष सांस्कृतिक कार्यकर्ता 20 से 22 दिसंबर, 2025 तक केरल के कोच्चि में पहले भारतीय सांस्कृतिक कांग्रेस (कल्चरल कांग्रेस) के […] - [कर्मचारी कोई संपत्ति नहीं, एक्सपायरी डेट वाला प्रोडक्ट है](https://pratibimbmedia.com/employees-are-not-assets-but-products-with-an-expiration-date/): बात बेबात कर्मचारी कोई संपत्ति नहीं, एक्सपायरी डेट वाला प्रोडक्ट है विजय शंकर पांडेय एसबीआई चेयरमैन सीएस शेट्टी ने बड़ा रहस्य उजागर कर दिया है—प्राइवेट बैंक कर्मचारियों पर निवेश नहीं कर रहे, इसलिए टैलेंट क्राइसिस है। अब तक माना जा रहा था कि टैलेंट खुद ही पलायन कर जाता है, लेकिन असल में उसे ट्रेनिंग के नाम पर केवल “ऑनलाइन मॉड्यूल + ऑल द बेस्ट” देकर छोड़ दिया जाता है। एसबीआई चेयरमैन- सीएस शेट्टी प्राइवेट बैंक का दर्शन बड़ा साफ है—कर्मचारी कोई संपत्ति नहीं, एक्सपायरी डेट वाला प्रोडक्ट है। आज जॉइन किया, कल टारगेट पूरा नहीं हुआ, परसों “थैंक यू […] - [मुख्यमंत्री सैनी ने कहा, कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़ जॉब क्रिएटर बनें युवा](https://pratibimbmedia.com/chief-minister-saini-said-that-young-people-should-connect-their-skills-with-modern-technology-and-become-job-creators/): मुख्यमंत्री सैनी ने कहा, कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़ जॉब क्रिएटर बनें युवा चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने स्थानीय कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर बनें। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार युवाओं की उद्यमशीलता को प्रोत्साहन देने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है तथा मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया एवं एमएसएमई क्षेत्र के लिए विशेष सब्सिडी जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्हें सहयोग प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं द्वारा स्वदेशी तकनीक के विकास से न केवल नए उद्यमों को बढ़ावा […] - [सत्यप्रकाश - जुझारू, बेबाक और भरोसेमंद कर्मचारी नेता](https://pratibimbmedia.com/satyaprakash-a-determined-outspoken-and-trustworthy-employee-leader/): हरियाणाः जूझते जुझारू लोग-59 सत्यप्रकाश – जुझारू, बेबाक और भरोसेमंद कर्मचारी नेता सत्यपाल सिवाच लम्बे समय तक ज्ञान-विज्ञान आन्दोलन, साक्षरता अभियान, अध्यापक संघ और कर्मचारी आन्दोलन में विश्वसनीय साख रखने वाले सत्यप्रकाश से राज्य के अधिकतर कार्यकर्ता परिचित रहे हैं। वैसे तो मैं उनसे छात्र आन्दोलन के दौर में ही मिल चुका था, लेकिन उनके अस्थायी शिक्षक बनने के बाद घनिष्ठ मैत्री सम्बन्ध कायम हो गए। इसीलिए उन्हें सार्वजनिक और निजी जीवन – दोनों क्षेत्रों में बहुत करीब से देखने समझने का मौका मिला। सत्यप्रकाश ने 16 अप्रैल 1958 को रोहतक के गांव टिटौली में एक मध्य किसान परिवार में […] - [तर्क, आस्था और सोचने की आज़ादी: एक बहस, जो स्टूडियो से निकलकर समाज तक जाएगी](https://pratibimbmedia.com/reason-faith-and-freedom-of-thought-a-debate-that-will-extend-from-the-studio-to-society/): तर्क, आस्था और सोचने की आज़ादी: एक बहस, जो स्टूडियो से निकलकर समाज तक जाएगी धर्मेन्द्र आज़ाद अभी हाल में लल्लनटॉप के मंच पर जावेद अख़्तर और मुफ्ती शमाइल के बीच ईश्वर, आस्था और तर्क को लेकर एक