जयपाल की दो लघुकथाएँ

जयपाल की दो लघुकथाएँ

लघुकथा-1

 आंटियां

 

सब्जी वाला आता।गली की औरतें रेहड़ी घेर लेती।सब्जी में मीन-मेख निकालती..किसी सब्जी को सड़ी हुई… तो किसी को बासी..किसी को कीड़े वाली..कोई कच्ची तो कोई पक्की..लेकिन अंत में मोल-तोल करके ले लेती ।

एक दिन मौका पाकर मैने रेहड़ी वाले से पूछ ही लिया–बेटा, गली की आंटियां तुम्हारी सब्जी को इतनी गालियां क्यों देती हैं..?

–अंकल जी, बात कुछ नहीं ,बस रेट में पांच- दस रुपए कम करवाने होते हैं।

 

लघुकथा-2

टॉमी

 

श्री प्रकाश पचासी वर्ष के आसपास पहुँच गये थे। सुनता भी कम था और दिखता भी कम था। बच्चों को आवाज लगाता लेकिन कोई सुनता नहीं था l हालांकि भरा पूरा परिवार था- बेटे ,पोते, पड़-पोते सब.. । दस बार आवाज लगाओ तो कोई एक बार आए…

श्री प्रकाश आज मन ही मन सोच रहा था…इनसे तो अपना यह टॉमी (कुत्ता) ही अच्छा..एक आवाज लगाओ तो दौड़ा आता है..!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *