जनवादी लेखक संघ अंबाला ने किया विचार चर्चा और कविता पाठ का आयोजन

जनवादी लेखक संघ अंबाला ने किया विचार चर्चा और कविता पाठ का आयोजन

लेखकों ने देश के वर्तमान हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की

अंबाला शहर।  जनवादी लेखक संघ अंबाला इकाई की ओर से जनवादी लेखक संघ की स्थापना के उपलक्ष्य में एक विचार-चर्चा और कविता पाठ का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का आयोजन अंबाला शहर के न्यू प्रताप नगर में आयोजित किया गया। इस मौके पर वर्तमान दौर में लेखन की चुनौतियाँ विषय पर विचार विमर्श किया गया।

चर्चा की शुरुआत में जयपाल ने जनवादी लेखक संघ की स्थापना की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनवादी लेखक संघ की स्थापना एक ऐतिहासिक जरूरत थी । आज देश बहुत ही नाज़ुक दौर से गुजर रहा है इसीलिए सभी जनवादी-प्रगतिशील लेखकों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है कि वे स्वतंत्रता, समानता और आपसी-भाईचारे को कायम रखते हुए आपस में एकजुटता कायम करें, फासीवाद का पुरजोर विरोध करें और संवैधानिक मूल्यों को बचाएं । जलेस-अंबाला इकाई की अध्यक्षा श्रीमती अनुपम शर्मा का कहना था कि वर्तमान में वैश्विक मूल्यों के साथ इंसानियत के पक्ष में खड़ा होना हर प्रकार लेखन के लिए जरूरी है। सामाजिक कार्यकर्ता मनमोहन शर्मा ने कहा कि मीडिया ने सच से आंखे मूंद ली हैं क्योंकि संपादकों के ऊपर भी तलवार लटकी हुई है।

वरिष्ठ शायर,पत्रकार और प्रलेस के राज्य उपाध्यक्ष तनवीर जाफरी ने ए.आई. के खतरे की तरफ इशारा करते हुए कहा प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के दौर में लेखक को बहुत सतर्क होकर चलना होगा ताकि  साहित्यिकता और संवेदनशीलता को बचाया जा सके।  प्रोफेसर गुरुदेव सिंह देव ने मातृभाषाओं पर आए संकट की ओर इशारा करते हुए कहा कि  कुछ मातृ-भाषाओं के लुप्त होने का खतरा पैदा  हो गया है जिन्हें बचाना बहुत जरूरी है ।

तर्कशील पत्रिका के संपादक गुरमीत सिंह ने भी मातृभाषा को बचाने के लिए किए गए अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष की महत्वपूर्ण जानकारी साँझा की। सामाजिक कार्यकर्ता संदीप कुमार का कहना था कि दफ्तरी काम में  कठिन  शब्दों की जगह आसान शब्दावली का इस्तेमाल होना चाहिए । कहानीकार पंकज शर्मा का विचार था कि रचनाकार को अपनी रचनाओं में मानव मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए और शब्दों का प्रयोग रचना की जरूरत के अनुसार करना चाहिए।

नदीम खान ने कहा कि लेखक को सांप्रदायिक शक्तिओं को बेनकाब करना चाहिए। इसी तरह सामाजिक कार्यकर्ता सुनील शर्मा ने राजनीति के गिरते स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की ।

गोष्ठी का समापन गज़ल और कविताओं से हुआ । वरिष्ठ तनवीर जाफरी ने गज़ल से वर्तमान राजनीति पर तीखा व्यंग्य किया। प्रो.  गुरुदेव सिंह देव, कवि पंकज शर्मा,  अनुपम शर्मा  और जयपाल  ने अपनी कविताओं के माध्यम से देश के वर्तमान हालात को बदलने का आह्वान किया। मंच संचालन प्रो. गुरुदेव सिंह देव और अध्यक्षता कवि जयपाल ने की ।

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