खुली बहस हुई। विषय कोई नया नहीं था, लेकिन सवाल वही थे जिन्हें अक्सर “संवेदनशील” कहकर दबा दिया जाता है—ईश्वर, धर्म, आस्था और तार्किक सोच। बहस में जावेद अख़्तर सवाल पूछते दिखे— “किस आधार पर?”, “क्यों मानें?”, “सबूत कहाँ है?” वहीं मुफ्ती आस्था की मजबूती, धर्म और परंपरा की बात करते रहे। यह टकराव किसी झगड़े जैसा नहीं था, बल्कि दो अलग-अलग […] - [राजकुमार कुम्भज की तीन कविताएँ](https://pratibimbmedia.com/three-poems-of-rajkumar-kumbhaj/): राजकुमार कुम्भज की तीन कविताएं 1 वे होंगे कुछेक ही फिर-फिर. वे होंगे कुछेक ही फिर-फिर जो समर्थक या भक्त कहलाऍंगे और जो नहीं होंगे भक्त या समर्थक दुश्मन क़रार दे दिए जाऍंगे वे,सुबह-सुबह काम पर जाऍंगे और जब शाम होने पर लौटेंगे घर घर की जगह देखेंगे जो कुछ भी उस सब से भीतर तक डर जाऍंगे डराऍंगे वे कुछेक ही फिर-फिर इधर से घुसेंगे,उधर निकल जाऍंगे उधर से घुसेंगे,इधर निकल आऍंगे और फिर उजालों में उजालों की तरह देखते ही देखते ग़ायब हो जाऍंगे डंडे लहराऍंगे,झंडे फहराऍंगे,दिखाऍंगे धर्म-ग्रंथ चमकाऍंगे तलवारें तमतमाते चेहरे लिए कोई भी उनसे पूछ नहीं […] - [शिमला-मनाली को मात दे रहा बनारस](https://pratibimbmedia.com/varanasi-is-surpassing-shimla-manali/): बात बेबात शिमला-मनाली को मात दे रहा बनारस विजय शंकर पांडेय बनारस में आजकल सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है—“मोक्ष बाद में मिलेगा, चलेगा, ये बताओ पहले, कंबल कहां मिलेगा?” यूपी में इस बार ठंड ने भी चुनावी मूड बना लिया है। बनारस, जहां आमतौर पर घाटों पर गंगा की धारा से ज्यादा गरम चाय और गरम बहस बहती है, वहां तापमान ने अचानक सन्यास ले लिया। अधिकतम तापमान सामान्य से 10 डिग्री नीचे चला गया और प्रशासन ने तुरंत रेड अलर्ट जारी कर दिया—क्योंकि बनारस में अगर ठंड पड़ जाए तो यह सामान्य मौसम नहीं, राष्ट्रीय आपदा मानी […] - [सरबतसिंह पूनिया - संघर्षशील और दृढ़निश्चयी नेता](https://pratibimbmedia.com/sarbatsingh-poonia-a-struggling-and-determined-leader/): हरियाणाः जूझते जुझारू लोग – 58   सरबतसिंह पूनिया – संघर्षशील और दृढ़निश्चयी नेता सत्यपाल सिवाच कर्मचारी हितों के लिए जो व्यक्ति हमेशा आगे बढ़कर आंदोलन की कमान संभाले, हमेशा शांत रहकर संयम से परिस्थितियों के अनुसार फैसले करे वही सच्चा नेता होता है। ऐसा संघर्षशील और दृढ़निश्चयी व्यक्तित्व का व्यक्ति ही कर सकता है। यदि हम समग्रता में देखें तो नेतृत्व के तमाम गुण सरबत सिंह पूनिया में दिखाई पड़ते हैं। संभवतः यही कारण रहा कि वे सर्वमान्य नेता के तौर पर उभर कर समाने आए। सरबत सिंह पूनिया का जन्म छोटे किसान परिवार में गांव कनोह , जिला […] - [न रोई, न चिल्लाई, न थाने गई—सीधे किताब लिख दी](https://pratibimbmedia.com/she-didnt-cry-she-didnt-scream-she-didnt-go-to-the-police-station-she-simply-wrote-a-book/): न रोई, न चिल्लाई, न थाने गई—सीधे किताब लिख दी विजय शंकर पाँडेय जापान वैसे तो तकनीक, अनुशासन और शालीनता के लिए मशहूर है, मगर अब रिकॉर्ड-कीपिंग के लिए भी इतिहास रच चुका है। एक पत्नी ने अपने पति के 520 अफेयर गिन डाले। गिनना नहीं, दस्तावेज़ीकरण किया। न रोई, न चिल्लाई, न थाने गई—सीधे किताब लिख दी। वो भी सचित्र। यानी सबूत के साथ साहित्य। कहते हैं जापान में हर चीज़ परफेक्शन से होती है। पति बेवफ़ा था, लेकिन पत्नी उससे भी ज़्यादा प्रोफेशनल निकली। हर अफेयर को सीरियल नंबर मिला, डेट, टाइम, लोकेशन और शायद रिव्यू सेक्शन भी। […] - [मुनेश त्यागी का गीत- वो  सुबह  हमीं  से आएगी](https://pratibimbmedia.com/munesh-tyagis-song-that-morning-will-come-from-us-2/):  गीत  वो  सुबह  हमीं  से आएगी मुनेश त्यागी   जब अन्याय सब मिट जाएंगे जब सब शोषण मिट जाएंगे जब भेदभाव सब मर जाएंगे जब सारे जुल्म मिट  जाएंगे वो सुबह हम ही से  आएगी उस सुबह को हम ही लायेंगे जब अमीरी और गरीबी मिट जाएगी जब बंधुता और एकता छा जाएगी जब भूख और नग्नता मिट जाएगी जब सब ओर सुंदरता छा जाएगी वो सुबह हम  ही  से  आएगी उस सुबह को हम ही लायेंगे। जब दिल रोशन हो जाएंगे जब अंधेरे सारे मिट जाएंगे जब हिंदू मुसलमान साथ चलेंगे जब जन गण मन मिल जाएंगे वो  सुबह  […] - [मनरेगा हमारे पैरों के नीचे की ज़मीन थी, वह खिसक रही है](https://pratibimbmedia.com/mnrega-was-the-ground-beneath-our-feet-its-slipping-away/): मनरेगा हमारे पैरों के नीचे की ज़मीन थी, वह खिसक रही है प्रताप भानु मेहता अगर असली आर्थिक सोच और साफ दिखने वाले पॉजिटिव पॉलिसी असर के लिए नोबेल पुरस्कार दिया जाता, तो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) बनाने वाले लोग सबसे मज़बूत उम्मीदवारों में से होते। इतने बड़े पैमाने का कोई दूसरा सरकारी प्रोग्राम सोचना मुश्किल है, जिसे इतने ध्यान से डिज़ाइन किया गया हो और जिसके असर इतने महत्वपूर्ण हों। फिर भी, MGNREGA पर जिस तरह से आमतौर पर बहस होती है, वह बहुत ही अधूरी है। इसे अक्सर सिर्फ़ एक वेलफेयर मदद मानकर खारिज […] - [पश्चिम बंगाल और शेष भारत में पीएचडी संकट](https://pratibimbmedia.com/the-phd-crisis-in-west-bengal-and-the-rest-of-india/): पश्चिम बंगाल और शेष भारत में पीएचडी संकट शुचि वडेरा पीएचडी करने के योग्य और इच्छुक छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन राष्ट्रीय आंकड़ों से पता चलता है कि आकांक्षाओं और संस्थागत सहायता के बीच भारी अंतर है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, यूजीसी-एनईटी 2025 के माध्यम से 1.28 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पीएचडी प्रवेश के लिए अर्हता प्राप्त की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14% की वृद्धि है। फिर भी, पूर्णकालिक डॉक्टरेट वित्त पोषण का प्राथमिक स्रोत, जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) केवल 5,269 उम्मीदवारों को ही प्रदान की गई, […] - [नफ़रत की राजनीति और लहूलुहान समाज](https://pratibimbmedia.com/politics-of-hatred-and-a-blood-soaked-society/): नफ़रत की राजनीति और लहूलुहान समाज धर्मेन्द्र आज़ाद हाल ही में बांग्लादेश से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। माइमंसिंह ज़िले में 18 दिसंबर की रात एक युवा हिंदू अल्पसंख्यक व्यक्ति को एक पगलाई हुई भीड़ ने ईशनिंदा के आरोप में बेरहमी से पीटा, उसे पेड़ से बाँधा गया और अंततः उसकी लाश को आग के हवाले कर दिया गया। यह हत्यारी भीड़ और कोई नहीं बल्कि वहीं के बहुसंख्यक मुस्लिम समाज के भीतर मौजूद कुछ कट्टरपंथी और नफ़रत से भरे लोग थे। ख़बरों के अनुसार पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ़्तार किया है, लेकिन […] ## Pages - [राहुल गांधी ने कहा, हमारे परिवार ने हमेशा रायबरेली के हित में काम किया ](https://pratibimbmedia.com/rahul-gandhi-said-our-family-always-worked-in-the-interest-of-rae-bareli/): रायबरेली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को रायबरेली को अपनी मां सोनिया गांधी और दादी (दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी) की कर्मभूमि बताते हुए कहा कि उनके परिवार ने हमेशा इस संसदीय क्षेत्र के हित में काम किया है, इसीलिए वह यहां से चुनाव लड़ने आए हैं। गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी अडाणी और अंबानी के हित में काम करते हैं। रायबरेली संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार राहुल गांधी ने यहां के महराजगंज स्थित ‘मेला मैदान’ में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करने के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे […] - [स्टालिन ने कहा, मोदी को हम अपनी एकता से ही हरा सकते हैं](https://pratibimbmedia.com/stalin-said-we-can-defeat-modi-only-with-our-unity/): नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) प्रमुख एम. के. स्टालिन ने रविवार को कहा कि विपक्ष एकता के जरिए ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हरा सकता है और संघीय भारत बनाने के लिए “फासीवादी” भाजपा को सत्ता से बाहर कर सकता है। स्टालिन ने यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की रैली में अपने संदेश में कहा कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी भाजपा की ”आसन्न हार के मद्देनजर बढ़ती हताशा” को दर्शाती है। स्टालिन का संदेश राज्यसभा में द्रमुक नेता तिरुचि शिवा ने पढ़ा। शिवा रैली में पार्टी की […] - [कांग्रेस अध्यक्ष खरगे बोले, भाजपा-आरएसएस जहर की तरह, लोकतंत्र को हराने के लिए सभी एकजुट हों](https://pratibimbmedia.com/congress-president-kharge-said-bjp-rss-are-like-poison-everyone-should-unite-to-defeat-democracy/): नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना ‘जहर’ से करते हुए कहा कि लोकतंत्र एवं संविधान को बचाने लिए सभी को मिलकर भाजपा को पराजित करना होगा। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ‘तानाशाही’ के विचार में विश्वास करने का आरोप लगाया और दावा किया कि जब तक प्रधानमंत्री मोदी तथा उनकी विचारधारा को सत्ता से नहीं हटाया जाएगा, तब तक देश में सुख और समृद्धि नहीं आ सकती। उन्होंने यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की ‘लोकतंत्र बचाओ महारैली’ में यह भी कहा कि संविधान बचाने और लोकसभा चुनाव […] - [Contact Us](https://pratibimbmedia.com/contact-us/): हमसे संपर्क करें हमारे साथ जुड़ने के लिए धन्यवाद! आपकी राय, प्रश्न या सुझाव के लिए हमसे सीधे संपर्क करें। नीचे दिए गए संपर्क जानकारी का उपयोग करें: सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न यदि आपके पास सामान्य प्रश्न हैं, या आपके कोई सुझाव या प्रतिक्रिया है, तो कृपया हमसे ईमेल करें: हम आपके विचार को मूल्यांकन करेंगे और शीघ्रता से जवाब देंगे। संपादकीय प्रश्न: संपादकीय प्रश्न, स्टोरी पिच, या योगदान के लिए, कृपया हमारे संपादकीय टीम से संपर्क करें, हम सहयोग और नए दृष्टिकोणों का स्वागत करते हैं। विज्ञापन और साझेदारियों के लिए: यदि आप विज्ञापन के अवसरों की खोज […] - 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